*• रेलवे पुलों पर जलस्तर की 24×7 रियल-टाइम निगरानी से संरक्षित रेल परिचालन सुनिश्चित*
*• आधुनिक सेंसर आधारित तकनीक से बाढ़ के दौरान निगरानी हुई अधिक प्रभावी एवं विश्वसनीय*
बिलासपुर, वायरलेस न्यूज 08 जुलाई, 2026
मानसून के दौरान रेलवे पुलों पर नदियों के जलस्तर की सतत एवं सटीक निगरानी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में आधुनिक वाटर लेवल मॉनीटरिंग सिस्टम को अपनाया गया है। सेंसर आधारित यह अत्याधुनिक प्रणाली वर्तमान में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के 12 महत्वपूर्ण रेलवे पुलों पर स्थापित की गई है। यह प्रणाली 24 घंटे रियल-टाइम में जलस्तर की निगरानी करते हुए संरक्षित एवं निर्बाध रेल परिचालन सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
पूर्व में नदियों के जलस्तर का आकलन पारंपरिक मीटर गेज प्रणाली के माध्यम से किया जाता था, जिसमें मैनुअल रीडिंग लेने के कारण सूचना प्राप्त होने में विलंब तथा त्रुटि की संभावना बनी रहती थी। अचानक जलस्तर बढ़ने की स्थिति में समय पर जानकारी उपलब्ध न होने से रेलवे ट्रैक एवं पुलों की संरक्षा का त्वरित आकलन करना चुनौतीपूर्ण होता था।
इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने आधुनिक वाटर लेवल मॉनीटरिंग सिस्टम स्थापित किया है। यह प्रणाली सेंसर आधारित तकनीक के माध्यम से पुलों पर लगे जलस्तर संकेतकों की निरंतर निगरानी करती है तथा ट्रैक मैनेजमेंट सिस्टम से एकीकृत रहती है। जैसे ही नदी का जलस्तर पूर्व निर्धारित चेतावनी अथवा खतरे के स्तर तक पहुँचता है अथवा उसमें महत्वपूर्ण परिवर्तन होता है, सिस्टम स्वतः संबंधित अधिकारियों एवं अभियंताओं के मोबाइल फोन पर तत्काल एसएमएस अलर्ट भेज देता है। इससे आवश्यक सुरक्षा उपाय समय रहते लागू किए जा सकते हैं तथा रेल परिचालन को संरक्षित बनाए रखने में सहायता मिलती है।
इस प्रणाली में संबंधित सहायक मंडल अभियंता, रेल पथ निरीक्षक (पीडबल्यूआई) सहित अन्य अधिकृत अधिकारियों के मोबाइल नंबर पंजीकृत रहते हैं। परिणामस्वरूप जलस्तर में होने वाले प्रत्येक महत्वपूर्ण परिवर्तन की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों तक पहुँच जाती है, जिससे त्वरित निर्णय लेने और आवश्यक कार्रवाई करने में सुविधा होती है।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के जिन 12 महत्वपूर्ण रेलवे पुलों पर वाटर लेवल मॉनीटरिंग सिस्टम स्थापित किया गया है, वे निम्नानुसार हैं—
1. झारसुगुड़ा–ईब स्टेशनों के मध्य ईब नदी पर रेलवे पुल क्रमांक 184 अप।
2. ईब–ब्रजराजनगर स्टेशनों के मध्य रेलवे पुल क्रमांक 182 अप।
3. भूपदेवपुर–राबर्ट्सन स्टेशनों के मध्य रेलवे पुल क्रमांक 86 अप।
4. कोरबा–गेवरा रोड स्टेशनों के मध्य रेलवे पुल क्रमांक 63 डाउन।
5. नैला–चांपा स्टेशनों के मध्य हसदेव नदी पर रेलवे पुल क्रमांक 46 डाउन।
6. जयरामनगर–अकलतरा स्टेशनों के मध्य रेलवे पुल क्रमांक 12 मिडिल।
7. दगौरी–निपनिया स्टेशनों के मध्य शिवनाथ नदी पर रेलवे पुल क्रमांक 462 मिडिल।
8. रसमड़ा–दुर्ग स्टेशनों के मध्य रेलवे पुल क्रमांक 348 डाउन।
9. मुंडीकोटा–तुमसर स्टेशनों के मध्य रेलवे पुल क्रमांक 116 अप।
10. कन्हान–कामठी स्टेशनों के मध्य रेलवे पुल क्रमांक 34 अप।
11. वडसा–ब्रह्मपुरी स्टेशनों के मध्य रेलवे पुल क्रमांक 159 ।
12. बरगी–ग्वारीघाट स्टेशनों के मध्य रेलवे पुल क्रमांक 348 डाउन।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा अपनाई गई यह आधुनिक तकनीक मानसून के दौरान रेलवे पुलों एवं ट्रैक की संरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ संभावित बाढ़ जैसी परिस्थितियों में समय पर चेतावनी उपलब्ध कराकर संरक्षित, विश्वसनीय एवं निर्बाध रेल परिचालन सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रही है।
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- अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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