रायगढ़।(वायरलेस न्यूज़) भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अधिवक्ताओं और तहसील कार्यालय के कर्मचारियों के मध्य कथित झड़प मामले में एक नया मोड़ आया है। अधिवक्ता संघ की ओर से राज्य शासन को नोटिस थमाते हुए इस मामले के कथित पीड़ित रामप्रसाद सिदार को बर्खास्त किए जाने सहित उस पर धारा 420 सहित अन्य धाराओं के तहत मामला पंजीबद्ध किए जाने की मांग की है, साथ ही यह मांग भी की गई है कि उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए।

इस संबंध में जो जानकारी सामने आ रही है उसके मुताबिक पूरे एपिसोड में शिकायतकर्ता रामप्रसाद सिदार की शिकायत पर 5 अधिवक्ताओं के ऊपर एट्रोसिटी एक्ट सहित अन्य कई धाराओं के तहत दिनांक 11/ 02/2022 को चक्रधर नगर थाने में मामला पंजीबद्ध किया गया था, लेकिन कथित पीड़ित को अनुसूचित जनजाति का नहीं होने की बात कहते हुए अधिवक्ता संघ की ओर से शिकायत किए जाने पर अब तक पुलिस और प्रशासन की ओर से की गई पूरी कार्यवाही पर सवाल खड़े हो गए हैं।

अधिवक्ता संघ की ओर से दी गई ये दलील

अधिवक्ता संघ की ओर से राज्य शासन को की गई शिकायत में यह कहा गया है कि अधिवक्ताओं के खिलाफ शिकायत करने वाला शिकायतकर्ता रामप्रसाद सिदार स्वयं को सवंरा बताते हुए खुद को अनुसूचित जनजाति का सदस्य बता रहा है और इसी आधार पर वह तहसील कार्यालय में लिपिक पद पर पदस्थ है। इसी जाति के आधार पर उसने अधिवक्ताओं पर एट्रोसिटी एक्ट के तहत भी मामला दर्ज करवाया है। अधिवक्ता संघ की ओर से यह दलील दी गई है कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा याचिका डब्ल्यूपीसी क्रमांक 644/ 219 कृष्णकांत वर्सेस यूनियन बैंक ऑफ इंडिया व अन्य के मामले में पारित निर्णय 06/12/ 2019 (डी.बी.) में सवंरा जाति को अनुसूचित जनजाति नहीं माना गया है, जिससे ज्ञात होता है कि रामप्रसाद सिदार अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है। जबकि रामप्रसाद स्वयं को अनुसूचित जनजाति का सदस्य बताते हुए गैर कानूनी तरीके से शासकीय नौकरी में कार्यरत है। ऐसे में राज्य शासन की ओर से उक्त व्यक्ति पर जिसने राज्य शासन को धोखा दिया है उसके विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420 467, 468, 471 के तहत तत्काल एफ आई आर दर्ज कराया जाए साथ ही उसे तत्काल निलंबित किया जाए।

अधिवक्ता संघ ने दी यह चेतावनी

अधिवक्ता संघ रायगढ़ की ओर से शासन से रामप्रसाद सिदार के विरुद्ध तत्काल एफ आई आर कराने और उसे निलंबित किए जाने की मांग की है साथ ही यह चेतावनी भी दी है कि यदि 15 दिन के भीतर इस मामले में कार्यवाही नहीं की जाती है तो यह माना जाएगा कि कलेक्टर सहित छत्तीसगढ़ शासन के सचिव और मुख्यमंत्री एवं शासन प्रशासन के तमाम अधिकारी, नियुक्तिकर्ता और पदाधिकारी भी इस अवैध कृत्य एवं धोखाधड़ी करने वाले रामप्रसाद सिदार के साथ हैं । ऐसे में इन सभी को पार्टी बनाते हुए सक्षम न्यायालय में वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।

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Amit Mishra
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