अन्तर्राष्ट्रीय अपराध खेल जगत छत्तीसगढ़ धर्म-कला-संस्कृति बिलासपुर मध्य प्रदेश महाराष्ट्र राष्ट्रीय रेलवे साक्षात्कार हाईकोर्ट अन्य

कौआ पक्षी का श्राद्ध पक्ष में क्यों होता है महत्व

On: September 20, 2021 6:29 AM
Follow Us:

(वायरलेस न्यूज़ नेटवर्क)
श्राद्ध पक्ष ही वह 16 दिवस है जब हमें श्याम वर्ण के पक्षी कौए की महत्ता का ज्ञान होता है। कौआ यम का प्रतीक है, मृत्यु का वाहन है, जो पुराणों में शुभ-अशुभ का संकेत देने वाला बताया गया है। इस कारण से पितृ पक्ष में श्राद्ध का एक भाग कौओं को भी दिया जाता है। श्राद्ध पक्ष में कौओं का बड़ा ही महत्व है। कौए के संबंध में पुराणों बहुत ही विचित्र बात बताई गई है, मान्यता है कि कौआ अतिथि आगमन का सूचक एवं पितरों का आश्रम स्थल माना जाता है।

श्राद्ध पक्ष में कौआ अगर आपके दिए अन्न को आकर ग्रहण कर ले तो तो माना जाता है कि पितरों की आप पर कृपा हो गई।
गरुड़ पुराण में तो कौए को यम का संदेश वाहक कहा गया है। श्राद्ध पक्ष में कौए का महत्व बहुत ही अधिक माना गया है। मान्यता है कि पितृपक्ष में यदि कोई भी व्यक्ति कौए को भोजन कराता है तो यह भोजन कौआ के माध्यम से उनके पितर ग्रहण करते है। शास्त्रों में बताया गया है कि कोई भी क्षमतावान आत्मा कौए के शरीर में विचरण कर सकती है। कौआ यम का दूत होता है।
आश्विन महीने में कृष्णपक्ष के 16 दिनों में कौआ हर घर की छत का मेहमान होता है। लोग इनके दर्शन को तरसते हैं। ये 16 दिन श्राद्ध पक्ष के दिन माने जाते हैं। इन दिनों में कौए एवं पीपल को पितृ का प्रतीक माना जाता है। इन दिनों कौए को खाना खिलाकर एवं पीपल को पानी पिलाकर पितरों को तृप्त किया जाता है। धर्म ग्रंथ की एक कथा के अनुसार इस पक्षी ने देवताओं और राक्षसों के द्वारा समुद्र मंथन से प्राप्त अमृत को रस चख लिया था। यही कारण है कि कौए की कभी भी स्वाभाविक मृत्यु नहीं होती है। यह पक्षी कभी किसी बीमारी अथवा अपने वृद्धा अवस्था के कारण मृत्यु को प्राप्त नहीं होता। इसकी मृत्यु आकस्मिक रूप से होती है।
यह बहुत ही रोचक है कि जिस दिन कौए की मृत्यु होती है, उस दिन उसका साथी भोजन ग्रहण नहीं करता। यह आपने कभी ख्याल किया हो तो कौआ कभी भी अकेले में भोजन ग्रहण नहीं करता। यह पक्षी किसी साथी के साथ मिलकर ही भोजन करता है। भोजन बांटकर खाने की सीख हर किसी को कौए से लेनी चाहिए। कौए के बारे में पुराण में बताया गया है कि किसी भविष्य में होने वाली घटनाओं का आभास पूर्व ही हो जाता है। कौए को यमस्वरूप भी माना जाता है और न्याय के देवता शनिदेव का वाहन भी है।
कौआ का सबसे पहला रूप देवराज इंद्र के पुत्र जयंत ने लिया था। त्रेतायुग में एकबार जब भगवान राम ने अवतार लिया और जयंत ने कौए का रूप धारण कर माता सीता के पैर में चोंच मार दी थी। तब श्री राम ने तिनके से जयंत की आंख फोड़ दी थी। जयंत ने अपने किए की माफी मांगी, तब राम ने वरदान दिया कि पितरों को अर्पित किए जाने वाले भोजन में तुम्हें हिस्सा मिलेगा। तभी से यह परम्परा चली आ रही है कि पितृ पक्ष में कौए को भी एक हिस्सा मिलता है।

Author Profile

Amit Mishra
Latest entries

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Join Instagram

Join Now

Also Read

कटघोरा–डोंगरगढ़ नई रेल लाइन की स्वीकृति हेतु केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू के प्रयासों के प्रति स्वागत करने कार्यकर्ता हुए सक्रिय

भंनवारटंक के पास देर रात सड़क किनारे एक तेंदुआ दिखाई दिया, क्षेत्र से गुजरने वाले लोगों में वन विभाग ने सतर्कता बढ़ाई.. देखें विडियो

छत्तीसगढ़ के डीजी जेल हिमांशु गुप्ता ने बिलासपुर केंद्रीय जेल का आकस्मिक निरीक्षण कर कैदियों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं

कलेक्टर ने निर्माणाधीन गौ अभ्यारण्य का किया निरीक्षण* *फेसिंग कार्य तत्काल प्रारंभ करने दिए निर्देश*

रोटरी क्लब ऑफ बिलासपुर ने न्यू हाईटेक बस स्टैंड, तिफरा में शुरू की शीतल जल सेवा, विधायक अमर अग्रवाल ने कहा संवेदनशीलता एवं सेवा भावना उत्कृष्ट उदाहरण

सरस्वती साइकिल योजना से बेटियों की शिक्षा को मिली नई रफ्तार, भाजपा सरकार ने छात्राओं के भविष्य को किया सशक्त – अमर अग्रवाल

Leave a Comment