रायपुर (वायरलेस न्यूज) छत्तीसगढ़ का राजकीय पशु वनभैंसा अब विलुप्ति की कगार पर है, वंश वृद्धि के लिए 4 मादा वनभैंसों को असम के मानस पार्क से लाए गए वनभैंसों को बार नवापारा अभयारण्य में क्वारंटाइन रखा गया है।

जिसे बाद में चारों मादा वनभैंसे को उदंती सीतानदी अभ्यारण्य में शिफ्ट किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि पूर्व में यहां 7 नर वनभैंसे मौजूद हैं, लेकिन मादा एक भी नहीं है, जिसके कारण इनकी वंश विस्तार नहीं हो पा रहा था। छत्तीसगढ़ सरकार के निर्देश पर वन्य प्राणी विभाग द्वारा तैयार किए गए ब्रीडिंग प्लान पर सीसीएमबी की मुहर लगते ही सभी मादाओं को उदंती सीता नदी अभ्यारण्य शिफ्ट कर दिया जाएगा।पीसीसीएफ सुधीर अग्रवाल की अगुवाई में अधिकारी अभ्यारण्य में मौजूद वन भैंसा प्रजनन केंद्र की कमियों को दूर करने में जुट गए हैं, ताकि अभियान सफल हो सके।
असम के मानस पार्क से लाए गए 4 मादा वनभैंसों को बार नवापारा अभयारण्य में क्वारंटाइन किया गया है।
असम के मानस पार्क से लाए गए 4 मादा वनभैंसों को बार नवापारा अभयारण्य में क्वारंटाइन किया गया है।
छत्तीसगढ़ के राजकीय पशु का दर्जा प्राप्त वनभैंसे की प्रजाति के संवर्धन के अभियान को अब गति मिलनी शुरू हो गई है। उदंती सीता नदी अभयारण्य में पाए जाने वाले मूल नस्ल की सभी मादाएं खत्म हो चुकी थीं। यहां केवल 7 नर भैंसा ही मौजूद थे। सरकार ने 2020 में ही असम के मानस टाइगर रिजर्व में मौजूद वनभैंसे को छत्तीसगढ़ लाने का निर्णय लिया था। सरकार अब तक असम से 5 मादा और 1 नर लेकर आ चुकी है, जिसे भारत का सबसे बड़ा वन भैंसा विस्थापन माना गया है।
नस्ल का मिलान देहरादून स्थित राष्ट्रीय वन्य जीव अनुसंधान से कराया गया था। 15 अप्रैल को मानस अभयारण्य से 1700 किमी की दूरी तय कर 4 मादा वन भैंसों को लाया गया। 2020 में पहली खेप में एक नर और एक मादा को लाया गया था। असम से लाए गए सभी 6 वन भैंसे बार नवापारा अभयारण्य में रखे गए। 15 अप्रैल को लाई गई 4 मादाओं को यहां क्वारंटाइन किया गया गया है। इसे लाने के लिए उदंती सीतानदी अभयारण्य के उप निदेशक अरुण जैन, वन्य प्राणी चिकित्सक डॉक्टर राकेश वर्मा और डॉक्टर पीके चंदन के साथ 30 से ज्यादा कर्मियों की टीम बनाई गई थी। किसी भी देश का ये पहला वन भैंसा विस्थापन है, जिसमें 1700 की दूरी तय कराया गया। इसके लिए सारी सुविधाओं का ख्याल रख विभाग ने एक खास प्रकार का वाहन बनाया।
ब्रीडिंग प्लान तैयार, सीसीएमबी की सहमति का इंतजार
मादाओं के आते ही सोमवार को पीसीसीएफ सुधीर अग्रवाल ने उदंती सीता नदी अभ्यारण्य में मौजूद वन भैंसा प्रजनन केंद्र का दौरा कर आवश्यक सुविधाओं का निरीक्षण किया। स्थानीय अफसरों के साथ ब्रीडिंग प्लान पर गहन चर्चा भी की गई। वरुण जैन ने बताया कि राजकीय पशु का कुनबा बढ़ाने के लिए ब्रीडिंग प्लान तैयार है।
प्लान के तहत जल्द ही उदंती अभयारण्य के जंगलों में पहले की भांति वन भैंसों को स्वच्छंद रूप से विचरण करते देखा जा सकेगा। प्लान के तहत नर व मादा के मेटिंग अवधि, स्थान के अलावा अभयारण्य में मौजूद मूल नस्ल के भैंस के कोशिकाओं से आर्टिफिशियल रिप्रोडयूसिंग का प्लान तैयार है। प्लान के बारे ज्यादा विस्तार से नहीं बताया गया, लेकिन उन्होंने बताया कि आगामी 20 अप्रैल को सीसीएमबी यानी कोशकीय एवं आड़विक जीव विज्ञान केंद्र की टीम से अंतिम सहमति मिलने के बाद प्रक्रिया शुरू की जाएगी। प्लानिंग के मुताबिक जल्द ही बारनवापारा में मौजूद मादाओं को उदंती अभयारण्य में शिफ्ट किया जाएगा।
आशा और खुशी की हो चुकी है मौत
राजकीय पशु पहले उदंती के जंगलों में आसानी से घूमते देखे जा सकते थे। वर्ष 2000 तक इनकी संख्या 40 थी, फिर ये तेजी से घटते चले गए, क्योंकि मादा वन भैंसों की संख्या कम थी। 2010 के बाद संख्या जब आधी हुई, तो उस समय एकमात्र मादा आशा नाम की वन भैंसा रह गई। 2020 में आशा और 2021 में अंतिम मादा भैंसा खुशी के साथ संख्या बढ़ाने की उम्मीद टूट गई। 2015 के बाद करनाल में क्लोन के जरिए भी वंश बढ़ाने का प्रयोग किया गया था, जो सफल नही हुआ। वर्तमान में उदंती अभयारण्य में शुद्ध नस्ल के 7 समेत करनाल से लाए गए वन भैंसे के साथ कुल 19 भैंसा प्रजनन केंद्र में मौजूद हैं।
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