*उच्च न्यायालय का विधवा को 60 दिन में संशोधित वेतनमान/समय-आधारित वेतनमान, क्रमोन्नति एरियर्स एवं पेंशन का पुनर्निर्धारण प्रदान करने के लिए सक्त निर्देश*
बिलासपुर (वायरलेस न्यूज) छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 06/01/2026 को प्रतिवादी प्राधिकारी को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ता के मामले पर, संशोधित वेतनमान/समय-आधारित वेतनमान, क्रमोन्नति एरियर्स एवं पेंशन का पुनर्निर्धारण कर देने के लिए, लागू नियमों, पॉलिसी और कानून के हिसाब से, जिसमें मृतक अधिकारी के सर्विस रिकॉर्ड और ACR पर ठीक से विचार करना शामिल है, जो की 60 दिनों के अंदर फैसला करने के सख़्त आदेश पारित किया है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद के न्यायालय में हुई ।
यह याचिका याचिकाकर्ता ने अपने पति की मौत के 14 साल बाद अपने अधिवक्ता नेल्सन पन्ना और आशुतोष मिश्रा के द्वारा दायर की थी। मामले का तथ्य यह है कि याचिकाकर्ता के पति, स्वर्गीय श्री बेनेडिक्ट एक्का जो की नायब तहसीलदार के पद पर नियुक्त हुए थे दिनांक 11.06.1975 को राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग में और सेवा कार्यकाल के दौरान श्री एक्का नायब तहसीलदार, तहसील भैयाथान, जिला सूरजपुर के रूप में पदस्थ रहने के दौरान 04.04.2009 को उनकी मृत्यु हो गई। अपनी सेवा अवधि के दौरान, 10/11/2017 को संभागीय संयुक्त निदेशक, कोष, लेखा और पेंशन, अंबिकापुर संभाग, सरगुजा ने आयुक्त, सरगुजा संभाग को पत्र लिखकर याचिकाकर्ता के पति को 01.04.2006 से उच्च वेतन बैंड 89300-34800 के साथ ग्रेड पे ₹4400 में द्वितीय समय वेतनमान प्रदान करने की अनुशंसा की। इसके अनुसरण में, याचिकाकर्ता ने प्रतिवादी कलेक्टर, जिला सरगुजा के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत किया, जिसमें बकाया राशि और उसकी पेंशन के परिणामी पुनर्निर्धारण के साथ स्वीकार्य समय वेतनमान प्रदान करने की मांग की। यह कि दिनांक 10.11.2017 के पत्र में निहित समय वेतनमान नीति के अनुसार याचिकाकर्ता के पति 11.06.1985 से 10 वर्ष की सेवा पूरी करने पर प्रथम समय वेतनमान और 11.06.1995 से 20 वर्ष की सेवा पूरी करने पर द्वितीय समय वेतनमान के हकदार थे; हालांकि, प्रतिवादियों ने मनमाने ढंग से और अवैध रूप से द्वितीय समय वेतनमान के लाभ को 01.04.2006 तक सीमित कर दिया है। यह कि दिनांक 10.11.2017 की क्रमोन्नति नीति के तहत याचिकाकर्ता के पति 12 वर्ष की सेवा पूरी करने पर प्रथम क्रमोन्नति के हकदार दिनांक 11.06.1987 को थे और 24 वर्ष की सेवा पूरी करने पर द्वितीय क्रमोन्नति के हकदार दिनांक 11.06.1999 को थे। लेकिन प्रतिवादी प्राधिकारी ने ये फ़ायदे नहीं दिए।
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