नियम — कानून ना मानने वालों का कैसा संवैधानिक अधिकार !!!

नाबालिग से बलात्कारियों की सजा फांसी तय हो

( मनोज कुमार द्विवेदी, अनूपपु्र ,मप्र )

(वायरलेस न्यूज नेटवर्क)

दिल्ली के निर्भया काण्ड के बाद आज भी देश मे कुछ भी नहीं बदला है। समाज मे छुपे भेडिये और उन्हे बचाने वाले लोग बलात्कार की घटना मे बराबर के जिम्मेदार हैं । ऐसी घटनाओं की फास्ट ट्रैक अदालतों मे सुनवाई और तय समय मे फांसी की सजा नहीं दी जाएगी, राक्षसों के मन मे समाज, कानून का कोई भय उत्पन्न नहीं होगा।
सरकार यह भी सुनिश्चित करे कि जो लोग नियम, कानून ,कायदे नहीं मानते , जिनके मन मे देश के संविधान के प्रति सम्मान ना हो ,उनके सभी संवैधानिक अधिकार स्वयमेव खत्म माने जाएं।

श्री गंगानगर राजस्थान मे एक 13 साल की बच्ची जो ट्यूशन से अपने घर जा रही थी। उसने
एक रिक्शा वाले से उसने कहा कि आप मुझे घर छोड़ दीजिए रिक्शावाला उसे बहलाकर गेस्ट हाउस पर ले गया।वहां उसे न सिर्फ 10000 में बेच दिया बल्कि खुद उसका बलात्कार भी किया
उसके बाद उसे बच्ची का गेस्ट हाउस संचालक ने बलात्कार किया फिर गेस्ट हाउस वाले ने तीन दिन 12 लोगो से उसे बच्ची का बलात्कार करवाया ।फिर उस गेस्ट हाउस संचालक ने उस बच्ची को दूसरे गेस्ट हाउस वाले को 50 हजार में बेच दिया और वहां 20 से ज्यादा लोगों ने उसे बच्चे का बलात्कार किया।
इस तरह उसे बच्ची के साथ जो मात्र 13 साल की मासूम बच्ची थी 32 दरिंदों ने बलात्कार किया । बच्ची जब दर्द से चीखती तो उसे शराब पिला देते जिससे बच्ची की आवाज कमरे से बाहर नहीं जाए।‌ राजस्थान की इस रूह कंपा देने वाली घटना ने देश को झकझोर कर रख दिया।

लेकिन इससे क्या कोई फर्क पडने वाला है ?
शायद बिल्कुल भी नहीं ।

हमारे आसपास ऐसी ही घटनाएं हुई हैं, जहाँ बलात्कारी नर पिशाच 32 की जगह 5-6 ही थे।
पूरा समाज ,परिस्थिति जन्य साक्ष्य चीख – चीख कर सामूहिक बलात्कार की पुष्टि कर रहे थे। लोग सडकों पर आए ,धरना – प्रदर्शन क्या नहीं किया गया ? जिन पर कार्यवाही करने की जिम्मेदारी थी ,वे ही यह भूल गये कि वो भी किसी अबोध बच्ची के पिता, भाई, परिजन होंगे।
मरी हुई बुजदिल आत्माओं के साथ पशुवत पेट पालते लोगों के दम पर ही बलात्कारी समाज मे बेखौफ अगले शिकार की खोज मे रहता है। उसे कोई फर्क नहीं पडता कि फिर वो बच्ची केवट है, ब्राम्हण है , क्षत्रिय या दलित ।
बलात्कारी कमजोर वर्ग को ही शिकार बनाता है। जहाँ उसे छ: इंच छोटा हो जाने का डर हो ,वह आंख उठा कर देखता तक नहीं ।

तो अब यह बहुत जरुरी है कि बलात्कारियों मे गर्दन छोटी होने या सुनिश्चित लंबी होने का भय हो। नर पिशाचों मे स्पष्ट संदेश जाना चाहिए कि यदि उसने किसी बहन ,बेटी पर कुदृष्टि डाली तो उसकी जिन्दगी 6 महीने ही शेष होगी।
आज ही पश्चिम बंगाल मे हथियार छीन कर भागते एक बलात्कारी को वहाँ की पुलिस ने गति प्रदान किया है। नियम ,कायदे, संविधान केवल उनके लिये ही नहीं होना चाहिए जो उसका सम्मान करते हैं। जो इन्हे नहीं मानते, जिनके मन मे इसके प्रति कोई डर – भय ना हो, उनके सभी संवैधानिक अधिकार खत्म माना जाना चाहिए।

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Amit Mishra
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