ऐसा प्रतीत होता है कि छत्तीसगढ़ वन विभाग जसपुर हाथी शावक को अपनी मां से मिलाने में बिल्कुल उत्सुक नहीं है और जिद में अड़ा है कि उसको उसकी मां से नहीं मिलाना है संभवतः मुख्यालय चाहता है रेस्क्यू सेंटर में हाथी की संख्या बढ़ाना चाहता है

अगर यह आरोप गलत है तो फोटो देख करके बताएं कि

हाथी शावक को किसी ग्रीन नेट से कवर किए हुए बाड़े में क्यों नहीं रखा गया है?

हाथी शावक के पास इतने लोग किसकी अनुमति से खड़े हुए हैं? जबकि बहुत लोग वन विभाग के अधिकारियों को बता चुके हैं कि मानव scent शावक को लग जाएगी तो मां स्वीकार नहीं करेगी और इसी कारण से संभवतः मां ने स्वीकार नहीं किया गया है.

जो लोग फोटो में दिख रहे हैं वह हाथी को जरूर छुए होंगे अगर यह लोग विशेषज्ञ हैं तो इन्होंने हाथ में ग्लोब्स क्यों नहीं पहन रखे हैं?

हाथी के बच्चे को हार्ड फ्लोर पर क्यों सुलाया गया है?

वन विभाग से यह भी पूछा जाना चाहिए कि 4 दिन बाद विशेषज्ञ डॉक्टर क्यों पहुंचे?
पहले दिन उन्हें क्यों नहीं पहुंचाया गया? इस बात का भी खुलासा किया जाना चाहिए कि क्या मुख्यालय ने विशेषज्ञ डॉक्टर को भेजा या डीएफओ ने देखा कि मुख्यालय विशेषज्ञ नहीं भिजवा रहा है तो खुद ने विशेषज्ञ डॉक्टर को बुलाया?

चर्चा अनुसार क्षेत्र में दो हाथी परिवार घूम रहे थे एक ही हाथी परिवार के पास में लाने का प्रयत्न क्यों किया गया?

हाथी शावक को दूध पिलाने के लिए क्या वन विभाग के पास बोतल है या उसे अनहाइजीनिक तरीके से पॉलिथीन में छेदा करके दूध पिलाया गया? हजार रुपए की बोतल आती है अगर 12 डिवीजन में हाथी वितरण करते हैं तो 12000 मैं एक एक बोतल रखी जा सकती है मेरा निवेदन है कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी एक बैंक अकाउंट नंबर जारी करें जहां पर वन्य प्रेमी बोतल खरीदने के लिए चंदा भेज सके

वन विभाग इस बात का भी खुलासा करें की ऐसे हाथी शावकों को दूध पिलाने के लिए मिल्क फार्मूला क्या उन्होंने सभी डीएफओ को प्रोटोकॉल के साथ उपलब्ध कराया है? और ऐसा फार्मूला उपलब्ध कराने के लिए वन विभाग को कितने साल पहले निवेदन किया गया था?

नितिन सिंघवी

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