कोविड-19 सामग्री खरीदी में वित्तीय अनियमितता का मामला
भाजपा ने आरटीआई से प्राप्त दस्तावेज को बनाया आधार

रायपुर। (वायरलेस न्यूज) भाजपा आरटीआई प्रकोष्ठ ( सूचना का अधिकार) ने प्रदेश के स्वास्थ मंत्री टीएस सिंहदेव और स्वास्थ्य सचिव प्रसन्ना आर के खिलाफ छत्तीसगढ़ राज्य लोक आयोग में बुधवार को प्रकरण दर्ज कराया है। भाजपा ने स्वास्थ मंत्री और सचिव के खिलाफ कोविड-19 में भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों को शिकायत का आधार बनाया।

उल्लेखनीय है कि भाजपा ने कोविड-19 संक्रमण काल के दौरान हुई मेडिकल दवा और सामग्री खरीदी में अनियमितता का मामला जोरशोर से उठाया था। ऐसे ही एक शिकायत पर चिकित्सा शिक्षा विभाग ने संचालक चिकित्सा शिक्षा विभाग के निर्देशन में एक जांच कमेटी का गठन किया था। उच्च स्तरीय जांच कमेटी द्वारा की गई जांच में कोविड-19 खरीदी तथा अन्य मामले में डॉ. निर्मल वर्मा को दोषी माना गया।

डॉ निर्मल वर्मा जोकि वर्तमान में पंडित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर के प्राध्यापक के पद पर नियुक्त हैं । डॉ वर्मा को पूर्व में सरकार ने विशेष कृपा करते हुए अतिरिक्त संचालक चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा प्रभारी अधिकारी चंदूलाल चंद्राकर महाविद्यालय के पद पर नियुक्त किया था। मालूम हो कि जांच कमेटी द्वारा डॉ. निर्मल वर्मा को कोविड-19 दवा खरीदी का दोषी माना गया इस पर संचालक चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा कार्यवाही हेतु सचिव प्रसन्ना आर को गत 2 सितंबर 2022 को पत्र भेजा और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा सर्विसेज के नियमानुसार कार्यवाही करने के लिए अनुरोध किया।

डेढ़ माह बाद भी कार्रवाई नही
भाजपा आरटीआई प्रकोष्ठ का आरोप है कि इस मामले में डेढ़ माह बीत जाने के बाद भी दोषी अधिकारी डॉ निर्मल वर्मा के खिलाफ कोई कार्रवाई नही की गई। इसके पीछे मुख्य वजह मंत्री और सचिव का संरक्षण है।
दोषी को संरक्षण देने के मामले में आयोग पहुँचे:-
भाजपा सूचना का अधिकार प्रकोष्ठ के सदस्य वैभव वैष्णव बैरागी ने कार्रवाई नही होने पर पुनः आरटीआई से दस्तावेज प्राप्त कर सचिव तथा मंत्री को पत्र प्रेषित कर उचित कार्यवाही की मांग की। किंतु सचिव तथा मंत्री के द्वारा कोई कार्यवाही नही की गई , तब जाकर श्री बैरागी ने छत्तीसगढ़ लोकायुक्त न्यायालय के समक्ष स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव तथा सचिव प्रसन्ना आर के विरुद्ध शासन द्वारा प्राप्त शक्तियों के दुरुपयोग करने पर तथा आरोपित व्यक्ति को संरक्षण दिए जाने पर न्यायालय लोकायुक्त के समक्ष प्रकरण दाखिल किय
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