आज विश्व पैंगोलिन दिवस…
आखिर पैंगोलिन नामक जीव की क्यों हो है दुनिया में सबसे ज्यादा तस्करी ?

(अमित मिश्रा संपादक वायरलेस न्यूज)
आज विश्व पैंगोलिन दिवस है दुनिया में यह बहुत तेजी से विलुप्त की कगार पर है , छत्तीसगढ मे सर्वाधिक बस्तर, कांकेर कोंडागांव नारायणपुर, गरियाबंद महासमुन्द में शिकार हो रहे हैं। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) के मुताबिक, दुनियाभर में वन्य जीवों की अवैध तस्करी के मामले में अकेले 20 फीसदी योगदान पैंगोलिन का है। यह एक ऐसा जानवर है, जिसकी तस्करी पूरी दुनिया में सबसे अधिक हो रही है। खासतौर पर चीन में इस जानवर का अधिक डिमांड है। क्योंकि इसके खाल और मांस से पारंपरिक दवाईयां बनाई जा रही हैं।
इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) के मुताबिक, दुनियाभर में वन्य जीवों की अवैध तस्करी के मामले में अकेले 20 फीसदी योगदान पैंगोलिन का है। यह एक ऐसा जानवर है, जिसकी तस्करी पूरी दुनिया में सबसे अधिक हो रही है। खासतौर पर चीन में इस जानवर का अधिक डिमांड है। क्योंकि इसके खाल और मांस से पारंपरिक दवाईयां बनाई जा रही हैं।
बता दें कि पैंगोलिन शर्मीले प्रवृति का जीव है, जो धरती पर लगभग 60 मिलियन सालों से पाए जाते हैं। ये जीव चींटियां खाकर गुजारा करते हैं। शरीर पर कड़ी और सुनहरी-भूरी स्केल्स वाले इन जीवों का मांस भी खूब शौक से खाया जाता है। एक किलो पैंगोलिन के मांस की कीमत करीब 27,000 रुपये तक होती है। वेट मार्केट में दूसरे कम कीमत के सस्ते जीवों के साथ पैंगोलिन नहीं बिकता, बल्कि महंगे रेस्त्रां ही इसे बेचते या पकाते हैं।
वहीं इस जीव का दूसरा सबसे बड़ा इस्तेमाल ट्रेडिशनल चाइनीज मेडिसिन बनाने में होता है। पैंगोलिन के मांस से अलग दवाएं बनती हैं, तो इसके स्केल्स से अलग किस्म की दवा बनती हैं। हर दवा का उपयोग अलग बीमारी के लिए होता है। पैंगोलिन के स्केल्स यानी शरीर की ऊपरी कड़ी परत से बनने वाली दवाएं चॉकलेट के बार की तरह दिखती हैं, लेकिन काफी कठोर होती हैं। इसे गर्म पानी या अल्कोहल में घोलकर पिया जाता है।
वहीं इस जीव का दूसरा सबसे बड़ा इस्तेमाल ट्रेडिशनल चाइनीज मेडिसिन बनाने में होता है। पैंगोलिन के मांस से अलग दवाएं बनती हैं, तो इसके स्केल्स से अलग किस्म की दवा बनती हैं। हर दवा का उपयोग अलग बीमारी के लिए होता है। पैंगोलिन के स्केल्स यानी शरीर की ऊपरी कड़ी परत से बनने वाली दवाएं चॉकलेट के बार की तरह दिखती हैं, लेकिन काफी कठोर होती हैं। इसे गर्म पानी या अल्कोहल में घोलकर पिया जाता है।

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