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भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग रीढ़ की हड्डी विहीन सरकारी निकाय- कैट हीरा लाल लोकचंदानी
चेयरमैन कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स टीम (ओडिशा)

On: March 9, 2022 12:52 PM
  • भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग रीढ़ की हड्डी विहीन सरकारी निकाय- कैट*

अमेज़न द्वारा अपने पोर्टल पर निजी लेबल बेचने से संबंधित उल्लंघनों के खिलाफ अपनी जांच खत्म करने के आर्डर पर भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स ने सीसीआई को बिना सिद्धान्तों वाला तथा दबाव में कार्य करने वाला और रीढ की हड्डी रहित निकाय करार दिया,जो की एक रेगुलेटर के तौर पर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में बिलकुल फेल हो गया है ! सीसीआई में प्रतिस्पर्धा के विषयों की शिकायतें लम्बे समय तक लंबित रहती हैं और कोई भी गंभीरता नहीं होती जिसके कारण देश का व्यापार चाहे तबाह ही क्यों न हो जाए! कैट ने केंद्र सरकार से सीसीआई की कार्यशैली पर नए सिरे से विचार कर चुस्त दुरुस्त करने की मांग की है !

कैट के राष्ट्रीय वाईस चैयरमैन श्री ब्रिज मोहन अग्रवाल, अध्यक्ष श्री बी सी भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि सीसीआई ने 13 अक्टूबर, 2021 को प्रकाशित एक विसगविक समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर खुद से संज्ञान लेते हुए 21 अक्टूबर को एक स्वत: मामला शुरू करते हुए अमेज़ॅन से विवरण मांगने का आदेश जारी किया था और बिना कोई तफ्तीश किये कानून के अपराधी अमेज़ॅन के खिलाफ इतनी महत्वपूर्ण जांच को अचानक से बन्द कर दिया है। उन्होंने आगे कहा कि समाचार एजेंसी की रिपोर्ट बिल्कुल स्पष्ट थी कि कैसे अमेज़ॅन अपने निजी लेबल व्यवसाय को आगे बढ़ा रहा था, जब इसे केवल एफडीआई मानदंडों के अनुसार मार्केटप्लेस के रूप में संचालन करना चाहिए था। कायदे से सीसीआई को उक्त समाचार एजेंसी को तलब कर उसके द्वारा अपनी रिपोर्ट में अमेज़न पर लगे आरोपों की पुष्टि के लिए दस्तावेज मांगने चाहिए थे लेकिन सीसीआई ने एजेंसी को बुलाया तक नहीं जो स्पष्ट रूप से प्राकृतिक न्याय के मूल सिद्धांत के विरूद्ध है

कैट ने कहा कि भारत के व्यापारी बेहद परेशान और स्तब्ध हैं कि बार-बार, भारतीय खुदरा पारिस्थितिकी तंत्र को केवल इसलिए असुरक्षित बेसहारा छोड़ दिया जा रहा है क्योंकि एन्टी ट्रस्ट रेग्युलेटर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में विफल रहा है। सीसीआई को यह सुनिश्चित करना था कि सभी हितधारकों के हितों की रक्षा की जानी चाहिए, लेकिन पिछले 5-7 वर्षों में, विदेशी बहुराष्ट्रीय दिग्गज नियमो को ताख पर रखकर भारतीय बाजार पर अपनी पकड़ जमा ली है, और सीसीआई मात्र मुखदर्शक बन विदेशी खिलाड़ियों पर लगाम नहीं लगा पाया है।

तीनों नेताओं ने कहा, यह सुनिश्चित करना सरकार का कर्तव्य है कि भारत के आठ करोड़ व्यापारी विदेशी खुदरा कारोबारियों के आसमान व्यापार संचालन और माल प्रैक्टिस के चलते बर्बाद न हो , लेकिन अभी तक वाणिज्य मंत्रालय को विभिन्न शिकायतों और अभ्यावेदनों को देने के बावजूद कोई ठोस उपाय नहीं किया गया है। डीपीआईआईटी मुख्य रूप से भारत के आंतरिक व्यापार की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है, लेकिन यह गंभीर चिंता का विषय है कि भारतीय व्यापारियों का डीपीआईआईटी की प्रभावकारिता में विश्वास तेजी से खत्म हो रहा है

Author Profile

Amit Mishra
Amit Mishra
अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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