इतिहास देखने की सलाह देने पर काँग्रेस महामंत्री को बताया उमेश अग्रवाल ने काश्मीर से जुड़ा कड़वा सच
रायगढ (वायरलेस न्यूज़):- प्रदेश भाजपा मंत्री ओपी चौधरी व जिलाभाजपा अध्यक्ष उमेश अग्रवाल के न्योते पर शहरवासियों ने
कश्मीरी पंडितों पर हुये अत्याचार को दिखाने वाली फिल्म द कश्मीर फाइल्स थियेटर में देखी l इस फिल्म में भारत माता की जय व जय श्री राम के नारे सुनकर काँग्रेस कार्यालय में खलबली मचना स्वाभाविक है l काश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार के दौरान केंद्र सरकार को भाजपा के समर्थन का आरोप लगाने वाले काँग्रेस महामंत्री को मुँह तोड़ जवाब देते हुए जिलाभाजपा अध्यक्ष उमेश अग्रवाल ने कहा कि जय श्री राम व भारत माता की जय नारा लगते ही काँग्रेस को इस्लाम खतरे में नजर आने लगता है l जिलाभाजपा अध्यक्ष ने काश्मीर से जुड़ा कड़वा सच आम जनता के समक्ष रखते हुए कहा कि कश्मीरी पंडितों के साथ हुए नरसंहार व पलायन के पहले जम्मू कश्मीर में 1987 के दौरान व एनसी-कांग्रेस गठबंधन की जीत हुई थी l 1987 के चुनाव से पहले राजीव गांधी और फारुख अब्दुल्ला के बीच एक समझौता हुआ। इसके बाद नेशनल कॉन्फ़्रेंस और कांग्रेस ने गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ा। इसमें नेशनल कॉन्फ़्रेंस को 40, कांग्रेस को 26, भारतीय जनता पार्टी को दो और निर्दलीयों ने आठ स्थानों पर जीत दर्ज की। जिसमे फारुख अब्दुल्ला मुख्यमंत्री बने। काँग्रेस का आरोप है कि पलायन के दौरान भाजपा के समर्थन से चल रही वीपी की केंद्र सरकार से राजपाल जगमोहन की नियुक्ति भाजपा ने करवाई इसलिए कश्मीरी पंडितों के नरसंहार व पलायन की जिम्मेदार भाजपा है l उमेश अग्रवाल ने बताया कि जगमोहन की नियुक्ति 19 जनवरी 1990 को हुई और इससे पहले 1989 तक कश्मीर घाटी के हालात पूरी तरह बिगड़ चुके थे। पाकिस्तान परस्त दर्जनों आतंकी संगठनों घाटी में समानांतर सरकार चलाना शुरू कर चुके थे। इन संगठनों में जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट मुख्य था। केंद्र में राजीव गांधी की सरकार के दौरान ही जेकेएलएफ के आतंकियों ने कश्मीरी हिंदूओं पर हमले शुरू कर दिये थे। जगमोहन की तैनाती राज्यपाल के तौर पर 19 जनवरी 1990 से पहले कश्मीर घाटी के प्रमुख राष्ट्रवादी नेता पंडित टीकालाल टपलू की हत्या 14 सितंबर 1989 को कर दी गई थी l 4 नवंबर 1989 को टपलू की हत्या के मात्र सात सप्ताह बाद जस्टिस नीलकंठ गंजू की हत्या कर दी गयी। पं० नीलकंठ गंजू ने मकबूल बट को फांसी की सजा सुनाई थी l 4 जनवरी सन 1990 को स्थानीय उर्दू अखबार में हिज्बुल मुजाहिद्दीन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि कश्मीरी पंडितों या तो इस्लाम क़ुबूल करो या फिर घर छोड़कर चले जाओ l 5 जनवरी सन 1990 की सुबह गिरिजा पण्डित की 60 वर्षीय माँ का शव जंगल में मिला उनके साथ बलात्कार किया गया था, उनकी आंखों को फोड़ दिया गया था, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके साथ गैंगरेप के बाद हत्या की बात सामने आई l उसके अगली सुबह गिरजा की बेटी गायब हो गई l 7 जनवरी सन 1990 को गिरजा पण्डित ने सपरिवार घर छोड़ दिया यह घाटी से किसी पण्डित का पहला पलायन था l घाटी में पाकिस्तान के पाँव जमना, घाटी में हिज्बुल मुजाहिद्दीन का राज फारुख अब्दुल्ला की सरकार की देन थी जिसका समर्थन काँग्रेस कर रही थी l 19 जनवरी सन 1990 को सभी कश्मीरी पण्डितों के घर के सामने नोट लिखकर चिपका दिया गया – “कश्मीर छोड़ो या अंजाम भुगतो या इस्लाम अपनाओ.l 19 जनवरी सन 1990, के दौरान बढ़ते हुए विवादों के बीच तत्कालीन मुख्यमंत्री फ़ारुख अब्दुल्ला ने इस्तीफा दे दिया और प्रदेश में राज्यपाल शासन लग गया. तत्कालीन राज्यपाल गिरीश चन्द्र सक्सेना ने केंद्र सरकार से सेना भेजने की संस्तुति भेजी. लेकिन तब तक लाखों कश्मीरी मुसलमान सड़कों पर आ गये, बेनजीर भुट्टो ने पाकिस्तान से रेडियो के माध्यम से भड़काना शुरू कर दिया, स्थानीय नागरिकों को पाकिस्तान की घड़ी से समय मिलाने को कहा गया, सभी महिलाओं और पुरुषों को शरियत के हिसाब से पहनावा और रहना अनिवार्य कर दिया गया. बलात्कार और लूटपाट के कारण जन्नत-ए-हिन्द, जहन्नुम-ए-हिन्द बनता जा रहा था. सैकड़ों कश्मीरी हिंदुओं की बहन बेटियों के साथ सरेआम बलात्कार किया गया फिर उनके नग्न बदन को पेड़ों से लटका दिया गया l 19 व 20 जनवरी 1990 की कश्मीर घाटी की सर्द रातों में मस्जिदों से एलान किये गए कि सभी कश्मीरी पंडित कश्मीर छोड़ कर चले जायें, अपनी पत्नी और बेटियों को भी यहीं छोड़े ।1500 मन्दिर नष्ट कर दिए गए लगभग 5000 कश्मीरी हिन्दुओ की हत्या की गई ।
23 जनवरी 1990 को 235 से भी ज्यादा कश्मीरी पण्डितों की अधजली हुई लाश घाटी की सड़कों पर मिली, छोटे छोटे बच्चों के शव कश्मीर के सड़कों मिलने शुरू हो गये, बच्चों के गले तार से घोंटे गये और कुल्हाड़ी से काट दिया गया महिलाओं को बंधक बना कर उनके परिवार के सामने ही सामूहिक बलात्कार किया गया, आँखों में राड घुसेड़ दिया गया, स्तन काट कर फेंक दिया, हाथ पैर काट कर उनके टुकड़े कर कर फेंके गये, मन्दिरों को पुजारियों की हत्या करके उनके खून से रंग दिया इष्ट देवताओं और भगवान के मूर्तियों को तोड़ दिया गया l 24 जनवरी सन 1990 को तत्कालीन राज्यपाल ने कश्मीर बिगड़ते हालात देखकर फिर से केंद्र सरकार को रिमाइंडर भेजा लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री कार्यालय से कोई जवाब नहीं आया उसके बाद राज्यपाल ने विपक्ष के नेता राजीव गाँधी को एक पत्र लिखा जिसमें कश्मीर की बढ़ती समस्याओं का जिक्र था, उस पत्र के जवाब में भी कुछ नहीं आया.l 26 जनवरी सन 1990 को भारत अपना 38 वाँ गणतंत्र दिवस मना रहा था उस समय कश्मीर के मूलनिवासी कश्मीरी पण्डित अपने खून एवम् मेहनत से सींचा हुआ कश्मीर छोड़ने को विवश हो गये थे, वो कश्मीर जहाँ की मिट्टी में पले बढ़े थे उस मिट्टी में दफन होने का ख्वाब उनकी आँखों से टूटता जा रहा था l 26 जनवरी की रात कम से कम 3,50000 हजार कश्मीरी पण्डितो ने एक रात में पलायन किया l 29 जनवरी तक घाटी एकदम से कश्मीरी पण्डितों से विहीन हो चुकी थी लेकिन लाशों के मिलने का सिलसिला रुक नहीं रहा था. 2 फरवरी सन 1990 को राज्यपाल ने साफ साफ शब्दों में लिखा था कि अगर केंद्र ने अब कोई कदम ना उठाये तो हम कश्मीर गवाँ देंगे इसकी जानकारी मिलते ही बीजेपी के नेता अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में हज़ारों कार्यकर्ता प्रधानमंत्री कार्यालय पहुँच कर आमरण अनशन पर बैठ गये l 6 फरवरी सन 1990 को केंद्रीय सुरक्षा बल के दो दस्ते अशांत घाटी में जा पहुँचे लेकिन उपद्रवियों ने उनके ऊपर पत्थर और हथियारों से हमला कर दिया. सीआरपीएफ ने कश्मीर के पूरे हालात की समीक्षा करते हुए एक रिपोर्ट गृह मंत्रालय को भेज दी. तत्कालीन प्रधानमंत्री एवम् गृहमंत्री चन्द्रशेखर ने इस रिपोर्ट पर गौर करते हुए राष्ट्रपति को भेजते हुए अफ्स्पा लगाने का निवेदन किया. तत्कालीन राष्ट्रपति रामास्वामी वेंकटरमन ने तुरन्त कार्रवाई करते हुए AFSPA लगाने का निर्देश दे दिया। देश मे आजादी जे बाद से कश्मीर की समस्या काँग्रेस की देन है कश्मीरी पंडितों के साथ हो रहे अत्याचार के सच को छुपाने का पाप काँग्रेस करती रही तभी शेष भारत मे हिंदुओ के मन मे काँग्रेस के प्रति सहानुभूति नही है l आजादी के बाद सबसे अधिक समय तक केंद्र व जम्मू कश्मीर में काँग्रेस की सरकार रही और कांग्रेस ने इस समस्या को सुलझाने का क्या प्रयास किया ? काँग्रेस कश्मीरी पंडितों के साथ कभी खड़ी नजर नही आई l मोदी जी की पूर्ण बहुमत वाली सरकार ने धारा 370 हटाया तब भी कांग्रेस के सांसदों ने इस्तीफा दिया और कांग्रेस इसके विरोध में खड़ी हुई धारा 370 के कानून खत्म होते ही वहाँ लोकतंत्र नजर आने लगा l जहाँ जहाँ काँग्रेस की सरकार रही इतिहास के पन्ने पलटे खून से सना नजर आएगा लेकिन भाजपा शासन में कभी दंगे नही होने दिए l कश्मीरी पंडितों के साथ हुए अत्याचार व पलायन के सच को इस फिल्म के जरिये दिखाने का साहस किया गया जिसे सविनय देखने का आग्रह ओपी चौधरी ने किया है l भारत माता की जय व जय श्री राम के नारो से कांग्रेस के पेट मे दर्द उठना स्वाभाविक है l पूरे देश को काश्मीर का दर्द देने वाली कांग्रेस ने कोई सबक नही लिया और न ही अपना इतिहास सुधारने की कोशिश की l जनता का पूर्ण बहुमत मिलने का सदुपयोग मोदी सरकार धारा 370 व तीन तलाक कानून को हटाकर किया l भाजपा को किसी भी धर्म से आपत्ति नही औऱ हिन्दू संस्कृति से प्रेम अस्वीकार्य नही है लेकिन धर्म की आड़ में पलने वाले आतंकवाद व अन्याय को स्वीकार्य नही किया जा सकता
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