महासमुंद। (वायरलेस न्यूज़) छत्तीसगढ़ी ब्राह्मण समाज महासमुन्द के न्यू मंडी रोड में आश्रम के पास समाज के भवन में सांस्कृतिक भवन का निर्माण कराया जाएगा। आज सोमवार को समाज के प्रतिनिधिमंडल की मांग पर संसदीय सचिव व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने 10 लाख रुपए की राशि देने की घोषणा की। जिस पर समाज के लोगों ने संसदीय सचिव श्री चंद्राकर का आभार जताया है।
आज सोमवार को छत्तीसगढ़ी ब्राह्मण समाज महासमुन्द के प्रतिनिधिमंडल ने संसदीय सचिव निवास पहुंचकर संसदीय सचिव श्री चंद्राकर से मुलाकात की। इस दौरान पदाधिकारियों ने संसदीय सचिव श्री चंद्राकर को सामाजिक गतिविधियों की जानकारी देते हुए न्यू मंडी रोड में आश्रम के पास समाज का भवन है। जहां प्रथम तल में सांस्कृतिक भवन निर्माण की आवश्यकता है। भवन निर्माण होने से सांस्कृतिक आयोजनों में सहुलियत होगी। उन्होंने बताया कि इसके लिए प्रथम तल में सांस्कृतिक भवन निर्माण प्रस्तावित है। जिस पर संसदीय सचिव व विधायक श्री चंद्राकर ने सामाजिक पदाधिकारियों की मांग पर दस लाख रूपए की राशि देने की घोषणा की। भवन निर्माण के लिए राशि दिए जाने पर समाज के अध्यक्ष होरीलाल पांडे, रामगोपाल तिवारी, संतोष शर्मा, दीपक तिवारी, मनीष शर्मा, समीर तिवारी, अश्वनी तिवारी, रामेश्वर पांडे, नरेंद्र दुबे, अभिषेक शर्मा, राजेश मिश्रा, प्रकाश शर्मा, मंगेश टांकसाले, अनुराग तिवारी, सत्तू तिवारी, नीरज परोहा, धरनीधर दीवान, संदीप दीवान, अनुज पांडे, लालकिशोर शर्मा, अग्रज शर्मा, देवेश शर्मा, पंकज शुक्ला, आलोक शुक्ला, आशीष शुक्ला, नानू मिश्रा आदि ने संसदीय सचिव श्री चंद्राकर का आभार जताया है।
Author Profile
Latest entries
Uncategorized2026.04.27काले कपड़े पहन कर पहुंची महापौर ओर उनकी परिषद महिला सशक्तिकरण बिल के पक्ष में या विरोध में — *नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी*
बिलासपुर2026.04.27सही दवा-शुद्ध आहार” अभियान के तहत खाद्य ठेलों की सघन जांच, विक्रेताओं को दिए गए सुरक्षा निर्देश
Uncategorized2026.04.27कटघोरा एवं पाली क्षेत्र के उपभोक्ताओं को होगी निर्बाध बिजली की आपूर्ति ,132 केव्ही उपकेन्द्र छुरीखुर्द में 40 एमव्हीए का अतिरिक्त ट्रांसफार्मर उर्जीकृत
Uncategorized2026.04.27छत्तीसगढ़ का बरनवापारा अभयारण्य बना विलुप्ति के कगार पर पहुंचे काले हिरणों के पुनर्जीवन का मजबूत उदाहरण* *स्थानीय विलुप्ति से लेकर लगभग 200 की संख्या तक पहुँचे काले हिरण : ‘मन की बात’ में मिली राष्ट्रीय पहचान*


