🇮🇳Odia
अन्तर्राष्ट्रीय अपराध खेल जगत छत्तीसगढ़ धर्म-कला-संस्कृति बिलासपुर मध्य प्रदेश महाराष्ट्र राष्ट्रीय रेलवे साक्षात्कार हाईकोर्ट अन्य

आषाढ़ मासे प्रथम दिवसे….दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव कलेक्टर संजीव कुमार झा के निर्देशन तथा मार्गदर्शन में प्रारम्भ
देश की प्राचीनतम नाट्यशाला इसी छत्तीसगढ़ में

On: June 15, 2022 10:28 AM

आषाढ़ मासे प्रथम दिवसे….
देश की प्राचीनतम नाट्यशाला इसी छत्तीसगढ़ में

बिलासपुर (अमित मिश्रा संपादक वायरलेस न्यूज़ रामगढ़ से) छत्तीसगढ़ रामगढ़ के सीताबेंगरा की प्राचीन रंग शाला है जो गवाह है कालिदास और रंगमंच के आदि इतिहास की, सीताबेंगरा गुफा रायपुर से 280 क़ि. मी. और बिलासपुर से 170 क़ि. मी. दूर अम्बिकापुर से 35 क़ि. मी. पहले तुर्रापानी बस स्टॉप से 3 क़ि. मी. पैदल रामगढ़ की पहाड़ी है जिसका आकर दूर से ही सूंड उठाए हुए हाथी की शक्ल का दिखाई पड़ता हैं।इसी पहाड़ी को रामगढ़ कहते है। यह सरगुजा जिले के उदयपुर ब्लाक में है।

छत्तीसगढ़ शासन आज ही के दिन प्रत्येक वर्ष आषाढ़ मास का आज पहला दिन है जहाँ राष्ट्रीय स्तर के नृत्यांगनाओं गायन, और विचार गोष्ठि का आयोजन करती है मगर कोरोना महामारी के चलते आयोजन दो सालों से रद्द है जिसके कारण आज यहाँ पूरा सूनापन नजर आ रहा है जबकि देशभर के प्रमुख हस्तियों का जमावड़ों के साथ ग्रामीण मेलों हाट बाजार की झांकी देखने को मिल जाती है।

रामगढ़ शैलाश्रय के अंतर्गत सीताबेंगरा गुफा के अंदर लिपिबद्ध अभिलेख साक्ष्य के आधार पर इस प्राचीनतम नाट्यशाला का निर्माण लगभग दूसरी तीसरी सदी की होने की बात इतिहासकारों एवं पुरात्वविदों ने समवेत स्वर स्वीकार की है।
इस गुफा के महत्व इसलिए भी है क्योंकि महान कवि कालिदास की विख्यात रचना ‘मेघदूत’ की रचना भी इसी जगह पर की गई थी ।


मान्यताओं के अनुसार महाकवि कालिदास ने जब राजाभोज से नाराज होकर उज्जयिनी का परित्याग किया तब इसी रामगढ़ की पहाड़ी में उन्होनें शरण लिया था ,तभी उन्होंने ‘मेघदूतम’की रचना की थी।इसलिए ही इस जगह पर आज भी हर साल आज के ही दिन आषाढ़ के महीने की शुरूआत में बादलों की पूजा की जाती है । भारत में सम्भवतः यह अकेला स्थान है जहां की बादलों की पूजा करने की परम्परा है। यहीं पर एक नाट्यशाला जैसा आकर लिए हुए रंगमंच बना हुआ है ,जिसे देखकर आपको यह आभाष होगा कि वाकई में यह प्राचीन नाट्यशाला के तौर पर उपयोग किया जाता होगा।गुफा के प्रवेश स्थल की फर्श पर 2 छेद भी है जोंक उपयोग सम्भवतः पर्दे में लगाइजने वाली लकड़ी के डंडों को फंसाने के लिए किया जाता रहा होगा। यहाँ की पृरी ब्यवस्था ही कलात्मक है। रंगमंच के सामने 50-60 दर्शकों के बैठने की अर्धचन्द्राकार में आसन बने हुए है। जहां बैठकर आराम से नाट्य मंचन को देखा जा सकता है।
आप परिकल्पना कर सकते है कि मनुष्य कोलाहल से दूर एकांत रात्रि में नृत्य संगीत की दुनिया में स्वीकार स्वर्गिक आनन्द उठा सकता है। पूरा परिदृश्य रोमन रंगभूमि की याद दिलाता है।
गुफा के बाहर दो फिट चौड़ा गढ्डा भी है , जो सामने से पृरी गुफा को घेरता है, यह भी मान्यता है कि की यह पर एक रेखा है जो कहा जाता है कि यही वो लक्ष्मण रेखा है। इसके बाहर एक पांव का निशान भी है।
इस गुफा के बाहर एक लम्बी सुरंग भी है जिसे हथ फोड़ सुरंग के नाम से लोग पुकारते है। इसी पहाड़ के ऊपर में एक मंदिर भी है जहां राम लक्ष्मण माता सीता और हनुमान जी की 12 वी सदी की प्रतिमा भी है। नवरात्र में यहाँ मेला भी लगता है। यह स्थान भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित किया गया है।
कलेक्टर संजीव कुमार झा के निर्देशन तथा मार्गदर्शन में उदयपुर विकासखण्ड में स्थित भारत की प्राचीनतम नाटयशाला के रूप में विख्यात रामगढ़ में दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव का शुभारंभ हो चुका है। कलेक्टर श्री झा ने महोत्सव स्थल में लगे विभिन्न स्टालों का निरीक्षण किया। उन्होंने सभी अधिकारियों- कर्मचारियों का उत्साहवर्धन करते हुए महोत्सव के सफल संचालन के लिए आवश्यक निर्देश दिए।

उल्लेखनीय है कि रामगढ़ में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी आसाढ़ के प्रथम दिवस पर रामगढ़ महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव के प्रथम दिवस 4 जून को राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी सह कवि सम्मेलन किया का आयोजन किया जाएगा एवं 5 जुन को सांस्कृतिक कार्यक्रम में स्थानीय एवं आमंत्रित लोक कलाकार अपनी रंगारंग प्रस्तुति देंगे। आमंत्रित कलाकारों में बबिता विश्वास, स्तुति जायसवाल, संजय सुरीला, ज्योतिश्री वैष्णव सहित भरत नाटत्यम, कला विकास केंद्र एवं पारंपरिक लोक गीत-संगीत शामिल हैं।

स्टालों के निरीक्षण के समय जिला सीईओ विनय कुमार लंगेह, निगम आयुक्त विजय दयाराम के, डीएफओ श्री पंकज कमल, अपर कलेक्टर अमृत लाल ध्रुव तथा अन्य अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे।

Author Profile

Amit Mishra
Amit Mishra
अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
Latest entries

Join WhatsApp

Join Now

Join Facebook

Join Now

Leave a Comment