बिलासपुर (वायरलेस न्यूज) आए दिन होने वाली मारपीट, गुंडागर्दी और प्रतिबंधित नशीली दवाओं की बिक्री के लिए “भूगोल” बार के संचालक और बॉउंसरों द्वारा मारपीट करने की एक और घटना सामने आई है। ट्रेवल्स का काम करने वाले विशाल मसीह ने गुरुवार देर रात सिविल लाईन थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई है कि रात तकरीबन साढ़े दस बजे वो अपने दो दोस्तों राहुल सोनवानी और दीपक सारथी के साथ “भूगोल” बार गया था। बार के एंट्री गेट पर एंट्री चार्ज को लेकर कुछ विवाद हुआ और इस ज़रा सी बात पर बार के बाउंसरों ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि इस विवाद में “भूगोल” बार का संचालक अंकित अग्रवाल और अनिरुद्ध अग्रवाल भी शामिल हो गए और उसे गंदी गंदी गालियां देते हुए मारपीट करने लगे। पीड़ित ने बताया कि अंकित अग्रवाल, अनिरुद्ध अग्रवाल और बॉउंसरों ने उसे बेसबॉल बैट, हाँकी स्टिक और लात घूँसों से बुरी तरह पीटा है। FIR में दर्ज जानकारी के अनुसार पीड़ित को सिर, हाथ, जांघ व पीठ में चोट आई है। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने अंकित अग्रवाल, अनिरुद्ध अग्रवाल और बॉउंसर के खिलाफ़ भारतीय दण्ड विधान की धारा 294, 323, 506, 34 के तहत मामूली ज़मानती धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।
संचालकों के खिलाफ़ कोई कारवाई नहीं हुई उल्टे पुलिस अधिकारियों का ही तबादला कर दिया गया।
इसी भूगोल बार का मैनेजर प्रतिबंधित नशीली दवा बेचने ग्राहक खोजते रंगेहाथ पकड़ा जा चुका है। उस मैनेजर का एक वीडियो भी सामने आया था जिसमें वो ये कहता दिखा कि बार के वॉशरूम में ड्रग्स ली जाती है और संचालक अंकित अग्रवाल के कहने पर ही प्रतिबंधित नशीली दवाएं मंगाई जाती हैं। बावजूद इसे बार संचालक पर कोई कारवाई नहीं हुई।
भूगोल बार में समय बिताने पहुँच रहे लोगों के साथ गुंडागर्दी, बदसलूकि और मारपीट की खबरें तो आए दिन सुनने में आती रहती हैं। आपको बता दें कि भूगोल बार का लाइसेंस चौकसे ग्रुप ऑफ़ कॉलेज के आशीष जायसवाल के नाम पर जारी है।
कुछ साल पहले इसी जगह पर गौरांग बोबड़े हत्याकांड भी हो चुका है। शायद ज़िला प्रशासन बोबड़े हत्याकांड जैसी किसी और अप्रीय घटना का इंतज़ार कर रहा है।
क्या शराब पिलाने के साथ पीटने का भी लाइसेंस दिया गया है?
उक्त घटनाओं से ऐसा प्रतीत होता है कि बार के बाउंसरों और संचालकों को दारू पिलाने के साथ-साथ किसी को भी भरभर पीट देने का भी लाइसेंस दिया गया है शायद। फिर पिटने वाला पुलिस का अधिकारी ही क्यूँ हो। बार संचालक भी प्रशासन द्वारा मिली इस छूट का भरपूर इस्तेमाल करते हुए खूब मुक्का-लात चलाते हैं।
जाँच का दिखावा या छठी इंद्री का कमाल
कोई बार निर्धारित समय के बाद शराब परोस रहा है या नहीं इस बात की जांच के लिए जब जब पुलिस “औचक” निरीक्षण पर पहुँचती है तब तब न जाने कैसे बार संचालकों को पहले इसकी जानकारी मिल जाती है और रातभर चलने वाले बार “जांच” वाले दिन समय से बन्द हो जाते हैं। मालूम नहीं इसे चमत्कार कहें या बार संचालक की छठी ई इंद्री का कमाल।
कारण कुछ भी हो एक बात तो अब बिल्कुल साफ़ ज़ाहिर हो गई है कि ज़िले के रसूखदारों, अवैध कारोबार करने वालों, चोरों, चकूबाज़ों आदि में पुलिस का भय पूरी तरह खत्म हो चुका है। अपराध का ग्राफ़ आसमान पर है और प्रशासन की साख गड्ढे में।
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