रायपुर/ (वायरलेस न्यूज) छत्तीसगढ़ से निकलकर ओडिशा जाने वाली सबसे बड़ी नदी महानदी के पानी को लेकर छत्तीसगढ़ और ओड़िशा के दावों की हकीकत जानने के लिए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एएन खानविलकर की अध्यक्षता में तीन सदस्यों की टीम मंगलवार, 18 अप्रैल को रायपुर आएगी और जल बंटवारे की हकीकत का आंकलन करेगी। मीडिया महानदी के छह बैराज में से एक, रायपुर से 54 किमी समोदा पहुंची। बैराज में एक तरफ थोड़ा पानी भरा है और दूसरी तरफ नदी पूरी तरह सूखी।
गांव वालों ने बताया कि इस बैराज से उन्हें सिर्फ यही लाभ है कि गर्मी में भूजलस्तर गिरता नहीं। यह पानी औद्योगिक उपयोग का है, इसलिए सीधे गांवों को नहीं दिया जा रहा है।एक बैराज से 40 गांवों को लाभअकेले समोदा बैराज रायपुर के हजारों एकड़ खेतों की फसलों को सींचती है। साथ ही महासमुंद में अपने तट से 10-15 किलोमीटर के दायरे में आने वाले करीब 30-40 गांवों में भू-जल स्तर को उच्च स्तर पर बनाए रखती है।
हीराकुड बांध से बेतहाशा पानी ले रहा है ओडिशा : छत्तीसगढ़ सरकार ट्रिब्यूनल के सामने तर्क रख चुकी है कि हीराकुड बांध से ओडिशा सरकार औद्योगिक और सिंचाई प्रयोजन के लिए बहुत अधिक पानी ले रही है।
बांध में पानी इसलिए कम होता है। छत्तीसगढ़ में बने बैराज छोटे तथा बहुत कम क्षमता के हैं। इनसे नदी सूखने का तर्क गलत है, छत्तीसगढ़ इसके लिए जिम्मेदार नहीं।ओडिशा की आपत्ति सिर्फ बैराज पर है। उसने सेंट्रल वॉटर कमीशन में समोदा से कलमा तक बने 6 बैराजों पर आपत्ति करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ बारिश के बाद के पानी को इन बैराजों में रोक लेता है। इसलिए गर्मी के दिनों में ओडिशा की नदियां सूख जाती हैं। ओडिशा का कहना है कि ये बैराज बिना परमिशन के बनाए गए हैं।
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