*खाने में परोसा गया मुनगा बड़ी, कोचई-मखना, चरपनिया, चेच एवं मुनगा भाजी*
*पत्रवानी परिवार ने पुष्प-गुच्छ और श्रीफल भेंट-कर मुख्यमंत्री का किया आत्मीय स्वागत*
रायपुर, (वायरलेस न्यूज 11 मई 2023) मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल अपने प्रदेशव्यापी भेंट-मुलाकात अभियान के तहत आज मस्तूरी विधानसभा के ग्राम सीपत पहुँचे। यहां उन्होंने सेवानिवृत्त प्रधान पाठक गुहाराम पत्रवानी के आतिथ्य में उनके घर भोजन के लिए पहुंचे। मुख्यमंत्री का पत्रवानी परिवार ने घर के मुख्य द्वार पर तिलक-आरती, पुष्प-गुच्छ तथा श्री फल भेंटकर उनका आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने पत्रवानी परिवार के सदस्यों द्वारा सादगी के साथ परोसे गए स्वादिष्ट छत्तीसगढ़ी भोजन का स्वाद लिया। पत्रवानी परिवार ने पूरी आत्मीयता के साथ मुख्यमंत्री को भोजन में चावल, दाल, रोटी के साथ मुनगा बड़ी, मुनगा, कोचई-मखना, चरपनिया, चेच एवं मुनगा भाजी सब्जी एवं आमा की चटनी भी परोसा।
घर के मुखिया गुहाराम और उनकी पत्नी श्रीमती अनुसुइया ने मुख्यमंत्री को अपने घर पर भोजन करता पाकर प्रसन्नता जताई। मुख्यमंत्री ने स्वादिष्ट छत्तीसगढ़ी भोजन के लिए श्री सूर्यवंशी एवं उनके परिजनों को उपहार भेंट-कर धन्यवाद दिया। मुख्यमंत्री को श्री सूर्यवंशी ने बताया कि उनके पास 2 एकड़ कृषि भूमि है और परिवार में 9 सदस्य हैं। 4 बेटे हैं जिसमें बड़ा बेटा घर की खेती, किसानी का कार्य एवं बाकी 3 बेटे पढ़ाई कर रहे हैं। प्रभारी मंत्री श्री जयसिंह अग्रवाल, संसदीय सचिव एवं विधायक तखतपुर श्रीमती रश्मि आशीष सिंह, मछुआ कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री राजेंद्र धीवर,श्री विजय केसरवानी उपस्थित रहे।
Author Profile
Latest entries
Uncategorized2026.04.27काले कपड़े पहन कर पहुंची महापौर ओर उनकी परिषद महिला सशक्तिकरण बिल के पक्ष में या विरोध में — *नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी*
बिलासपुर2026.04.27सही दवा-शुद्ध आहार” अभियान के तहत खाद्य ठेलों की सघन जांच, विक्रेताओं को दिए गए सुरक्षा निर्देश
Uncategorized2026.04.27कटघोरा एवं पाली क्षेत्र के उपभोक्ताओं को होगी निर्बाध बिजली की आपूर्ति ,132 केव्ही उपकेन्द्र छुरीखुर्द में 40 एमव्हीए का अतिरिक्त ट्रांसफार्मर उर्जीकृत
Uncategorized2026.04.27छत्तीसगढ़ का बरनवापारा अभयारण्य बना विलुप्ति के कगार पर पहुंचे काले हिरणों के पुनर्जीवन का मजबूत उदाहरण* *स्थानीय विलुप्ति से लेकर लगभग 200 की संख्या तक पहुँचे काले हिरण : ‘मन की बात’ में मिली राष्ट्रीय पहचान*


