( सतना से वरिष्ठ पत्रकार निरंजन शर्मा)
रीवा के दिवंगत महाराजा मार्तंड सिंह के पिता महाराज गुलाब सिंह की 47 वर्ष की अवस्था में मृत्यु हुई थी अथवा उनकी हत्या की गई थी इस सवाल का जवाब आज तक नहीं मिला है !
इस सवाल से भी बड़ा सवाल यह है कि महाराजा गुलाब सिंह के अपने किशोर कम युवा पुत्र महाराज मार्तण्ड सिंह के बीच संबंध वाकई बिगड़ गए थे या कोई खेल खेल रहा था ! संबंध तो यहां तक बिगड़ गए थे कि मार्तण्ड सिंह विदेश पढ़ने जाना चाहते थे और अंग्रेज सरकार ने उनको विदेश जाने की इजाजत के साथ इंतजाम भी कर दिया मगर उनके पिता महाराज गुलाब सिंह ने 10 दिसंबर सन 1945 को एक कड़ा पत्र लिखकर लड़के को विदेश भेजे जाने पर कड़ी आपत्ति प्रकट की ! इसका कोई जवाब नहीं आया तो महाराज ने रीवा में हड़ताल कराके आंदोलन खड़ा कर दिया ! “रीवा रिमहों का” नारे के साथ चली इस हड़ताल को अंग्रेजों ने कड़ी निगाह से देखा और महाराज गुलाब सिंह को 30 जनवरी 1946 को देश निकाला दे दिया ! आदेश यह था कि आप मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और राजपूताना में नहीं रह सकते ! ज्यादातर इलाहाबाद (प्रयागराज) में रहने वाले महाराज को शहर छोड़ना पड़ा और वे बम्बई रवाना हो गए !
महाराज उधर बम्बई गए इधर हफ्ते भर के भीतर 6 फरवरी सन 1946 को महाराजा मार्तंड सिंह का रीवा में राज्याभिषेक हो गया ! 22 अगस्त सन 47 और 8 मार्च 48 को सरकारी आदेश की अवहेलना कर महाराज गुलाब सिंह ने रीवा राज्य में घुसने की कोशिश की पर दोनों बार 2 दिनों के भीतर सरकारी बलों ने उन्हें बाहर कर दिया !
दूसरी बार उन्हें दिल्ली में रखा गया ! कहते हैं कि जवान बेटे मार्तण्ड सिंह और अधेड़ पिता के बीच यहीं पर उग्र बहस भी हुई ! इसके बाद दोनों के बीच संबंध कटु हो गए ! दिल्ली में महाराज गुलाब सिंह पर पहरेदारी रखी जाने लगी, इसके बावजूद 12 अप्रैल सन 48 को महाराज फिर रीवा पहुँच गए ! पांच दिन बाद फिर बाहर कर देहरादून जेल में रखे गए ! बाद में स्वास्थ्य खराब होने पर उन्हें देहरादून से हट कर बम्बई जाने की इजाजत दे दी गई !
अंततः 13 अप्रैल सन 1950 को प्रातःकाल अत्यंत संदिग्ध अवस्था में बम्बई के रीवा हाउस में गुलाब सिंह जी की मृत्यु हो गई ! शिवानंद जी ने अपनी किताब में लिखा है- “कहा जाता था कि बड़ी महारानी ने षड्यंत्र किया था ! मृत्यु के समय उनकी उम्र 47 वर्ष थी !”
वास्तव में इतिहास पर नजर डाली जाए तो जब देश स्वतंत्रता के लिए करवट ले रहा था तब रीवा राज्य का राजवंश अंग्रेजों और काले अंग्रेजों की दुरभिसंधि के साथ कुछ रहस्यमय कथानकों से गुजर रहा था !
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