अंबिकापुर में 15 हिरणों की मौत: सिंघवी ने पूछा और कितने अवैध जू चल रहे हैं छत्तीसगढ़ में?
रायपुर 22 मार्च/ दो दिन पहले अंबिकापुर के संजय वन वाटिका में कुत्तों के बाड़े में घुसने और काटने से हुई 15 हिरणों की मौत जिनमे संरक्षित प्रजाति के 2 चोसिंगा, 7 चीतल और 6 बार्किंग डिअर शामिल हैं की मौत को दुखद बताते हुए रायपुर निवासी नितिन सिंघवी ने वन विभाग के उच्च अधिकारियों से पूछा है कि उनके संरक्षण में प्रदेश में और कितने ऐसे जू चल रहे हैं जिनको सेंट्रल जू अथॉरिटी से मान्यता प्राप्त नहीं है?
रेस्क्यू सेंटर के नाम से कर रहे हैं गुमराह – सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर कार्यवाही क्यों?
सिंघवी ने बताया कि संजय वाटिका को अधिकारी जू नहीं बता कर रेस्क्यू सेंटर बता रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि आसपास के जंगलों में जब जानवर बीमार या घायल हो जाता तो उसे इलाज के लिए संजय वाटिका लाया जाता है और ठीक होने पर छोड़ दिया जाता था। जबकि वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत रेस्क्यू सेंटर के लिए भी सेंट्रल जू अथॉरिटी की मान्यता अनिवार्य है। सिंघवी ने प्रश्न उठाया कि अगर हिरणों को ठीक होने के बाद छोड़ दिया जाता तो उनकी संख्या 32 कैसे हो गई थी? वहां पर दो नीलगाय क्यों रखी गई हैं? जबकि यह भी संरक्षित वन्यजीव है। सिंघवी ने आरोप लगाया रेस्क्यू सेंटर में वन्यजीवों को प्रदर्शन के लिए नहीं रखा जा सकता। जब कि संजय वाटिका में वन विभाग टिकट की राशि वसूल कर अवैध रूप से जू का संचालन कर रहा है, जिसकी जानकारी मुख्यालय के वाइल्डलाइफ विंग के उच्च अधिकारियों को है। ऐसे में छोटे अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्यवाही करने की बजाय मुख्यालय स्थित उच्च पदस्थ अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए जिनके संरक्षण में प्रदेश में बिना मान्यता के अवैध जू का संचालन हो रहा है।
और कितने अवैध जू?
सिंघवी ने बताया कि वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम में दी गई जू की परिभाषा में रेस्क्यू सेंटर और ब्रीडिंग सेंटर भी आते हैं। सरगुजा के रमकोला स्थित एलीफेंट रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर और बारनवापारा अभ्यारण स्थित वन भैंसा ब्रीडिंग सेंटर को सेंट्रल जू अथॉरिटी से सिर्फ सैद्धांतिक अनुमति मिली हुई है दोनों मान्यता प्राप्त नहीं है। इसी प्रकार उदंती सीता नदी टाइगर रिजर्व में भी वन भैंसा ब्रीडिंग सेंटर बिना किसी मान्यता के चलाया जा रहा है। राजनांदगांव के मनगट्टा और रायपुर के मोहरेगां में इको टूरिज्म के नाम से कुछ हेक्टर के छोटे से इलाके में फेनसिंग करके के सेकडों हिरणों और अन्य वन्यजीवों को रखा गया है क्या वो वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम का खुला उल्लंघन नहीं है? और उनके लिए भी सेंट्रल जू अथॉरिटी से मान्यता अनिवार्य नहीं है?
सिंघवी ने पूछा कि रायपुर के नंदनवन में तीन तेंदुआ और एक लकड़बग्गा को आठ साल तक अँधेरे में रखा, क्या उसके लिए सेन्ट्रल जू अथॉरिटी की अनुमती ली गई थी? वर्षो तक नंदनवन में बिना सेंटल जू अथॉरिटी की अनुमति के हिरणों को क्यों रखा? कुछ साल पहले धमतरी जिले के नगरी में निजी व्यक्ति द्वारा जू का संचालन करने पर उसके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही की गई थी तो इन अधिकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही क्यों नहीं होनी चाहिए? सिंघवी ने मांग की कि इन बंधक सभी वन्यजीवों को तत्काल अभ्यारणों छोड़ा जाए और वन विभाग के उच्च अधिकारियों से पूछा कि खुलासा करें कि प्रदेश में कहां-कहां अवैध जू का संचालन वन विभाग द्वारा किया जा रहा है।
नितिन सिंघवी
9826126200
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