पहले परमात्मा का शुकराना करो फिर दुकान जाओ, भाई साहब मनोहर सिंग
(सत्संग में आने का लाभ क्या है
मरने के बाद पता चल जाता है हर इंसान को , पर जिन्हें जीते जी पता चले वही इंसान सत्संग का असली लाभ प्राप्त करता है)
बिलासपुर :- ( वायरलेस न्यूज) धन गुरु नानक दरबार डेरा संत बाबा थहिरिया सिंह साहब जी सिंधी कॉलोनी बिलासपुर में, डाक्टर सोनम अक्षय को पुत्र रत्न प्राप्ति के खुशी में दरबार साहिब के सेवादार डॉ हेमंत कलवानी एवं कलवानी फैमिली के द्वारा गुरु का शुक्रराना करते हुए श्री सुखमणि साहिब जी का पाठ कराया गया रात्रि 8:00 बजे से 9:00 बजे तक श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पाठ वह भोग, रात्रि 9:30 बजे शब्द कीर्तन कथा अरदास के उपरांत प्रभु का गुरु का लंगर प्रसाद बरताया गया, कार्यक्रम की शुरुआत गुरु के नाम के जप से की गई, भाई साहब जसविंदर सिंग के द्वारा शब्द कीर्तन करके साध संगत को अपनी अमृतवाणी से निहाल किया,
इस अवसर पर कल्याण महाराष्ट्र से आए भाई साहब मनोहर सिंग के द्वारा अपनी अमृतवाणी में गुरु का नाम का जाप कराया और सत्संग में आने का फायदा क्या है यह एक कथा सुना कर साध संगत को समझाया की सत्संग में आने का महत्व बहुत बड़ा है पर हर इंसान को समझ नहीं पता है जो समझ जाता है वही उसका लाभ उसे संपूर्ण प्राप्त होता है पर बाकी इंसान को ऊपर जाने के बाद पता चलता है लेकिन अगर आपको यही पता चल जाएगा तो आप जीवित रहते हुए इसका लाभ प्राप्त कर सकते हैं उन्होंने एक कथा सुनाई की एक व्यक्ति प्रतिदिन अपने गांव से शहर जाता है बैलगाड़ी में माल भरकर और बेचता है और वहां से दूसरा सामान भर के लिए आता है क्योंकि उसका बड़ा बिजनेस था बड़ा व्यापारी था एक दिन गांव से लेकर समान शहर गया और वहाँ से दूसरा सामान भर के वापस ला रहा था तो रात्रि हो गई और बैलगाड़ी भी टूट गई अब इतना सामान महंगा सड़क पर रख नहीं सकता था तो उठाकर हाथों में कंधों में सिर पर ढोकर चलने लगा कुछ दूर आगे जाने के बाद संत महात्माओं की मंडली वहां से गुजर रही थी जब देखा कि एक व्यक्ति इतना सामान ढोकर ला रहा है और थक गया है हाफ भी रहा है तो उससे पूछा तो उस व्यापारी ने पूरी अपनी व्यवस्था बताई संत ने अपने सेवादारों से कहकर उसका सामान उठा लिया और कहा चलो हम आपके गांव चलते हैं आपके घर छुड़वा देते हैं तो वह व्यापारी ने कहा मैं आपको कितना पैसा दे सकता हूं या क्या आपको दू इसके बदले मैं तो संत ने कहा हमें धन दौलत नहीं चाहिए अगर देना चाहते हो तो हमें प्रभु का कोई सत्संग बताओ भजन कीर्तन सुनाओ तो उस व्यापारी ने कहा मैं तो कभी सत्संग में गया नहीं किसी संतों से मिला नहीं और कभी भजन गाया नहीं तो मैं कैसे सुनाऊं संत ने कहा ठीक है अब सुन लो हमारा सत्संग हम तुम्हें सुनाते हैं सत्संग सुनते सुनते घर तक पहुंच गए सब सामान रखा अपनी घरवाली को कहा , सुनती हो शांति, संत मंडली आई है मेरी बहुत मदद की है उनके लिए भोजन की व्यवस्था करो संतो को भोजन करवाया फिर उस व्यापारी के मन में एक बात आई उसने एक संत से पूछा आप इतने बड़े प्रमुख ज्ञानी हो मुझे बताएं कि मेरा भविष्य आगे का क्या होगा संत ने आंखें बंद की और अपने दिव्या दृष्टि से देखा कि वह व्यापारी 2 महीने बाद मर जाएगा तो उसने कहा की जो मैंने देखा है क्या वह तुम सुन सकते हो उस व्यापारी ने कहा हां चिंता नहीं है मुझे आप सब कुछ बता सकते हैं तो संत ने कहा 2 महीने बाद तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी और यह सब तुम्हारा धन दौलत जमीन सब कुछ यही पर छूट जाएंगे इसके लिए तुम अभी से ही भजन कीर्तन करना शुरू कर दो प्रभु का नाम जपना शुरू कर दो वह तुम्हारे संग जाएगा इतना बोलकर संत मंडली आगे गांव की ओर प्रस्थान किया वह व्यापारी पहले तो थोड़ा डर गया लेकिन फिर सोचा संत तो बोलते रहते हैं उसने ध्यान नहीं दिया इतने में दो महा बीत गए और संतों की वाणी कभी असत्य नहीं होती है उस व्यापारी का देहांत हो गया और यमदूत उन्हें लेकर ऊपर पहुंचे धर्मराज जब अपना खाता खोला धर्म पुस्तिका ग्रंथ को देखा कि इसने तो कभी कुछ किया नहीं है सारे पनने इसके देखा , कि बस पैसा कमाना और प्रॉपर्टी बनाने में लगा रहा पर जैसे ही इसका आखरी पन्ना पलटा तो इसमें उसमे देखा कि आधा घंटा⏳ इन्होंने संतों का सत्संग सुना है और संतों के संग में रहा है तो उस व्यापारी से कहा तुमने आधा घंटा जो तुमने सत्संग सुना है और संतों के संग रहा है उसके लिए तुम्हें आधा घंटा स्वर्ग लोक जाना चाहते हो या संत लोक जाना चाहते हो जहाँ पर सत्संग हो रहा है संतों से संग में मिलना चाहते हो तो वहाँ भी जा सकते हो, उसके बाद फिर तुम्हें नरक में जाना है उसने कहा मुझे स्वर्ग नहीं जाना है व्यापारी ने कहा मुझे संतो के पास में ले चलो जहां सत्संग हो रहा है धर्मराज ने कहा यमदूतों उसे लेकर जाओ और कहा कि आधे घंटे बाद इसे उठाकर वापस लाना अगर लेट करेगा तो उसे 10 कोड़े पड़ेंगे, व्यापारी पहुंचा जब देखा तो दिव्य अद्भुत स्वर्ग से भी सुंदर नजारा था संत लोक का संत जन अंदर में अपने नेत्र बंद करके नाम का सिमरन का जाप करते प्रभु को याद कर रहे थे और एकदम सब देखने के बाद ऐसा नजारा कभी उसने देखा नहीं था तो वह भी बैठ गया और आधा घंटा जब पूरा हुआ उठने लगा तो संत ने अपनी आंखें खोली और कहा कहां जा रहे हो तो उस व्यापारी ने संतों के चरणों में गिरकर अपने किये कि क्षमा मांगी और कहा कि ऐसी बात है अब मेरा आधा घंटा समय मिला है वह पूरा हुआ बाहर खड़े हैं यमदूत मुझे जाना है अगर नहीं जाऊंगा तो मुझे 10 कोड़े मारेंगे संत ने कहा चिंता मत करो यही चुपचाप बैठे रहो एक घंटा हो गया बाहर नहीं निकला आखिर में यमदूत पहुंचे धर्मराज के पास और सारी बातें बताइए कि वह व्यापारी आना चाहता था लेकिन उसे संतों ने रोक दिया अपने पास ही बैठा दिया है तो धर्मराज ने कहा जाकर पकड़ के लाओ तो यमदूतों ने कहा कि हमारा अंदर जाना माना है हम प्रवेश नहीं कर सकते अंत में वह व्यापारी वही अंदर में रह गया संतों के संग में तो आधा घंटा सत्संग में जाकर और सुना ग्रहण किया उसका लाभ उसे कितना मिला कि उसके मरने के बाद पूरा जीवन और संतों के संग में गुजारने लगा,
और जो नरक में सजा मिलने वाली थी उससे भी बच गया संत भी वही सच्चे होते हैं जो दिल से सत्संग करते हैं और लोगों को दिल तक तार जोड़ते हैं जब दिल से दिल का तार जुड़ जाए तो समझ लेना सत्संग आपके दिल में उतर गया है ओर सच्चा संत आपको मिला है और बाकी तो सत्संग लोग सुनते हैं एक 👂कान से दूसरे 👂कान से निकाल देते हैं तो जब भी सत्संग में जाए तो दिल को सत्संग में लगाए और दिमाग को घर में छोड़कर आए आखिर में सुखमणि पाठ साहब को भोग लगाया गया अरदास की गई गुरु का प्रसाद वितरण किया गया एवं अटूट लंगर बरताया गया इस अवसर पर कलवानी फैमिली के द्वारा भाई साहब मूलचंद नारवानी जी का भाई साहब मनोहर जी का भाई साहब जसविंदर जी का हमर संगवारी के संपादक विजय दुसेजा का छाल पहनाकर सम्मान किया भाई साहब बबलू जी के द्वारा भी डॉक्टर हेमंत कलवानी एवं उनकी फैमिली का पाखंड पहनाकर आशीर्वाद दिया
इस अवसर में बड़ी संख्या में साध संगत उपस्थित थीं जिनमें प्रमुख हैं
राजकुमार कलवानी,हेमंत कलवानी,सोनिया कलवानी,गुणवंती देवी कलवानी,अक्षय सिंह,डा.सोनम सिंह,दीपक लालवानी,नीलम लालवानी,डा.रमेश कलवानी,सपना कलवानी,खीयलदास कलवानी,ज्योति कलवानी,प्रेम कलवानी,मीना कलवानी,दीपा कृपलानी, संजय कृपलानी,दिलीप कलवानी,लता कलवानी,सुरेश कलवानी,गोपाल कलवानी,पूजा कलवानी,पलक कलवानी,शीला देवी जोतवानी,सुशील जोतवानी,खुशी जोतवानी,नानक कलवानी,कविता कलवानी,रवि कलवानी,हीर कलवानी,रेशमा नानकानी,मनोज कलवानी,भूमि कलवानी,जीया कलवानी,महेश दुहलानी,विजय दुसेजा,नानक पंजवानी,चित्रा पंजवानी,निशा दुहलानी, भावना दुहलानी,आकाश दुहलानी,शत्रुघ्न जैसवानी,सुरेश वाधवानी,प्रकाश जज्ञासी,बबलू नारवानी,नरेश मेहरचंदानी,गंगाराम सुखीराम सहित धन गुरुनानक दरबार के सेवादारी एवं कलवानी परिवार के इष्ट मित्रों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाकर,सत्संग का लाभ लेकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई अंत में डा.हेमंत कलवानी ने सभी का आभार प्रगट किया
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