*निस्तार पत्रक में शौच के लिए आरक्षित शासकीय भुमि का कुटरचित पट्टा माननीय व्यवहार न्यायालय ने किया निरस्त।*
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*कलेक्टर जनदर्शन में दर्ज शिकायत में बिना किसी जांच के मकान निर्माण पर जारी स्थगन आदेश को नायब तहसीलदार पाली ने किया निरस्त।*
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पाली ( वायरलेस न्यूज) शासन द्वारा प्रत्येक गांव में ग्रामीणों के विभिन्न निस्तार प्रयोजनों के लिए सार्वजनिक हित में शासकीय भूमि का प्रबंध किया गया है। जो ग्राम पंचायत क्षेत्र के निस्तार पत्रक में दर्ज होता है।
विकास खंड पाली अधिनस्थ ग्राम पंचायत पोड़ी पाली ब्लाक के दुसरे बड़े ग्राम पंचायत की श्रेणी में आता है। जहां शासन द्वारा निर्मित निस्तार पत्रक में शासकीय घास मद की भुमि खसरा नंबर 1236 रकबा 0.65 एकड़ भूमि शौच के लिए आरक्षित है। जिसमें से 0.10 डिसमिल जमीन को रामनारायण कश्यप पिता कुंजी लाल कश्यप के द्वारा तत्कालीन राजस्व अधिकारियों से मिलीभगत कर राजस्व अभिलेख में अपने नाम पर दर्ज करा लिया गया है। मामले का खुलासा तब हुआ जब उक्त व्यक्ति द्वारा मकान निर्माण शुरू किया गया। राजस्व अभिलेख एवं शासन द्वारा जारी निस्तार पत्रक का मिलान करने पर स्पष्ट हुआ कि मुल खसरा नंबर 1236 रकबा 0.65 हेक्टेयर भूमि निस्तार पत्रक में शौच के लिए आरक्षित भुमि है तथा उक्त भूमि का कोई भी हिस्सा कलेक्टर द्वारा किसी भी व्यक्ति विशेष को हस्तांतरित नही किया गया है और ना ही निस्तार पत्रक से पृथक किया गया है।
यहां उल्लेखनीय है कि किसी भी ग्राम पंचायत क्षेत्र के लिए निर्मित एवं जारी निस्तार पत्रक में निस्तार प्रयोजनों के लिए दर्ज शासकीय भुमि का प्रबंधन का सर्वाधिकार जिला कलेक्टर एवं अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को होता है और जब भी उक्त भूमि को किसी भी प्रयोजन हेतु परिवर्तन अथवा आबंटन किया जाता है तो उसे कलेक्टर द्वारा निस्तार पत्रक से पृथक भी किया जाता है।
जो छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 233, 234, 235, 236, एवं 237 में उल्लेखित है।
शासन द्वारा 1980 से शासकीय घास मद की भुमि का किसी भी व्यक्ति को पट्टा दिया जाना पुर्णत प्रतिबंधित है।
निस्तार पत्रक में शौच हेतु आरक्षित उक्त भूमि पर जब 2019 में रामनारायण कश्यप द्वारा मकान निर्माण प्रारंभ किया गया तब मामले को लेकर क्षेत्र के पुर्व जनपद सदस्य मिर्जा कय्यूम बेग,रघुनंदन कश्यप,विशेषर दास तथा जग्गू नेताम एवं अन्य ग्रामीणों द्वारा तहसीलदार पाली को मकान निर्माण पर रोक लगाने के संबंध में ज्ञापन सौंपा गया जिस पर स्थगन आदेश जारी तो जरूर किया गया किन्तु लगभग तीन वर्ष बाद तत्कालीन तहसीलदार द्वारा 2022 में स्थगन हटा भी दिया गया। तहसीलदार द्वारा स्थगन हटाने के तत्काल बाद पुर्व जनपद सदस्य मिर्जा कय्यूम बेग एवं अन्य ग्रामीणों द्वारा माननीय न्यायालय श्रीमान व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी पाली जिला कोरबा छग में परिवाद दायर किया गया ।
जिसमें रामनारायण कश्यप द्वारा जो जवाब दावा प्रस्तुत किया गया वह चौंकाने वाला है उन्होंने प्रकरण में दोहरा लिखित जवाब प्रस्तुत किया है जिसमें पहले जवाब में अतिरिक्त तहसीलदार पाली में 1987 में चले राजस्व प्रकरण के तहत उन्हें उक्त भूमि का भुमि स्वामी हक प्रदान किए जाने तथा दुसरे जवाब में उक्त भूमि पर लंबे समय से कब्जे में होने के कारण 1984 में पट्टा प्रदान किये जाने का उल्लेख किया है।
जो प्रथम दृष्टया ही संदेह उत्पन्न करता है। 40 साल बाद कब्जा करना अनेकों सवाल पैदा करते हैं। निस्तार पत्रक में ग्रामीणों के सार्वजनिक हित में आरक्षित भुमि को तत्कालीन अतिरिक्त तहसीलदार पाली द्वारा अपने अधिकार के विपरित भुमि स्वामी हक में मंजूरी दिया जाना नियम कानून का किये गये उल्लंघन को स्पष्ट रूप से प्रमाणित करता है।
व्यवहार न्यायालय द्वारा वादीगण/आवेदक एवं प्रतिवादी/अनावेदक के द्वारा प्रस्तुत वाद को सिद्ध करने के लिए वाद प्रश्न निर्मित किये जाते हैं।माननीय न्यायालय श्रीमान व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी पाली द्वारा पुरे मामले में छः वाद प्रश्न तय किए गए थे।
जिसका विवरण इस प्रकार है –
*वाद प्रश्न क्रमांक 01- क्या ग्राम पंचायत पोड़ी पहनं 11 रानिमं पोड़ी तहसील-पाली जिला- कोरबा छग में स्थित भुमि खसरा नंबर 1236 रकबा 0.65 एकड़ निस्तार पत्रक में शौच हेतु आरक्षित भुमि है? जिसका निष्कर्ष प्रमाणित किया गया है।*
*वाद प्रश्न क्रमांक 02- क्या उक्त खसरा नंबर 1236 रकबा 0.65 एकड़ में से रकबा 0.10 डिसमिल भुमि पर प्रतिवादी क्रमांक 01 को प्राप्त पट्टा अवैध एवं शून्य है? जिसका निष्कर्ष प्रमाणित किया गया है।*
*वाद प्रश्न क्रमांक 03- क्या प्रतिवादी क्रमांक 01 वाद ग्रस्त भुमि पर अवैधानिक रूप से मकान का निर्माण किया जा रहा है? जिसका निष्कर्ष प्रमाणित किया गया है।*
*वाद प्रश्न क्रमांक 04- क्या वादीगण द्वारा प्रस्तुत वाद प्रचलन योग्य है? जिसका निष्कर्ष प्रमाणित किया गया है।*
*माननीय न्यायालय श्रीमान व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी पाली द्वारा संपुर्ण तथ्यों व प्रस्तुत साक्ष्यों के विवेचना एवं विश्लेषण उपरांत अपने निर्णय दिनांक 20/01/2026 में खसरा नंबर 1236 रकबा 0.65 एकड़ में से 0.10 डिसमिल भुमि को शौच हेतु आरक्षित भुमि घोषित किया है।* व्यवहार न्यायालय पाली द्वारा पारित निर्णय के विरुद्ध स्वयं रामनारायण कश्यप द्वारा द्वितीय अपर जिला न्यायालय कटघोरा में अपील प्रस्तुत किया गया है। जो स्पष्ट करता है कि उक्त व्यक्ति व्यवहार न्यायालय पाली के फैसले से असंतुष्ट हैं।
आनन फानन में भवन निर्माण कार्य पुनः प्रारंभ कर दिया गया जिसकी शिकायत पुनः तहसील पाली में किया गया जिसमें नायब तहसीलदार श्री सुजीत कुमार पाटले द्वारा 04/02/26 को स्थगन आदेश जारी तो जरूर किया गया लेकिन उक्त प्रकरण पुर्व में तहसील न्यायालय में चलायमान होकर निराकरण किये जाने का हवाला देते हुए आवेदन खारीज कर दिया गया है। पुर्व जनपद सदस्य मिर्जा कय्यूम बेग ने कलेक्टर जनदर्शन कोरबा एवं अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पाली को पत्र प्रस्तुत कर माननीय न्यायालय श्रीमान व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी पाली जिला कोरबा छग के निर्णय का उल्लेख करते हुए रामनारायण कश्यप पिता कुंजी लाल कश्यप द्वारा निर्मित कुटरचित पट्टा को तत्काल निरस्त करने तथा उक्त भूमि में किये जा रहे मकान निर्माण कार्य पर रोक लगाते हुए आरक्षित शासकीय भूमि से बेदखली की कार्यवाही किए जाने की मांग की गई थी। जिसमें स्थगन आदेश स्वयं नायब तहसीलदार पाली श्री सुजीत कुमार पाटले द्वारा जारी तो जरूर किया गया किन्तु किसी वैधानिक जांच किए बिना ही मकान निर्माण पर लगे रोक को निरस्त कर दिया गया है।
जो संदेहास्पद है। पुर्व जनपद सदस्य एवं ग्रामीणों ने कलेक्टर एवं एसडीएम पाली को पुनः पत्र प्रस्तुत कर मकान निर्माण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
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