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“डीईओ” विहीन हुआ बिलासपुर, शासन प्रयोग बतौर किसी डिप्टी कलेक्टर को सौंपे भार ? स्थायी ” डीईओ” के बिना बड़े फैसले नहीं ,बच्चों और शिक्षकों दोनों को दिक्कत

On: July 16, 2026 10:09 AM

बिलासपुर “डीईओ” विहीन हुआ, शासन प्रयोग बतौर किसी डिप्टी कलेक्टर को सौंपे भार ?
स्थायी ” डीईओ” के बिना बड़े फैसले नहीं ,बच्चों और शिक्षकों दोनों को दिक्कत

बिलासपुर(अमित मिश्रा वायरलेस न्यूज) बिलासपुर में पिछले एक सप्ताह से जिला शिक्षा अधिकारी का महत्वपूर्ण पद खाली पड़ा है, शासन को इस पर विचार कर तत्काल नियमित नियुक्ति करें।
शासन को इस बार पिछली परंपराओं को तोड़ते हुए किसी डिप्टी कलेक्टर को बिठाना चाहिए जिला में शिक्षा व्यवस्था काफी विशाल है 250 से ज्यादा स्कूल संचालित हो रहे हैं ऐसे महत्वपूर्ण विभाग को सम्हालने का एक प्रयोग कर देखना चाहिए कि कितना सफल हो पाता है। अभी तक किसी प्राचार्य को बिठाया जाता रहा है। इनसे प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार नहीं होता है यदि PSC से पास आउट लोगों की नियुक्ति करें तभी व्यवस्था में सुधार होगा
शासन नेताओं के दबाव में अपने चाटुकारों को बिठाने में लगे रहते हैं, ऐसे लोगों को बिठा पढ़ाई भी छात्रों का चौपट है। जबकि सत्र प्रारंभ हुए लगभग डेढ़ महीने बीतने जा रहा है कोई माई बाप नहीं है स्कूलों को देखने वाला?
बिलासपुर न्यायधानी
में इन दिनों सबसे चर्चित नाम “योग्य जिला शिक्षा अधिकारी” की तलाश का है। शिक्षा विभाग का पूरा महकमा इस एक पद के लिए दौड़-भाग कर रहा है। फाइलें इधर से उधर, सिफारिशें ऊपर से नीचे और चर्चाओं का बाजार गर्म है। बंगले में शोर मचा हुआ है अंदर से आवाज आती है सामान्य नहीं चाहिए, पिछड़ा भी नहीं तो क्या! योग्य चाहिए!
स्कूलों में शिक्षकों की समस्या, ट्रांसफर-पोस्टिंग, बोर्ड परीक्षा की तैयारियां और सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन सब अटका हुआ है। लेकिन कुर्सी पर कौन बैठेगा, यही तय नहीं हो पा रहा।
सूत्रों के मुताबिक योग्य और “सेटिंग” वाले नामों की सूची मंत्रालय से लेकर विभाग तक घूम रही है।

शिक्षा विभाग का “काम तो चल रहा है, पर स्थायी अधिकारी के बिना बड़े फैसले नहीं हो पा रहे। बच्चों और शिक्षकों दोनों को दिक्कत हो रही है।”

सवाल बड़ा है
क्या वाकई हमें “योग्य” जिला शिक्षा अधिकारी चाहिए, या “अपना” जिला शिक्षा अधिकारी?
जब तक ये तय नहीं होगा, तब तक न्यायधानी को और इंतजार करना पड़ेगा।

और तब तक… फाइलें चलती रहेंगी, चर्चाएं चलती रहेंगी और

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Amit Mishra
Amit Mishra
अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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