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खाद की कालाबाजारी, महंगा खाद खरीदना किसान की मजबूरी – भगवानू पुलिस पर चाकू से हमला, जोगी कांग्रेस ने घटना की निंदा

On: February 27, 2022 3:46 PM

खाद की कालाबाजारी के लिए कांग्रेस-भाजपा जिम्मेदार – JCCJ

₹266 का यूरिया ₹600 में
₹1000 का पोटास ₹1500 में
₹1200 का डीएपी ₹1500 में
₹368 का फास्फोरस ₹500 में

रायपुर (वायरलेस न्यूज़) छत्तीसगढ़, दिनांक 27 फरवरी 2022। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के मुख्य प्रवक्ता अधिवक्ता भगवानू नायक ने खाद की कालाबाजारी पर भाजपा-कांग्रेस दोनों राष्ट्रीय राजनीतिक दल को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा रबी फसल के लिए किसानों को सोसाइटी में खाद नहीं मिल पा रहा है। वही खुले बाजार में खाद की कालाबाजारी की जा रही है जिसके कारण किसान को आज मजबूर होकर बढ़ी हुई कीमतों पर खाद खरीदना पड़ रहा है।

रायपुर ,दुर्ग, धमतरी, जगदलपुर राजनांदगांव, गरियाबंद के किसानों को खाद के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा एक तरफ सोसायटी में खाद की कमी दूसरी तरफ कृषि केंद्र के संचालक के द्वारा मनमानी की जा रही है। रबी फसल के दौरान खाद का संकट किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है, इसलिए मजबूर होकर किसानों को बाजार से अधिक दर पर खाद खरीदना पड़ रहा है। जो खाद किसानों को सोसायटी में सस्ते दर में मिल सकता है वह खाद की कमी के कारण बाजार में ₹266 का यूरिया ₹600 में, ₹1000 का पोटास ₹1500 में, ₹1200 का डीएपी ₹1500 में,₹368 का फास्फोरस ₹500 में बिक रहा है। खाद के लिए किसान हलाकान है वहीं खाद की कमी के लिए कांग्रेस भाजपा एक दूसरे पर दोषारोपण कर रहे है। जबकि वास्तविकता यह है खाद की कमी की स्थिति निर्मित होने के लिए दोनों ही राष्ट्रीय दल जिम्मेदार है जिसका परिणाम दोनों दलों को चुनाव में भुगतना पड़ेगा।

पुलिस पर चाकू से हमला, जोगी कांग्रेस ने घटना की निंदा

जोगी कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता अधिवक्ता भगवानू नायक ने दुर्ग जिला के अंतर्गत रेंगाकठेरा में रेत माफिया पर कार्रवाई के दौरान पहुंचे पुलिस जवान को चाकू से मारने की कड़ी शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में माफियाओं का इतना हौसला बुलंद हो गया है कि अब कानून के रक्षक भी को भी वह कुछ नहीं समझ रहे हैं और पुलिस पर हमला कर रहे हैं जोकि अत्यंत निंदनीय और चिंतनीय है। जब कानून व्यवस्था को संभालने वाले पुलिस ही सुरक्षित नहीं है तो आम जनता कैसे सुरक्षित होगा ? छत्तीसगढ़ में अब गुंडे, बदमाश, माफियाओ के हौसले बुलंद हो गए जो कानून व्यवस्था संभालने पर भारी पड़ रहे है।

Author Profile

Amit Mishra
Amit Mishra
अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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