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नॉन प्रैक्टिशनर अधिवक्ताओं की बन रही लिस्ट, वोटिंग के बाद एडवोकेट एक्ट के तहत उन पर होगी कार्रवाई…

On: March 22, 2022 6:44 AM

मतदान के समीकरण बिगाड़ने वोटर बने नान प्रैक्टिशनर पर कड़ी नजर

रायगढ़। (वायरलेस न्यूज़) अधिवक्ता संघ रायगढ़ के चुनाव 23 मार्च को होने वाले हैं इस चुनाव में अध्यक्ष , उपाध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष, ग्रंथपाल सहित 6 सदस्यीय कार्यकारिणी के लिए वोटिंग होना है। वर्तमान में 583 वोटर इस चुनाव प्रक्रिया में भाग लेंगे। खास बात यह है कि इनमें से लगभग डेढ़ सौ वोटर्स नान प्रैक्टिशनर्स है अर्थात उनका वकालत के पेशे से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है। यह बात और है कि वो किसी भी प्रकार से जुगाड़ कर रायगढ़ अधिवक्ता संघ की लिस्ट में अब तक बने हुए हैं। अधिकांश तौर पर यह देखने में आया है कि ऐसे नान प्रैक्टिशनर अधिवक्ता चुनाव को प्रभावित करते हैं वह केवल चुनाव में सामने आते हैं जबकि अन्य दिनों वे अपने किसी दूसरे व्यवसाय में लगे रहते हैं । अब ऐसे लोगों की पहचान शुरू हो गई है साथ ही मतदान के बाद ऐसे अधिवक्ताओं पर भी कार्यवाही की बात की जा रही है और यह कार्रवाई उन पर एडवोकेट एक्ट के तहत की जाएगी।

क्या है एडवोकेट एक्ट 1961

जानकारों की माने तो एडवोकेट एक्ट में एक एडवोकेट के लिए निर्धारित मापदंड का उल्लेख किया गया है। रजिस्ट्रेशन और विधि व्यवसाय से संबंधित नियम बनाए गए हैं जिसमें प्रमुख रूप से यह बताया गया है कि एक एडवोकेट अपने न्यायालयीन पेसे के अलावा अन्य कोई भी व्यवसाय या नौकरी नहीं करेगा। यदि कोई अधिवक्ता दोनों ही कार्यों को कर रहा है तो इस एक्ट के तहत वह दोषी होगा और कार्रवाई का पात्र होगा। रायगढ़ अधिवक्ता संघ में भी ऐसे लगभग डेढ़ सौ अधिवक्ता होने की बात सामने आ रही है जो केवल वोटिंग के टाइम कालाकोट पहन कर न्यायालय आते हैं और वोटिंग को बुरी तरह से प्रभावित करते हैं। जबकि वो मूल रूप से किसी उद्योग अथवा व्यवसाय में प्रमुख रूप से कार्य कर रहे होते हैं। इस बार इस स्थिति से निजात पाने के लिए प्रत्येक अधिवक्ता पर निगरानी रखी जा रही है और चुनाव के बाद ऐसे दो व्यवसाय वाले अधिवक्ताओं पर कार्रवाई किए जाने की तैयारी चल रही है।

अधिवक्ता संघ की रसीद कटा लिए तो खुद को मान बैठे वकील

रायगढ़ अधिवक्ता संघ के कई सदस्यों की ओर से संघ की रसीद कटा लेने मात्र से खुद को वकील कहा जा रहा है और अब चुनाव आते ही वे अपने संवैधानिक अधिकार के लिए जाग उठे हैं जबकि उनका कोर्ट की प्रैक्टिस से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है और वह अपने दूसरे धंधे में व्यस्त हैं। ऐसी स्थिति में कई दफा अधिवक्ताओं का मान सम्मान भी प्रभावित होता दिखता है। अब तक इस प्रकार की छटनी नहीं होने के कारण यह दोहरी स्थिति पिछले कई साल से बनी हुई है लेकिन अब जागरूक अधिवक्ताओं की ओर से और कुछ प्रत्याशियों की ओर से ऐसे दो व्यवसाय वाले अधिवक्ताओं का लाइसेंस निरस्त करवाने की तैयारी चल रही है। जो संभवतः चुनाव प्रक्रिया संपन्न होने के बाद उनकी गतिविधियों को देखते हुए अमल में लाई जाएगी।

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Amit Mishra
Amit Mishra
अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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