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*जिला न्यायालय रायगढ़ के नवीन भवन में स्थानांतरित मध्यस्थता केन्द्र का शुभारंभ*

On: January 27, 2021 3:50 PM

रायगढ़ (वायरलेस न्यूज़) 27 जनवरी 2021/ जिला न्यायालय स्थित भवन के द्वितीय तल में नवीन स्थापित ‘मिडियेशन सेन्टर’ का शुभारंभ जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायगढ़ के अध्यक्ष श्री रमाशंकर प्रसाद एवं जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष श्री राजेन्द्र कुमार पाण्डेय के द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस अवसर पर जिला न्यायालय के समस्त न्यायाधीशगण, जिला अधिवक्ता संघ के अधिवक्तागण एवं प्रशिक्षित मध्यस्थ न्यायाधीशगण एवं प्रशिक्षित मध्यस्थ अधिवक्तागण, न्यायालयीन एवं विधिक कर्मचारीगण, पैरालीगल वालिंटियर्स उपस्थित रहे।
पूर्व में मिडियेशन सेन्टर, परिवार न्यायालय भवन में संचालित था, वर्तमान में जिसे 26 जनवरी 2021 को जिला न्यायालय भवन के द्वितीय तल में स्थापित किया गया है तथा तहसीलों में तहसील न्यायालय भवन में मध्यस्थता केन्द्र स्थापित है। विदित हो कि जिला न्यायालय रायगढ़ एवं तहसील न्यायालयों सारंगढ़, घरघोड़ा, धरमजयगढ़, खरसिया को सम्मिलित करते हुए, रायगढ़ जिला में कुल 05 मध्यस्थ केन्द्र स्थापित हैं। उक्त मध्यस्थ केन्द्रों में कुल 09 प्रशिक्षण प्राप्त मिडियेटर न्यायाधीश/अधिवक्ता कार्यरत हैं। प्रशिक्षित न्यायाधीश मिडियेटरों में श्री ओमप्रकाश सिंह चौहान, न्यायाधीश परिवार न्यायालय, श्रीमती गिरिजा देवी मेरावी, विशेष न्यायाधीश एवं श्री चन्द्रकुमार कश्यप, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं मिडियेटर/मध्यस्थता प्रभारी के रूप में कार्यरत हैं, इसके अतिरिक्त प्रशिक्षित अधिवक्ता में सुश्री खुतीजा खान, श्री धनीराम बंजारे एवं श्री संतोष कुमार मिश्रा कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त तहसील न्यायालय घरघोड़ा में श्री शंखदेव मिश्रा तहसील धरमजयगढ़ में श्री ए.के.सिंह एवं तहसील खरसिया में श्री लाल बहादुर राठौर मिडियेटर/अधिवक्ता के रूप में कार्यरत हैं।
मध्यस्थता केन्द्र में प्रतिदिन प्रशिक्षित मध्यस्थतों के द्वारा मध्यस्थता के माध्यम से सिविल/आपराधिक/पारिवारिक/विशिष्ट अनुतोष/निषेधाज्ञा जैसे प्रकरणों के निराकरण का प्रयास किया जा रहा है। मध्यस्थता न्यायालय में विवादों को सुलझाने का एक सरल मार्ग है। मध्यस्थता में दो पक्षों को खुलकर बातचीत करने के लिये प्रेरित और उत्साहित करता है तथा पक्षों के बीच संवाद स्थापित करने में सहयोग प्रदान करता है। इसमें कहीं भी विवशता एवं दबाव नहीं रहता। इसमें निर्णय लेने का अधिकार भी पक्षों का ही रहता है। पूरी प्रक्रिया स्वतंत्र और निष्पक्ष रहती है।

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Amit Mishra
Amit Mishra
अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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