आज भरेगा बजगरियों का बाज़ार

बिलासपुर (वायरलेस न्यूज) राउत नाच के दिन आ गए हैं।अब गंड़वा बाजा की धुन तथा कर्मा,ददरिया लय पर सजे-धजे रावत नर्तक थिरकेंगे।अब गंड़वा बाजा के बजगरियों का आज को बाज़ार भरेगा। प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी रावत समाज अपनी " देवारी " मनाएगा।इस अवसर पर अपने नृत्य के लिए बाजा तय करेंगे।शनिचरी बाज़ार से लेकर मुन्नूलाल शुक्ल स्कूल गोंड़पारा तक बजगरियों की टोलियां आकर अपनी आमद दर्ज करेंगी। जिले भर से रावत नाच की टोलियां यहां आकर पन्द्रह दिवसों के अपने " नाच " के लिए बाजा तय करेंगी।मोल-भाव होगा।बाजा की धुनों को परखा जाएगा।बाजावालों की करीब सत्तर से अधिक टोलियां न केवल छत्तीसगढ़ वरन उड़ीसा से तक यहां आती हैं। महोत्सव के संयोजक डॉ. कालीचरण यादव जी ने बताया कि विगत तीन सालों से कोरोना की वज़ह से रावत नाच प्रभावित रहा है किंतु इस बार यह प्राकृतिक संकट नहीं है अतः अधिक नर्तक दल के महोत्सव से शामिल होने की संभावना है।गंड़वा बाजा के बजगरिये भी कोरोना की वज़ह से बहुत पीड़ित हुए।इस बार इन बाजावालों की अधिक टोलियां आने की संभावना है।इस बार पर्व को लेकर समाज में भारी उत्साह देखा जा रहा है। परंपरागत रूप से जेठौनी एकादशी से बाज लगने के साथ रावत नाच शुरू हो जाएगा।इसके लिए नर्तक दल नए ड्रेस की सिलाई करा चुके हैं।चार नवंबर दिन शुक्रवार को नर्तक दलों की टोलियां यहां आकर बाजा तय कर अपने साथ ले जाएंगी।इसके साथ ही उनकी देवारी शुरू हो जाएगी जो लगभग पन्द्रह दिन चलेगी।12 नवंबर की शाम लाल बहादुर शास्त्री शाला में 45 वां रावत नाच महोत्सव होगा।

बाजावालों की टोली के

बाजे भी अलग किस्म के

सात से दस तक सदस्य बाजावालों के दल में शामिल होते हैं।इनके वाद्ययंत्र भी अलग किस्म के होते हैं। मुंह से फूंककर बजाने वाले वाद्य में मोहरी, तुरही होते हैं जिससे शहनाई की तरह की धुन निकला करती है।हाथ से बजाने वाले में निसान,ढपड़ा, टिमकी,मंजीरे,झांझ,आदि शामिल होते है।निसान,ढपड़ा,टिमकी रण के बाजे हैं जो रावत नर्तकों में नृत्य का जोश भरते हैं।