• *देशभर के मीडिया विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने ‘जनसंपर्क: लोकतंत्र का पांचवा स्तंभ’ विषय पर रखे विचार*

रायपुर, वायरलेस न्यूज 21 अप्रैल 2026: पब्लिक रिलेशन्स सोसाइटी ऑफ इंडिया (PRSI), रायपुर चैप्टर द्वारा ‘राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस’ के अवसर पर एक दिवसीय ऑनलाइन राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में “जनसंपर्क: लोकतंत्र का पांचवा स्तंभ” विषय पर देश के जाने-माने जनसंपर्क विशेषज्ञों, पत्रकारों, संचार विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया।
संगोष्ठी के मुख्य अतिथि माननीय गोविन्द सिंह (चेयरमैन, मीडिया एडवायजरी कमेटी, उत्तराखण्ड सरकार एवं पूर्व अधिष्ठाता, IIMC नई दिल्ली) ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान दौर में जनसंपर्क और जनसंवाद की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जहाँ लोकतंत्र के तीनों स्तंभ कार्य कर रहे हैं, वहीं मीडिया को चौथे स्तंभ के रूप में अपने उत्तरदायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करना होगा।
सोशल मीडिया के प्रभाव पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, “अन्ना हजारे आंदोलन से लेकर श्रीलंका और बांग्लादेश के घटनाक्रमों में सोशल मीडिया की ताकत दिखी है, लेकिन वर्तमान में यह अनियंत्रित है। नियम-कानून होने के बावजूद उनका पालन नहीं हो रहा है। किसी भी संचार साधन को असीमित शक्ति देने के साथ-साथ उसे रोकने की क्षमता भी तंत्र में होनी चाहिए।” उन्होंने आगाह किया कि आज पीआर एजेंसियां प्रोपेगेंडा और कॉर्पोरेट लॉबिंग के जरिए सरकारों को नियंत्रित करने का प्रयास कर रही हैं।
जनसंपर्क: मन से मन को जोड़ने की कला
श्री वरुण सखा श्रीवास्तव (एसोसिएट एक्जीक्यूटिव एडीटर, IBC24 रायपुर) ने जनसंपर्क को ‘बॉटम ऑफ डेमोक्रेसी’ (लोकतंत्र की आधारशिला) बताते हुए कहा कि यह लोगों की आदतों को बदलने का माध्यम है। उन्होंने इसे केवल सूचना प्रसार तक सीमित न रखकर ‘मन से मन को जोड़ने’ की प्रक्रिया बताया।
एमिटी विश्वविद्यालय की प्रोफेसर वीना हड्डा ने जनसंपर्क के क्षेत्र में बढ़ते ‘पर्सनलिज्म’ (व्यक्तिवाद) और दिखावे पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज जनसंपर्क कहीं न कहीं शुद्ध मार्केटिंग में बदल गया है। सोशल मीडिया पर खबरों के सत्यापन (Investigative process) की कमी को रेखांकित करते हुए उन्होंने मीडिया को तटस्थ रहने और प्रोफेशन के साथ ‘मिशन’ और ‘विज़न’ को जोड़ने की बात कही।
PRSI वेस्ट जोन के वाइस प्रेसिडेंट श्री एस.पी. सिंह ने ‘ग्लोबल विलेज’ की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए जनसंपर्क को लोकतंत्र के पांचवें स्तंभ के रूप में स्थापित करने की आवश्यकता बताई। PRSI रायपुर चैप्टर के अध्यक्ष
प्रोफेसर शाहिद अली, जनसंपर्क विभाग के अतिरिक्त संचालक श्री आलोक देव,
संगोष्ठी में प्रोफेसर डॉ अलीम खान, मानवाधिकार आयोग के जनसंपर्क अधिकारी श्री मनीष मिश्रा, चिप्स के जनसंपर्क अधिकारी श्री संजीव शर्मा, सीएसपीडीसीएल के जनसंपर्क अधिकारी श्री विकास शर्मा ने भी अपने विचार साझा किए और इस बात पर सहमति जताई कि सशक्त जनसंपर्क के बिना एक स्वस्थ लोकतंत्र की कल्पना कठिन है। पीआरएसआई के सचिव डॉ कुमार सिंह तोप्पा ने आभार व्यक्त किया।

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Amit Mishra - Editor in Chief
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