*”विकलांग-विमर्श”–विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न—*
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*बिलासपुर (वायरलेस न्यूज) अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद् एवं प्रयास प्रकाशन बिलासपुर के संयुक्त तत्वावधान में विकलांग-विमर्श विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन माननीय न्यायमूर्ति चंद्रभूषण बाजपेयी, पूर्व न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, धर्मभूषण पं. श्रीधर गौरहा, महाप्रबंधक, एसईसीएल तथा शिवशंकर सिंह निदेशक डिवाइन ग्रुप के विशेष आतिथ्य में संपन्न हुआ जिसमें छह राज्यों के शताधिक प्रतिनिधियों ने शोधपत्र प्रस्तुत किए।
मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति बाजपेयी ने कालजयी कृति “विकलांग- विमर्श : दशा एवं दिशा” के बंगला भाषा में अनुवाद करने वाली विदुषी लेखिका को बधाई देते हुए कहा कि विकलांग विमर्श पर आधारित, यह ग्रंथ भाषा और देश की सीमा लांघ कर अंतरराष्ट्रीय क्षितिज को स्पर्श करेगा, इसमें दो मत नहीं | इन्होंने विकलांग विमर्श की ग्यारहवीं संगोष्ठी को सफल बताते हुए कहा कि विशुद्ध मानवता की दृष्टि पर आधारित यह विमर्श आज की आवश्यकता है |
वहीं पं. गौरहा जी ने भी आध्यात्मिक आधार पर विकलांग-विमर्श को प्रतिष्ठित करके इसकी सारगर्भित विवेचना की | शिवशंकर सिंह जी ने भी शिक्षा और साहित्य की दृष्टि से इस विमर्श को युग की मांग बतलाया | इसके पूर्व शोधपत्रों के तकनीकी पक्ष में अध्यक्ष मंडल के रूप में डॉ.विरेंद्र पाण्डेय, डॉ.राघवेंद्र दुबे, हेमंत कुमार गौर, महाप्रबंधक सीएमपीडीआई श्री के पी द्विवेदी, प्रबंधक, डॉ.मीनकेतन प्रधान,डॉ.अखिलेश तिवारी, हिंदी अधिकारी, गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय,डॉ.चंद्रशेखर सिंह की उपस्थिति और प्रो. विश्वनाथ कश्यप के संचालन में अनिता कुमारी ठाकुर, दीनदयाल यादव, मंजू चौरसिया,डॉ. प्रीति प्रसाद, गोपाल, प्रीतम सिंह मरावी, बाल गोविंद अग्रवाल, के.पी. द्विवेदी,डॉ. रामशंकर भारती, गीता द्रोड़़मणी, राधाकृष्ण पाठक, अनिल कुमार पटेल, संजीव कुमार सिंह, चंचल बाला, प्रदीप निर्णेजक आदि ने शोधपत्र का पाठन किया | अंत में डॉ. बजरंग बली शर्मा ने आभार व्यक्त किया |

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Amit Mishra - Editor in Chief
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