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बड़ी खबर: बिलासपुर के नोबल हॉस्पिटल, महादेव हॉस्पिटल, शिशु भवन, मार्क और एलाइट हॉस्पिटल मे मरीजों को लुटने बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े सबूत मिले

On: February 10, 2025 10:54 AM

रायपुर ( वायरलेस न्यूज़) छत्तीसगढ़ सरकार ने आयुष्मान योजना में मरीजों को लूटने और ओवर बिलिंग करने वाले अस्पतालों पर बड़ी कार्रवाई की है। इनमें रामकृष्ण केयर, एसएससी हर्ट अस्पताल, बालको हॉस्पिटल, आरोग्या, शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज, बिलासपुर के मार्क, शिशु भवन और महादेव जैसे अस्पताल शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग के निरीक्षण में व्यापक खामियां पाई जाने के बाद हेल्थ सिकरेट्री अमित कटारिया ने यह एक्शन लिया है। जांच में अधिकांश अस्पतालों में आयुष्मान योजना में मरीजों से नगद पैसा लेने, एमबीबीएस डॉक्टर का नहीं होना और पैथो जांच का स्केन्ड सिग्नेचर वाला रिपोर्ट मिला।

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना आयुष्मान भारत, जो गरीबों को मुफ्त स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई थी, अब घोटाले के आरोपों में घिर गई है। बिलासपुर शहर के चार बड़े निजी अस्पतालों पर फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग की राज्य स्तरीय छापेमारी में यह मामला सामने आया है।

सूत्रों के मुताबिक, स्वास्थ्य विभाग को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि कई अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत गड़बड़ी कर रहे हैं। इन शिकायतों के बाद स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने हेल्थ कमिश्नर डॉ. प्रियंका शुक्ला को जांच की जिम्मेदारी सौंपी। इसके बाद रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर संभाग के अस्पतालों की जांच के लिए 14 टीमें गठित की गईं। छापेमारी के दौरान बिलासपुर के नोबल हॉस्पिटल, महादेव हॉस्पिटल, शिशु भवन और एलाइट हॉस्पिटल में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े के सबूत मिले।

*स्वस्थ बच्चों को कुपोषित बताकर किया फर्जी क्लेम..

जांच में पता चला कि इन अस्पतालों ने आयुष्मान योजना के तहत करोड़ों रुपए का फर्जी क्लेम किया है। खासतौर पर गरीब महिलाओं के प्रसव के दौरान जन्म लेने वाले स्वस्थ बच्चों को कुपोषित बताकर सरकार से ज्यादा पैसे वसूले गए। इसके अलावा, कई मामलों में मरीजों के इलाज के नाम पर फर्जी दावे किए गए।

स्वास्थ्य विभाग ने इन अस्पतालों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि अस्पताल संतोषजनक जवाब नहीं देते हैं, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले में आरोपी अस्पतालों की प्रतिक्रिया का इंतजार है, लेकिन सवाल यह है कि क्या सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए और सख्त कदम उठाए जाएंगे?

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Amit Mishra
Amit Mishra
अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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