अन्तर्राष्ट्रीय अपराध खेल जगत छत्तीसगढ़ धर्म-कला-संस्कृति बिलासपुर मध्य प्रदेश महाराष्ट्र राष्ट्रीय रेलवे साक्षात्कार हाईकोर्ट अन्य

बड़े तालाबों को बचा नहीं पा रहा और छोटे तालाबों को मरने के लिए छोड़ दिया है छत्तीसगढ़ वेटलैंड अथॉरिटी ने

On: May 17, 2025 9:49 AM
Follow Us:

बड़े तालाबों को बचा नहीं पा रहा और छोटे तालाबों को मरने के लिए छोड़ दिया है छत्तीसगढ़ वेटलैंड अथॉरिटी ने

रायपुर (वायरलेस न्यूज़) 17 मई/ छत्तीसगढ़ वेटलैंड अथॉरिटी की कार्य प्राणी को उजागर करते हुए रायपुर के नितिन सिंघवी ने आरोप लगाया है कि आद्र्भूमियों के संरक्षण के लिए बनी वेटलैंड अथॉरिटी प्रदेश के बड़े तालाबों को बचा नहीं पा रही है और छोटे तालाबों को मरने के लिए छोड़ दिया है। वर्ष 2017 में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के उपरांत 2.25 हेक्टर से ऊपर के तालाबों और आद्रभूमियों पर वेटलैंड संरक्षण के लिए प्रतिबंधित कार्यो के नियम लागू होते हैं परंतु 2.25 से छोटे तालाबों पर यह नियम इसलिए लागू नहीं हो पाए क्योंकि ये छोटे तालाब चिन्हित कर अधिसूचित नहीं किए गए हैं।

छोटे तालाबों को तब बचायेंगे जब भारत सरकार कहेगी

श्री नितीन सिंघवी ने बताया कि आठ माह पूर्व उन्होंने 2.25 हेक्टर से छोटे तालाबों को चिन्हित कर अधिसूचित करने के लिए शासन को पत्र लिखा था जिस पर शासन ने वेटलैंड अथॉरिटी से पूछा कि इन तालाबों को बचाने के लिए नियमों के अंतर्गत क्या कार्रवाई की जा सकती है? वेटलैंड अथॉरिटी ने सात माह तक कोई जवाब नहीं दिया, सात माह पश्चात वेटलैंड अथॉरिटी ने शासन को बताया कि अभी वह बड़े तालाबों के चिन्हांकन में व्यस्त है और 2.25 हेक्टेयर से नीचे के छोटे तालाबों को चिन्हित करने का कार्य भविष्य में भारत सरकार पर्यावरण, वन एव जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से निर्देश मिलने के पश्चात किया जाएगा।

सिंघवी ने वेटलैंड अथॉरिटी के जवाब पर आपत्ति जताते हुए शासन को पत्र लिखा है कि भारत सरकार ने नियम अधिसूचित कर दिए हैं, बता दिया है कि राज्य की वेटलैंड अथॉरिटी को सभी तालाबों को चिन्हित करके नोटिफाई करना है। इसके बाद वेटलैंड अथॉरिटी को भारत सरकार के निर्देशों की जरूरत क्यों है? इसका साफ मतलब है कि वेटलैंड अथॉरिटी छोटे तालाबों की रक्षा करने के लिए इच्छुक नहीं है और उन्हें मरने के लिए छोड़ दिया है। सिंघवी ने मांग की है कि वेटलैंड अथॉरिटी को निर्देश किया जाए की 2.25 हेक्टर से छोटे तालाबों को समय सीमा में चिन्हित कर अधिसूचित किया जाए जिससे नियमों के तहत उन तालाबों को संरक्षित किया जावे।

क्या है संरक्षण के तहत प्रतिबंधित कार्य:

(1) वर्ष 2000 से निकाले गए अधिकतम औसत फ्लड लेवल से 50 मीटर आगे तक कोई भी स्थायी निर्माण (नाव घाटों को छोड़ कर) नहीं किया जा सकता (जैसे टोवाल या रिटेनिंग वाल, पाथ वे), (2) किसी भी प्रकार का अतिक्रमण, उद्योग स्थापना या विस्तार (3) कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन का कचरा, हेजार्ड मटेरियल, इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट इत्यादि का डिस्पोजल (4) सॉलिड वेस्ट अर्थात उद्योगों, शहरों, गांव और अन्य मानव बस्तियों से अशुद्ध अपशिष्ट और बहिस्त्रावों का निस्सारण (5) शिकार।

सिंघवी ने चर्चा में बताया कि देश में वेटलैंड संरक्षण के नियम 2010 से लागू है बाद में 2017 में नए नियम भी लाये गए। इन नियमों के तहत वेटलैंड अथॉरिटी को सभी वेटलैंड को चिन्हित करना है जिसे बाद में राज्य शासन द्वारा अधिसूचित किया जाना है, जिसके पश्चात नियमों के तहत संरक्षण के प्रावधान लागू होंगे। संरक्षण न मिलने से इन तालाबों में अतिक्रमण, अवैध निर्माण हो रहे है और नगरीय निकाय सौंदरयीकरण और विकास के नाम से प्रतिबंधित कार्य करवा रहे है। संरक्षण के बावजूद 2.25 हेक्टर से बड़े तालाबो में अधिकतम औसत फ्लड लेवल से 50 मीटर आगे के दायरे में टोवाल या रिटेनिंग वाल, पाथ वे और अन्य निर्माण कार्य जारी है। 2.25 हेक्टर से बड़े तालाबों की शिकायत मिलने पर वेटलैंड अथॉरिटी जांच के आदेश जिला संरक्षण समिति को दे देती परन्तु वर्षो तक जांच रिपोर्ट न मिलने पर भी शासन के संज्ञान में नहीं लाती।

आने वाली पीढ़ी बचे हुए तालाबों की डेड बॉडी देखेगी !

शहरों के अधिकतम बड़े और छोटे तालाब की इकोलॉजीकल सिस्टम मृतप्राय है, कई तालाबों का अस्तित्व समाप्त हो गया है कब्जों के कारण ये अब दिखते भी नहीं हैं। आने वाली पीढ़ी बचे हुए तालाबों को देख भी नहीं पाएगी या फिर इन तालाबों की डेड बॉडी देखेगी।

Author Profile

Amit Mishra
Amit Mishra
अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

Amit Mishra

अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Facebook

Join Now

Also Read

कलेक्टर संजय कुमार जैन और एसपी सुरेंद्र कुमार जैन ने हरी झंडी दिखाकर तिरंगा यात्रा का किया शुभारंभ

सुप्रीम कोर्ट ने कार्यरत शिक्षकों को TET परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए 31अगस्त 2028 तक का समय-सीमा निर्धारित किया है-राजेश चटर्जी सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को TET परीक्षा आयोजित करने का आदेश दिया है TET परीक्षा उत्तीर्ण नहीं ! हजारों शिक्षकों की नौकरी खतरे में है ?

छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग की बड़ी कार्रवाई* *ओवररेटिंग मामले में दो आबकारी उप निरीक्षक निलंबित*

मुंगेली में औद्योगिक विकास की नई शुरुआत, बीईएमएल संयंत्र बनेगा विकास का आधार: कलेक्टर* *जिले में खुलेगा छत्तीसगढ़ का पहला हैवी अर्थ मूविंग इक्वीपमेंट निर्माण संयंत्र*

बिलासपुर शहर वृत्त केे 81% उपभोक्ताओं के बिजली बिल में आई कमी

छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट आर्गेनाइजेशन का खरसिया में शपथग्रहण समारोह संपन्न। पत्रकारों को निडरता से कार्य करने के लिए पत्रकार सुरक्षा कानून होना अतिआवश्यक – व्यास पाठक

Leave a Comment