दोस्तो अलविदा
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दोस्तों, दीवाली के इस पवित्र दिन जब आप और मेरा पूरा देश रोशनी से जगमगा रहा है, मैं आप सबको अलविदा कहने के लिए हाज़िर हूँ।
मेरा समय हो गया है, पर जाते-जाते एक बात कहना चाहता हूँ – मैं गया नहीं, बस अब आपके दिलों में बसने चला हूँ।
तुम्हें याद होगा वो जेलर… “हम अंग्रेज़ों के ज़माने के जेलर हैं…” ये लाइन बोलते वक़्त मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि ‘शोले’ का वो किरदार मेरी पहचान बन जाएगा।
रमेश सिप्पी और सलीम-जावेद ने मुझसे कहा था : “ये कैरेक्टर एक बेवकूफ है, पर खुद को होशियार समझता है”।
उसकी बॉडी लैंग्वेज के लिए हमने हिटलर से प्रेरणा ली थी।
पर सिर्फ़ “शोले” ही तो नहीं थी मेरी ज़िंदगी !
ऋषिकेश मुखर्जी (मुखर्जी) और गुलज़ार साहब ने मुझे ऐसे किरदार दिए जिन्हें निभाने में ज़िंदगी भर का मज़ा आया।
कभी ‘बावर्ची’ में मेरी शरारतें देखी होंगी आपने, तो कभी ‘अभिमान’ में मेरा अक्खड़ अंदाज़।
‘चुपके-चुपके’ और ‘छोटी सी बात’ में हँसते-हँसते लोट-पोट कर देने वाले मेरे कॉमिक सीन्स को शायद ही कोई भूल पाए। ‘परिचय’ में मेरे किरदार की मासूमियत, और ‘रफू चक्कर’ की ठिठोली… ये सब यादें आपके साथ ही तो हैं।
मेरे दोस्त राजेश खन्ना के साथ ‘नमक हराम’ और फिर उनकी ही कृपा से 25 और फ़िल्मों में काम किया। अमिताभ बच्चन के साथ भी कई यादगार फ़िल्में कीं। बाद के दिनों में ‘हेरा फेरी’ के बैंक मैनेजर से लेकर ‘मालामाल वीकली’ तक, आप सब का प्यार मिलता रहा।
तो दोस्तों, अब जब कभी उदास हो, बस मुझे याद कर लेना। आपकी हँसी और आपका प्यार, यही तो है मेरी असली विरासत।
आपका अपना
असरानी
(गोवर्धन असरानी)
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