बिलासपुर। ( वायरलेस न्यूज) छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने आरक्षण (कोटा) के अनुपालन को लेकर छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल) को कड़ा रुख अपनाते हुए हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
न्यायालय ने कहा है कि सीएसपीडीसीएल यह स्पष्ट करे कि नियुक्ति एवं पदोन्नति के मामलों में अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए कितने प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाना चाहिए, जबकि इस संबंध में न तो कोई ठोस डेटा एकत्र किया गया है और न ही राज्य सरकार द्वारा कोई स्पष्ट आरक्षण निर्धारित किया गया है।इस मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी 2026 को निर्धारित की गई है, जिसमें सीएसपीडीसीएल को विस्तृत हलफनामा के साथ जवाब प्रस्तुत करना होगा।
क्या है मामला-यह याचिका कनिष्ठ अभियंता प्रशांत विल्सन पन्ना, शीतल समीर टोप्पो एवं अन्य द्वारा अधिवक्ता नेल्सन पन्ना और आशुतोष मिश्रा के माध्यम से दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं ने सहायक अभियंता के पद पर पदोन्नति से संबंधित विज्ञापन दिनांक 22 अगस्त 2024 को चुनौती दी है।
याचिका में कहा गया कि उक्त विज्ञापन में सहायक अभियंता-प्रशिक्षु (प्रशिक्षण एवं विकास) के पद के लिए पात्र विभागीय उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए गए थे। विज्ञापन के अनुसार अनुसूचित जनजाति के लिए 16 रिक्त पद दर्शाए गए थे, लेकिन बाद में केवल 09 पदों पर ही पदोन्नति की गई, जो कि आरक्षण नियमों का उल्लंघन है।
याचिकाकर्ताओं की दलील-याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने न्यायालय को बताया कि प्रारंभिक विज्ञापन में सीएसपीडीसीएल एवं छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत पारेषण कंपनी लिमिटेड (सीएसपीटीसीएल) में सहायक अभियंता-प्रशिक्षु के लिए पदों का विवरण इस प्रकार था अनारक्षित: 17 पदअनुसूचित,जनजाति: 16 पद,अनुसूचित जाति: 0 पद,अन्य पिछड़ा वर्ग: 0 पद,याचिकाकर्ता उक्त विभागीय परीक्षा में सम्मिलित हुए, परीक्षा उत्तीर्ण की और 30 जुलाई 2025 को साक्षात्कार में भी भाग लिया। इसके बाद विभाग द्वारा बिना किसी शुद्धिपत्र (Corrigendum) जारी किए, राज्य शासन की अधिसूचना दिनांक 29 नवंबर 2012 का हवाला देते हुए आरक्षण रोस्टर में संशोधन कर दिया गया।
संशोधित रोस्टर के तहत पदों में बदलाव करते हुए अनारक्षित: 17 से बढ़ाकर 25,अनुसूचित जनजाति:16 से घटाकर 09,अनुसूचित जाति: 0 से 02,अन्य पिछड़ा वर्ग: 0 से 01, मामले की सुनवाई 12 दिसंबर 2025 को माननीय न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की खंडपीठ के समक्ष हुई। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए उत्तरवादी सीएसपीडीसीएल को निर्देश दिया कि वह हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करे कि अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण प्रतिशत किस आधार पर तय किया गया है और बिना डेटा व स्पष्ट सरकारी निर्देश के रोस्टर में बदलाव कैसे किया गया। अब इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी 2026 को होगी, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
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- अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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