बिलासपुर (वायरलेस न्यूज) जबसे केरल का अधिकारी यू आर गणेश अचानकमार टाइगर रिजर्व में पदस्थ हुए हैं कुछ न कुछ विवादों में रहें हैं,न जाने कौन सी घुट्टी ऊपर के नेताओं और अधिकारियों को पीला रखी है कि यहां से हटने का नाम ही नहीं ले रहा है। और तो और सुनने में आया है कि तखतपुर बिलासपुर और बिल्हा के विधायकों को भी तवज्जो नहीं देता फिर भी ये नेता इस विवादास्पद अधिकारी को बर्दाश्त कर रहे हैं !!

नए साल में अचानकमार टाइगर रिजर्व में हुई फायरिंग की घटना ने यू आर गणेश की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे ? इस घटना में अब एक नया मोड़ आ गया है जिसमें इस अंचल के दिग्गज भाजपा नेता शिकारियों को बचाने का दबाव बना रहे हैं जिस पर शिकारी जो जंगल में घुसे थे उसका रिकॉर्ड मेमोरी को गायब कराने का खेल प्रारम्भ कर दिया है और यह बताने में लगे हैं कि टाइगर गढ़ना होनी है और जंगल में लगे ट्रेप कैमरा से किसी ने मेमोरी कार्ड की चोरी कर ली है! कैमरों से छेड़छाड का यह गंभीर मामला है , जबकि शिकारियों को बचाने का खेल यही से किया जा रहा है।

और अज्ञात लोगों ने जंगल में लगाए गए दो ट्रेप कैमरों के मेमोरी कार्ड चोरी का नाटक रच खुड़िया पुलिस चौकी में गाभीघाट के बिट गार्ड ने 16/01/2026को लिखित शिकायत की है। इस पर इधर नौटंकी एटीआर प्रबंधन ने बिट गार्ड और डिप्टी रेंजर को ही बलि का बकरा बना नोटिस जारी कर दिया है। जबकि सारा खेला यहीं से प्रारंभ होता है शिकारियों को बचाने का।
यहां सवाल बनता है कि चोर को मेमोरी कार्ड चुराने से क्या फायदा होगा। इसी तरह पूर्व में भी यहां से ट्रेप कैमरा चोरी हो चुकी है और प्रबंधन ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी लेकिन आज तक पुराने प्रकरण का कोई सुराग तक नहीं लगा। अचानकमार टाइगर रिजर्व की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है ?
अभी हाल ही में 5 जनवरी को वन्य जीव एक्टिविस्ट श्री नितिन सिंघवी ने अपर मुख्य सचिव वन जलवायु अधिकारी को एक पत्र लिखा है कि अचानकमार टाइगर रिजर्व में कोर श्रेत्र के भीतर शिकारियों ने घुसा था और केवल बिट गार्ड और डिप्टी रेंजर को शो काज नोटिस जारी कर अपनी कृत्य को छुपाने इतिश्री कर लिया है। जबकि कार्यवाही यू आर गणेश पर भी होनी चाहिए थी। और अब इस तरह मेमोरी कार्ड चोरी में बीट गार्ड और डिप्टी रेंजर को ही नोटिस जारी कर बलि का बकरा बनाने का कुत्सित प्रयास किया है जबकि प्रबंधन पर भी अयोग्यता का प्रश्न उठाता है फिर उच्च पदस्थ अधिकारी को क्यों बचाने में लगे है, चिंता का विषय है ?

Author Profile

Amit Mishra - Editor in Chief
Amit Mishra - Editor in Chief
Latest entries