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रिवर व्यू अटल स्मारक पर कविता की पंक्तियों को लेकर उठे सवाल, स्मार्ट सिटी प्रबंधन से तथ्यात्मक संशोधन की मांग

On: August 14, 2026 6:51 AM
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अटल स्मारक पर कविता की पंक्तियों को लेकर उठे सवाल, तथ्यात्मक संशोधन की मांग


बिलासपुर। (अमित मिश्रा संपादक वायरलेस न्यूज) रिवर व्यू में निर्माणाधीन अटल स्मारक पर अंकित कविता की पंक्तियों को लेकर साहित्यिक एवं ऐतिहासिक तथ्यात्मकता का सवाल उठाया गया है। शहर के वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यप्रेमी वर्ग ने नगर निगम बिलासपुर और स्मार्ट सिटी प्रबंधन से स्मारक पर अंकित पंक्तियों की तथ्यात्मक जाँच कराने का आग्रह किया है।
स्मारक पर अंकित पंक्तियां—
“क्या हार में, क्या जीत में,
किंचित नहीं भयभीत मैं।
कर्तव्य-पथ पर जो भी मिला,
यह भी सही, वो भी सही।।“
बताया गया है कि ये पंक्तियां प्रसिद्ध कवि एवं साहित्यकार डॉ. शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ की चर्चित कविता ‘वरदान माँगूँगा नहीं’ का हिस्सा हैं। हालांकि पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी अपने भाषणों में इन पंक्तियों का प्रभावशाली ढंग से उल्लेख करते रहे थे, लेकिन पंक्तियों के मूल रचनाकार डॉ. शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ हैं।
उद्घाटन से पहले संशोधन का आग्रह
मामले में नगर निगम एवं स्मार्ट सिटी प्रबंधन से आग्रह किया गया है कि यदि स्मारक पर इन पंक्तियों को अटल बिहारी वाजपेयी की मौलिक रचना के रूप में प्रदर्शित किया गया है, तो उद्घाटन से पूर्व इसकी आवश्यक तथ्यात्मक जाँच कर उचित संशोधन किया जाए।
इस संबंध में कहा गया है कि यह पहल किसी व्यक्ति या संस्था की आलोचना के उद्देश्य से नहीं, बल्कि बिलासपुर की प्रतिष्ठा, साहित्यिक विरासत और ऐतिहासिक तथ्यों की शुद्धता बनाए रखने की भावना से की जा रही है।


अटल जी के सम्मान में तथ्यात्मक शुद्धता जरूरी”


निवेदन में कहा गया है कि अटल बिहारी वाजपेयी जी के प्रति सम्मान सदैव अटूट रहा है। ऐसे में उनके नाम से निर्मित स्मारक पर अंकित प्रत्येक तथ्य प्रमाणिक और सही होना चाहिए। साहित्यिक रचनाओं के रचनाकार का सही उल्लेख करना न केवल साहित्यकार के प्रति सम्मान है, बल्कि स्मारक की गरिमा बनाए रखने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
अब देखना होगा कि नगर निगम बिलासपुर और स्मार्ट सिटी प्रबंधन इस विषय पर क्या कदम उठाते हैं और उद्घाटन से पहले स्मारक पर अंकित पंक्तियों के संबंध में तथ्यात्मक संशोधन किया जाता है या नहीं।

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Amit Mishra
Amit Mishra
अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

Amit Mishra

अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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