
“शुद्धिकरण” घटना – केवल मल्लिकार्जुन खड़गे का अपमान नहीं बल्कि देश के करोड़ों दलितों और वंचितों का अपमान : भगवानू

रायपुर, छत्तीसगढ़ , (वायरलेस न्यूज)15 अगस्त 2026। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा उत्तराखंड के हल्द्वानी में सभा किए जाने के पश्चात सभा स्थल का शुद्धिकरण किए जाने की घटना का दलगत राजनीति से ऊपर उठकर जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के मुख्य प्रवक्ता एवं अधिवक्ता भगवानू नायक ने कड़ी शब्दों में निंदा करते हुए कहा यह घटना अत्यंत दुखद और शर्मनाक है, यह अपमान केवल अकेले श्री मल्लिकार्जुन खड़गे का अपमान नहीं, बल्कि देश के 25 करोड़ दलितों और वंचित समाज का अपमान है । उन्होंने कहा शुद्धिकरण किसी स्थान का नहीं, बल्कि ऐसी सामंतवादी, जातिवादी और भेदभावपूर्ण सोच रखने वाले लोगों के मन-मस्तिष्क का होना चाहिए। श्री खड़गे केवल देश के सबसे एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल के अध्यक्ष नहीं बल्कि राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष, एक वयोवृद्ध और दलित समाज के सम्मानित नेता भी है जब ऐसे व्यक्तित्व का अपमान किया जा सकता है तब इस देश के करोड़ों गरीब, दलित, वंचित समुदाय के प्रति सामंतवादी लोगों की कैसी सोच होगी या घटना स्पष्ट रूप से उनके चाल, चरित्र और चेहरा को उजागर कर देती है ।
उन्होंने कहा भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता, सम्मान और गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार देता है। लोकतांत्रिक भारत में किसी व्यक्ति की जाति या सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर उसके स्पर्श अथवा उपस्थिति को अपवित्र मानना संविधान की मूल भावना के विपरीत है। उन्होंने कहा कि भारत का लोकतंत्र केवल चुनावों से मजबूत नहीं होगा, बल्कि सामाजिक समानता, भाईचारे और संवैधानिक मूल्यों के सम्मान से मजबूत होगा। जब तक जाति के नाम पर लोगों को बांटने और अपमानित करने की राजनीति जारी रहेगी, तब तक लोकतंत्र की जड़ें पूरी तरह मजबूत नहीं हो सकतीं।उन्होंने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने जिस समानता, स्वतंत्रता, बंधुता और सामाजिक न्याय के भारत का सपना देखा था, उसे साकार करना प्रत्येक राजनीतिक दल और नागरिकों की जिम्मेदारी है। किसी भी व्यक्ति के साथ जातिगत भेदभाव या सामाजिक अपमान को सामान्य घटना मानकर स्वीकार नहीं किया जा सकता। अधिवक्ता भगवानू नायक ने मांग की कि ऐसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच हो तथा दोषी पाए जाने वाले लोगों के विरुद्ध कानून के अनुरूप कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने कहा कि “भारत किसी जाति, धर्म या वर्ग विशेष का नहीं, बल्कि संविधान में विश्वास रखने वाले 140 करोड़ भारतीयों का देश है। यहां किसी व्यक्ति का सम्मान उसकी जाति से नहीं, बल्कि उसके नागरिक अधिकार और मानवीय गरिमा से तय होना चाहिए।”
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- अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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