79 साल के ‘बिहारी दादा’ का कमाल, स्कूटी से बिलासपुर से औरंगाबाद तक किया सफर

बस का 3400 रुपये किराया सुनकर लिया फैसला, 700 रुपये के पेट्रोल में पहुंच गए गांव; लौटकर अगले दिन आटा चक्की पर संभाला काम

बिलासपुर। (अमित मिश्रा संपादक वायरलेस न्यूज) उम्र भले ही 79 वर्ष हो, लेकिन जज्बा और जुनून आज भी युवाओं को मात देता है। बिलासपुर के कुड़ूदंड 27 खोली निवासी शिवसदन सिंह उर्फ ‘बिहारी दादा’ ने अपनी हिम्मत और आत्मनिर्भरता की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी हर कोई तारीफ कर रहा है। उन्होंने बिलासपुर से बिहार के औरंगाबाद जिले के गांव सल्वां तक का सफर अकेले स्कूटी चलाकर तय किया और फिर उसी स्कूटी से वापस बिलासपुर लौट आए।

बिहारी दादा की यह कहानी बताती है कि उम्र महज एक संख्या है। अगर इंसान के भीतर जज्बा, जुनून और आत्मविश्वास हो तो मंजिल तक पहुंचने से कोई रोक नहीं सकता। उनका हौसला निश्चित रूप से आज की युवा पीढ़ी के लिए भी प्रेरणा है।
बिहारी दादा के मुताबिक उन्हें कुछ दिन पहले गांव में पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने जाना था। इसके लिए वे बिलासपुर बस स्टैंड पहुंचे। बस संचालक ने उन्हें करीब 1700 रुपये किराया बताया। आने-जाने में करीब 3400 रुपये खर्च होने थे। इसके अलावा गांव तक आने-जाने का अलग खर्च भी था। यह सुनकर उन्होंने सोचा कि इतनी रकम खर्च करने के बजाय क्यों न अपनी स्कूटी से ही गांव पहुंचा जाए।
उन्होंने स्कूटी में करीब 700 रुपये का पेट्रोल भरवाया और पत्नी से रास्ते के लिए दो समय की रोटियां बनवाकर अगले दिन सुबह करीब 7 बजे गांव के लिए निकल पड़े।

रास्ते में कटघोरा के आगे पेड़ की छांव में उन्होंने रुककर भोजन किया और कुछ देर आराम करने के बाद फिर सफर शुरू कर दिया। शाम करीब 6 बजे अंबिकापुर से लगभग 40 किलोमीटर आगे एक ढाबे पर पहुंचे। वहां अपने साथ लाया भोजन किया और रात वहीं आराम किया। अगले दिन सुबह करीब 5 बजे फिर स्कूटी लेकर मंजिल की ओर रवाना हो गए।
लगातार सफर करते हुए दोपहर करीब 12 बजे वे औरंगाबाद पहुंचे और वहां से आगे बढ़कर दोपहर करीब 2 बजे अपने गांव सल्वां पहुंच गए। गांव पहुंचकर उन्होंने पारिवारिक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। तीन दिन बाद वे फिर उसी स्कूटी से बिलासपुर के लिए रवाना हुए और अगले दिन बिलासपुर पहुंच गए।
खास बात यह है कि लंबी दूरी का सफर तय करने के बावजूद बिहारी दादा ने आराम करने के बजाय अगले ही दिन अपनी आटा चक्की पर पहुंचकर रोज की तरह काम संभाल लिया।
30 साल से मेहनत के बल पर चला रहे परिवार
बिहारी दादा ईमानदारी और मेहनत पर विश्वास करते हैं। पिछले करीब 30 वर्षों से वे आटा चक्की चलाकर अपनी आजीविका चला रहे हैं। उनकी मेहनत और ईमानदारी से प्रभावित होकर 27 खोली निवासी एवं सीपत के पूर्व विधायक चंद्रप्रकाश बाजपेयी ने उन्हें अपनी दुकान निःशुल्क उपलब्ध कराई थी। इसी दुकान में आटा चक्की चलाकर वे आज भी अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं।
परिवार में पत्नी और दो बेटियां हैं। 79 वर्ष की उम्र में भी वे किसी पर निर्भर रहने के बजाय मेहनत करके जीवन जी रहे हैं।
Author Profile

- अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
Latest entries
छत्तीसगढ़October 23, 2026राष्ट्रपति के आगमन को बताया छत्तीसगढ़ का गौरव, विधायक पुरन्दर मिश्रा ने नुआखाई समारोह में दिया सेवा, संस्कार और समर्पण का संदेश
बिलासपुरOctober 22, 2026कोटा में कोल NOC पर मचा भारी बवाल दलालों की ‘फील्डिंग’ के खिलाफ सड़क पर उतरने को तैयार जनता,जनप्रतिनिधियों को दी चेतावनी
बिलासपुरOctober 21, 2026संजीवनी प्रभात शाखा के स्वयं सेवकों का नगर पथ संचलन कार्य सम्पन्न
अन्यOctober 21, 2026केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू की पहल से डोंगरगढ़–कटघोरा रेल परियोजना को आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त,रावघाट तक रेल पहुंचना छत्तीसगढ़ के रेल विकास में ऐतिहासिक उपलब्धि, नई परियोजनाओं से मजबूत होगी कनेक्टिविटी

