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जाने 40 वर्ष का पेड़, 1 साल में कंक्रीटीकरण से कैसे मारा जाता है, सत्य घटना की फोटो देंखें

On: August 19, 2026 11:37 AM

जाने 40 वर्ष का पेड़, 1 साल में कंक्रीटीकरण से कैसे मारा जाता है, सत्य घटना की फोटो देंखें

रायपुर/19 अगस्त।( वायरलेस न्यूज) अनुपम नगर, रायपुर की एक घटना यह गंभीर सवाल खड़ा करती है कि क्या हमारे नगरीय निकाय, जेन जी, जेन अल्फा और जेन बीटा के भविष्य के लिए गंभीर भी हैं? और क्या उन्हें वृक्ष संरक्षण के लिए जारी सरकारी निर्देशों की वास्तव में कोई चिंता है?

अगस्त 2025 की तस्वीर उस समय की है, जब अनुपम नगर में सड़क के फुटपाथ पर कंक्रीटीकरण का कार्य किया गया था। इस दौरान वहाँ मौजूद पेड़ों के तनों से चिपकाकर कंक्रीटीकरण किया गया। एक स्थान पर लगभग 40 वर्ष पुराने करंज के पेड़ के तने से भी चिपकाकर कंक्रीटीकरण कर दिया गया, जिससे पेड़ के आसपास की खुली मिट्टी और प्राकृतिक जल-प्रवेश क्षेत्र समाप्त हो गया। अगस्त 2026 की तस्वीर में, यानी लगभग एक वर्ष बाद, उसी स्थान का वही 40 वर्ष पुराना करंज का पेड़ जमीन से उखड़ा हुआ दिखाई दे रहा है। दोनों तस्वीरों के बीच का यह मात्र एक वर्ष का अंतर वृक्षों के आसपास किए जा रहे कंक्रीटीकरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

क्या होता है कंक्रीटीकरण और पेवर लगाने से

कंक्रीट और पेवर से पेड़ के आसपास की खुली मिट्टी ढक जाने से वर्षाजल का मिट्टी में प्रवेश कम हो जाता है और मिट्टी में जड़ों के लिए आवश्यक पानी तथा ऑक्सीजन की उपलब्धता प्रभावित हो जाती है। पेड़ कुछ समय तक बाहर से स्वस्थ दिखाई दे सकता है, लेकिन धीरे-धीरे उसकी जड़ें कमजोर हो सकती हैं और अंततः वह सूखने या हवा में गिरने के खतरे में आ सकता है। अनुपम नगर का यह पेड़ तब गिरा जब हवा भी तेज नहीं थी।

प्रतिबन्ध के बावजूद भी वर्षो वृक्षों के चारों ओर कंक्रीटीकरण और पेवर लगाए

रायपुर निवासी नितिन सिंघवी ने बताया कि वर्ष 2019 में ही वृक्षों के चारों ओर कंक्रीटीकरण और पेवर लगाने की समस्या पर उन्होंने शासन का ध्यान आकर्षित किया था। इसके बाद 21 नवंबर 2019 को नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा सभी नगरीय निकायों को निर्देश दिए गए थे कि वृक्षों के चारों ओर लगभग एक मीटर क्षेत्र में किए गए कंक्रीट/पेवर को हटाया जाए और भविष्य में वृक्षों के चारों ओर कंक्रीट/पेवर, सुधार कार्य या निर्माण कार्य एक मीटर तक न किया जाए। 2025 में ओक्सिज़ोन रायपुर में पेड़ों के चारों तरफ पांच फीट की दीवाल बनाने की भी शिकायत की गई थी। इसके बावजूद भी वृक्षों के बाजू में कंक्रीट/पेवर का काम बदस्तूर जारी रहा। इसका एक दूसरा गंभीर नुकसान यह है कि इससे वर्षाजल का जमीन में प्रवेश कम होता है, जिससे ग्राउंड वाटर रिचार्ज की समस्या और बढ़ती है। सिंघवी ने पूछा कि जब शासन से प्रतिबन्ध लागू कर दिया गया था तो ये कंक्रीटीकरण क्यों किया गया?

यूरोप हटा रहा है कंक्रीट और पेवर

सिंघवी ने कहा कि यह केवल रायपुर की समस्या नहीं है। जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान के दौर में बड़े और पुराने वृक्ष शहरों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। वे छाया देते हैं, तापमान कम करने में मदद करते हैं, कार्बन अवशोषित करते हैं और शहरों को रहने योग्य बनाते हैं।

सिंघवी ने कड़े शब्दों में कहा कि जो दिन में आठ घंटे विकास के बारे में सोचते हैं और रात में आठ घंटे विकास के सपने देखते हैं, उन्हें यह बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि कोई भी विकास विनाश की कीमत पर ही हासिल किया जा सकता है। यदि विकास के नाम पर शहर के पुराने और बड़े वृक्षों को ही कमजोर कर दिया गया, मार दिया गया, तो आने वाले समय में इसकी कीमत रायपुर की जनता को चुकानी पड़ेगी।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार की लापरवाही का खामियाजा रायपुर की जनता को बहुत दूर भविष्य में नहीं, बल्कि अगले वर्ष 2027 से ही महसूस हो सकता है। जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते तापमान, कम होती छाया और बढ़ते Urban Heat Island Effect के बीच पुराने वृक्षों का नुकसान सीधे शहर के पर्यावरण और नागरिकों के जीवन को प्रभावित करेगा। यूरोप जो अभी जलवायु संकट की अभी तक की सबसे बड़ी मार झेल रहा है, वहां के कई निकाय Urban Heat Island Effect की मार कम करने के लिए और पेड़ों को बचाने के लिए कंक्रीट और पेवर हटा रहे है।

सिंघवी ने कहा, मेरी इस बात को केवल एक अपील नहीं, बल्कि चेतावनी समझा जाए। विकास जरूरी है, लेकिन ऐसा विकास जो पेड़ों और पर्यावरण की कीमत पर हो, वह विकास नहीं बल्कि विनाश है।

सिंघवी ने इस मुद्दे पर मुख्य सचिव को पत्र लिख कर मांग की है कि सभी नगरीय निकायों में वृक्षों के चारों ओर किए गए कंक्रीटीकरण और पेवर को तत्काल पेड़ों की प्रजाती और जरुरत अनुरूप एक मीटर से तीन मीटर तक हटाया जाए तथा भविष्य में पेड़ों की जड़ों के आसपास किसी भी प्रकार का कंक्रीट या पेवर का अभेद्य निर्माण न किया जाए।
नितिन सिंघवी
9826126200

Author Profile

Amit Mishra
Amit Mishra
अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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