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NH-43 किनारे पोल्ट्री फार्म से दुर्गंध और प्रदूषण का आरोप, सरपंच ने कलेक्टर से की कार्रवाई की मांग

On: August 24, 2026 11:16 AM

NH-43 किनारे पोल्ट्री फार्म से दुर्गंध और प्रदूषण का आरोप, सरपंच ने कलेक्टर से की कार्रवाई की मांग

CPCB की गाइडलाइन में NH से 100 मीटर और आवासीय क्षेत्र से 500 मीटर दूरी का प्रावधान, अपशिष्ट के वैज्ञानिक निस्तारण पर भी जोर

मनेंद्रगढ़। (प्रशांत कुमार तिवारी वायरलेस न्यूज) नेशनल हाईवे-43 के किनारे संचालित गायकवाड़ प्राइवेट पोल्ट्री फार्म से निकलने वाली दुर्गंध एवं कथित प्रदूषण को लेकर ग्राम पंचायत भलौर के सरपंच धर्मपाल सिंह ने जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया है। सरपंच ने कलेक्टर एवं जिला एमसीबी को पत्र लिखकर पोल्ट्री फार्म की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग की है।


सरपंच के अनुसार पोल्ट्री फार्म से निकलने वाली दुर्गंध के कारण आसपास रहने वाले नागरिकों, राहगीरों एवं दुकानदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। फार्म से निकलने वाले अपशिष्ट के उचित निस्तारण नहीं होने से दुर्गंध बढ़ने के साथ आसपास के वातावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की शिकायत सामने आई है। किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचने संबंधी शिकायत का भी पत्र में उल्लेख किया गया है।

CPCB की गाइडलाइन में दूरी और प्रदूषण नियंत्रण के स्पष्ट प्रावधान

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की गाइडलाइन में नए पोल्ट्री फार्मों के लिए विभिन्न दूरी संबंधी मानदंड निर्धारित किए गए हैं। गाइडलाइन के अनुसार आवासीय क्षेत्र से लगभग 500 मीटर, प्रमुख जलस्रोत से 100 मीटर तथा राष्ट्रीय राजमार्ग से 100 मीटर की दूरी रखने का प्रावधान है।

गाइडलाइन में पोल्ट्री फार्मों से निकलने वाले बीट से दुर्गंध तथा मृत पक्षियों के निस्तारण के लिए भी पर्यावरण अनुकूल व्यवस्था करने पर जोर दिया गया है। अपशिष्ट को खुले में इस प्रकार नहीं रखा जाना चाहिए जिससे बारिश के पानी के साथ उसका बहाव हो अथवा दुर्गंध और प्रदूषण का प्रसार हो।

जल अधिनियम और वायु अधिनियम के तहत भी लागू होते हैं ।प्रावधान में पोल्ट्री फार्म से होने वाले संभावित जल एवं वायु प्रदूषण के मामले में जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 तथा वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के प्रावधान महत्वपूर्ण हैं। निर्धारित क्षमता से अधिक पक्षियों वाले पोल्ट्री फार्मों के लिए संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से आवश्यक कंसेंट टु एस्टेब्लिश (CTE) एवं कंसेंट टू ऑपरेट (CTO) की आवश्यकता होती है।
इसलिए फार्म की क्षमता, स्थापना की तारीख, स्थान और संबंधित अनुमतियों की जांच अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए।

जांच में कमियां मिलने का सरपंच का दावा

सरपंच धर्मपाल सिंह ने अपने पत्र में बताया है कि शिकायत के बाद जिला प्रशासन के अधिकारियों द्वारा जांच की गई। जिसमें पोल्ट्री फार्म से संबंधित कुछ कमियां पाए जाने का उल्लेख किया गया। इसके बाद फार्म संचालक को 15 दिनों के भीतर सुधारात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

जब प्रशासन से कार्रवाई के संबंध में जानकारी मांगी गई तो किसी भी प्रकार का स्पष्ट जवाब नहीं मिला, जिससे कि यह संदेह और गहरा हो जाता है कि जरूर पोल्ट्री फार्म के संचालन के संबंध में कोई बड़ी कमी जरूर है जिसकी जांच सूक्ष्म स्तर पर की जानी चाहिए।

सरपंच धर्मपाल ने अपने ऊपर पैसे की मांग करने संबंधी लगाए जा रहे आरोपों को भी पूरी तरह निराधार बताया है। और प्रशासन से गुहार लगाई है कि यदि जांच में किसी नियम या पर्यावरणीय प्रावधान का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाय।

यदि कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की गई तो एसडीएम कार्यालय का घेराव करने की भी बात उन्होंने कही है।

Author Profile

Amit Mishra
Amit Mishra
अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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