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भारी कौन…अंडे वाली मुर्गी या एसडीएम ?

On: September 20, 2026 6:15 AM

भारी कौन…अंडे वाली मुर्गी या एसडीएम ?

न्यायधानी के नेहरू चौक इलाके में इन दिनों बहस छिड़ी है—अंडे वाली का मुर्गी का प्रेम भारी है या एसडीएम की दखल?मामला दो दिग्गजों के सरकारी बंगलों के आसपास का बताया जाता है, जहां ठेले-खोमचे वालों में सबसे ज्यादा चर्चा एक अंडे वाली की है।

बताने वालों के मुताबिक, अंडे वाली ने ठेले से शुरू हुआ सफर धीरे-धीरे शासकीय आवास तक पहुंचा दिया। जब तक लोगों को अंडे का फंडा समझ आता, तब तक वह पार्किंग के साथ कुछ खास दिलों में भी जगह बना चुकी थी।

उसकी मौजूदगी से बाकी ठेले वालों का मनोबल भी बढ़ा। कुछ ठेले पार्किंग में टिकने लगे और सरकारी आवास के आसपास कारोबार को आत्मनिर्भरता का नया मॉडल मानने लगे।
आखिरकार प्रहरियों ने एसडीएम साहब को इस अतिक्रमण की जानकारी दी। एसडीएम ने मुर्गी… माफ कीजिए, अंडे वाली को नोटिस थमा दिया।

यहीं से कहानी में ट्विस्ट आया। खबर बॉस तक पहुंची तो बताया जाता है कि एसडीएम को हटाने के लिए सीएम हाउस तक मोबाइलों में बोधज्ञान की घंटियां बजने लगीं। किसी तरह मामला शांत हो गया।

मगर सवाल अब भी तैर रहा है—अंडे देने वाली मुर्गी में ज्यादा दम है या एसडीएम में?

प्रशासनिक गलियारों में नया शोध विषय है—अतिक्रमण जमीन पर हो तो कार्रवाई, लेकिन दिल में हो जाए तो नोटिस किसे दिया जाए?

यही न्यायधानी का नया अंडा सिद्धांत है—

ठेला सड़क पर हो तो अतिक्रमण,
पार्किंग में हो तो प्रबंधन,
और दिल में हो तो… मामला संवेदनशील!

अब देखना है जीत किसकी होती है—अंडे वाली के प्रेम की, बॉस के प्रभाव की या एसडीएम के कानून की!

Author Profile

Amit Mishra
Amit Mishra
अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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