एक कटोरी पानी में दिखी प्रकृति की 62 रंग-बिरंगी तस्वीरें
राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह पर पक्षियों के लिए पानी रखने की अनूठी पहल

(अमित मिश्रा संपादक वायरलेस न्यूज) भारत में हर वर्ष 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह मनाया जाता है। इसका उद्देश्य केवल वन्यजीवों के संरक्षण की बात करना नहीं, बल्कि प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति समाज में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना पैदा करना भी है।
पिछली गर्मियों में वन्यजीव प्रेमी इमरान खान ने एक ही पानी के बर्तन पर 62 अलग-अलग प्रजातियों के पक्षियों को रिकॉर्ड किया।
इसी भावना को अपने जीवन का हिस्सा बनाते हुए पेंच नैशनल पार्क के वन्यजीव प्रेमी इमरान खान और उनकी टीम हर वर्ष गर्मियों के दिनों में अपने गांव पेंच और उसके आसपास के अलग-अलग स्थानों पर पक्षियों के लिए पानी से भरे बर्तन रखते हैं। गर्मी के मौसम में पानी की तलाश में भटकने वाले इन नन्हे जीवों के लिए एक छोटा-सा पानी का पात्र भी जीवन बचाने का माध्यम बन सकता है।
सबसे खास बात यह है कि इन पानी के पात्रों के आसपास प्रकृति का ऐसा अद्भुत संसार दिखाई देता है, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। एक ही पानी के बर्तन पर अलग-अलग रंगों और प्रजातियों के पक्षी अपनी प्यास बुझाने पहुंचते हैं। उन्हें करीब से देखना किसी वन्यजीव प्रेमी के लिए अपने आप में एक अद्भुत आनंद है।

पिछली गर्मियों में वन्यजीव प्रेमी इमरान खान ने एक ही पानी के बर्तन पर 62 अलग-अलग प्रजातियों के पक्षियों को रिकॉर्ड किया। उन्होंने बताया कि यह अनुभव मेरे लिए केवल पक्षियों की तस्वीरें या वीडियो बनाने तक सीमित नहीं था, बल्कि यह इस बात का प्रमाण था कि प्रकृति के लिए किया गया एक छोटा-सा प्रयास भी कितने बड़े परिणाम दे सकता है।
वन्यजीव संरक्षण केवल जंगलों और अभयारण्यों तक सीमित नहीं है। हमारे घरों, खेतों, बगीचों और आसपास के प्राकृतिक वातावरण में आने वाले पक्षियों और छोटे जीवों की रक्षा करना भी हमारी जिम्मेदारी है।
इस राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह पर मेरा आप सभी से आग्रह है कि आने वाली गर्मियों में अपने घर, आंगन, छत या बगीचे में पक्षियों के लिए एक छोटा-सा पानी का बर्तन जरूर रखें। हो सकता है उस एक बर्तन से किसी प्यासे पक्षी की जिंदगी बच जाए और आपके सामने प्रकृति का ऐसा खूबसूरत संसार आ जाए, जिसे देखकर आपका मन भी आनंद से भर उठे।
प्रकृति को बचाने के लिए हमेशा बड़े कदम जरूरी नहीं होते—कभी-कभी एक छोटा-सा पानी का बर्तन भी बहुत बड़ा काम कर जाता है।
पक्षियों की चहचहाहट और उनके रंगों में छिपी प्रकृति की खूबसूरती को वही व्यक्ति पूरी तरह समझ सकता है, जिसका दिल वन्यजीवों और प्रकृति के लिए धड़कता है।
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- अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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