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फैसला वन विभाग के पक्ष में, फिर भी वनभूमि पर अतिक्रमण का खतरा!न्यायालयीन प्रकरण में विभाग के पक्ष में स्थिति स्पष्ट होने के बावजूद कार्रवाई में देरी पर उठ रहे गंभीर सवालअब किसके इंतजार में वन विभाग?

On: October 8, 2026 6:41 AM

खुड़िया रेंज की वनभूमि पर फिर मंडराया अतिक्रमण का खतरा


जाली तार क्षतिग्रस्त करने का आरोप, न्यायालयीन फैसला विभाग के पक्ष में होने के बावजूद कार्रवाई लंबित होने पर उठे सवाल

बिलासपुर ( वायरलेस न्यूज) मुंगेली वनमंडल की खुड़िया रेंज के प्लाट नंबर-01, कक्ष क्रमांक-1523 में वनभूमि की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। वनभूमि की सुरक्षा के लिए लगाए गए जाली तार को कुछ स्थानीय लोगों द्वारा कथित रूप से क्षतिग्रस्त किए जाने का मामला सामने आया है। जाली तार क्षतिग्रस्त होने से वनभूमि की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं और क्षेत्र में दोबारा अतिक्रमण की आशंका जताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि उक्त वनभूमि से जुड़े न्यायालयीन प्रकरण में वन विभाग के पक्ष में फैसला हो चुका है तथा संबंधित दावा-आपत्तियां भी खारिज हो चुकी हैं। इसके बावजूद वनभूमि से बेदखली और आगे की कार्रवाई अब तक लंबित होने की बात कही जा रही है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि न्यायालयीन प्रक्रिया में विभाग के पक्ष में स्थिति स्पष्ट होने के बाद भी मौके पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो पा रही है।
निरीक्षण व्यवस्था पर भी उठे सवाल
मामले में स्थानीय स्तर पर मुंगेली डीएफओ के फील्ड निरीक्षण तथा संबंधित एसडीओ की मौके पर मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर से एसडीओ के बिलासपुर से आवागमन किए जाने की शिकायत सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि इन शिकायतों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
वनभूमि की सुरक्षा से जुड़ा मामला होने के कारण अब पूरे प्रकरण में उच्चस्तरीय जांच और मौके के वास्तविक हालात का निरीक्षण कराने की मांग उठ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जाली तार क्षतिग्रस्त होने के बाद समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वनभूमि पर दोबारा अतिक्रमण की स्थिति पैदा हो सकती है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वन विभाग इस मामले में मौके का निरीक्षण कर क्या कार्रवाई करता है और न्यायालयीन स्थिति स्पष्ट होने के बावजूद लंबित बेदखली की प्रक्रिया कब आगे बढ़ती है। स्थानीय स्तर पर पूरे मामले की पीसीसीएफ स्तर से जांच और स्थल निरीक्षण की मांग भी सामने आ रही है।

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Amit Mishra
Amit Mishra
अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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