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रिश्वतखोरी के मामलों में राजस्व विभाग टॉप पर, स्कूल शिक्षा दूसरे नंबर पर,ACB-EOW के आंकड़ों में खुलासा, पांच साल में 154 ट्रैप प्रकरणों में 193 अधिकारी-कर्मचारी पकड़े गए; 51.67 लाख रुपये से अधिक की रिश्वत राशि,एसईसीएल, आबकारी,एनटीपीसी और परिवहन विभाग में रिश्वत नहीं

On: October 28, 2026 12:16 PM

रिश्वतखोरी के मामलों में राजस्व विभाग टॉप पर, स्कूल शिक्षा दूसरे नंबर पर


ACB-EOW के आंकड़ों में खुलासा, पांच साल में 154 ट्रैप प्रकरणों में 193 अधिकारी-कर्मचारी पकड़े गए; 51.67 लाख रुपये से अधिक की रिश्वत राशि

एसईसीएल, आबकारी,एनटीपीसी और परिवहन विभाग में रिश्वत नहीं


बिलासपुर/रायपुर। ( वायरलेस न्यूज छत्तीसगढ़) छत्तीसगढ़ में सरकारी कामकाज के बदले रिश्वत मांगने के मामलों में राजस्व विभाग सबसे आगे है। स्कूल शिक्षा विभाग दूसरे और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तीसरे स्थान पर है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) एवं आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) से संबंधित आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी 2021 से 28 मई 2026 तक प्रदेश में रिश्वतखोरी के 154 ट्रैप प्रकरण दर्ज किए गए। इन मामलों में 193 शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। दर्ज आंकड़ों में रिश्वत की कुल राशि 51 लाख 67 हजार 540 रुपये बताई गई है।
राजस्व विभाग में सबसे ज्यादा 56 मामले
विभागवार आंकड़ों के अनुसार, राजस्व विभाग में रिश्वतखोरी के 56 ट्रैप प्रकरण दर्ज किए गए, जिनमें 67 अधिकारी-कर्मचारी शामिल थे। स्कूल शिक्षा विभाग में 20 प्रकरणों में 25 लोगों, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में 14 प्रकरणों में 15 लोगों तथा पुलिस विभाग से जुड़े 10 प्रकरणों में 13 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
इसके अलावा नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग में सात प्रकरण दर्ज किए गए। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग में छह मामले सामने आए। ये आंकड़े सरकारी कामकाज के बदले रिश्वत मांगने की शिकायतों पर की गई ट्रैप कार्रवाई से संबंधित हैं।
वर्ष 2025 में सबसे ज्यादा ट्रैप कार्रवाई
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 में 13 ट्रैप प्रकरणों में 14 अधिकारी-कर्मचारियों को पकड़ा गया। वर्ष 2022 में 13 प्रकरणों में 18 लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई। वर्ष 2023 में कोई ट्रैप प्रकरण दर्ज नहीं हुआ।
वर्ष 2024 में 44 प्रकरणों में 57 अधिकारी-कर्मचारियों को पकड़ा गया, जबकि वर्ष 2025 में 60 प्रकरणों में 71 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई। वर्ष 2026 में 28 मई तक 24 प्रकरण दर्ज हुए, जिनमें 33 अधिकारी-कर्मचारियों को पकड़ा गया।
इस तरह पांच वर्षों से अधिक की अवधि में कुल 154 ट्रैप प्रकरणों में 193 लोगों के खिलाफ कार्रवाई दर्ज की गई।
निर्माण भुगतान और जमीन संबंधी कामों में रिश्वत की शिकायतें
रिपोर्ट में सरकारी कार्यों के बदले रिश्वत मांगने के विभिन्न मामले भी सामने आए हैं। इनमें निर्माण कार्यों का भुगतान कराने, जमीन का सीमांकन, नामांतरण, राजस्व रिकॉर्ड में सुधार, मुआवजा राशि दिलाने तथा पेंशन और ग्रेच्युटी जारी कराने जैसे काम शामिल हैं।
ये ऐसे कार्य हैं, जिनके लिए आम नागरिकों, किसानों, कर्मचारियों और ठेकेदारों को सरकारी कार्यालयों से संपर्क करना पड़ता है। इन कार्यों के बदले रिश्वत मांगने की शिकायतें प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े करती हैं।
जिलावार आंकड़ों में सूरजपुर सबसे आगे
जिलावार विवरण के अनुसार, सूरजपुर में सबसे अधिक 16 ट्रैप प्रकरण दर्ज किए गए। रायपुर में 13, सरगुजा में 12 और रायगढ़ में 11 मामले सामने आए। मुंगेली और बिलासपुर में आठ-आठ प्रकरण दर्ज किए गए। वहीं दुर्ग, बलरामपुर और जांजगीर-चांपा में सात-सात प्रकरण सामने आए।
भ्रष्टाचार पर कार्रवाई और जवाबदेही जरूरी
आंकड़े बताते हैं कि रिश्वतखोरी के खिलाफ कार्रवाई के दौरान राजस्व और स्कूल शिक्षा जैसे विभागों में सबसे अधिक ट्रैप प्रकरण दर्ज हुए। सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाने, शिकायतों की निष्पक्ष जांच करने और दोषियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया को प्रभावी बनाने की आवश्यकता बनी हुई है।

किन किन कार्यों के लिए मांगी गई रिश्वत इसके अलावा महिला एवं बाल विकास विभाग, कृषि विभाग, आवास एवं पर्यावरण विभाग, खाद्य विभाग, आदिम जाति कल्याण विभाग, उच्च शिक्षा विभाग,  पी डब्लू डी, प्रत्येक में 2- 2प्रकरण सामने आए हैं, वहीं पशु चिकित्सा, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, पासपोर्ट, वित्त विभाग, वाणिज्य कर, एसईसीएल, आबकारी विभाग, एनटीपीसी और परिवहन विभाग प्रत्येक में एक एक प्रकरण दर्ज़ किया गया है।

निर्माण कार्य का भुगतान, जमीन सीमांकन कार्य, जमीन नामांतरण, राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त, मुवावजा राशि दिलाने, पेंशन – ग्रेज्युजी जारी करने, निर्माण कार्य का भौतिक सत्यापन करने, बिजली कनेक्शन कार्य के एवज में, जमीन का चौहद्दी बनाने, ऋण पुस्तिका बनाने, लंबित एरियर्स राशि के भुगतान करने, RTE के तहत प्रवेशित बच्चों की राशि क्लेम, खसरा एवं नक्शा बटवारा, यात्रा भत्ता राशि भुगतान, वेतन आहरण, अंतरजातीय विवाह करने पर प्रोत्साहन राशि, अंतिम वेतन प्रमाण पत्र एवं सेवा पुस्तिका देने, आपराधिक प्रकरण नहीं बनाने, एवं केश को रफा दफा करने सहित अन्य शासकीय कार्य के लिए रिश्वत मांगी गई।

विभाग एवं संस्थान जिनमें रिश्वत के प्रकरण कम


हालांकि, ट्रैप कार्रवाई में पकड़े जाने और न्यायालय से दोषसिद्ध होने के बीच अंतर है। इसलिए इन आंकड़ों को रिश्वतखोरी के मामलों में हुई कार्रवाई के रूप में देखना उचित होगा। साभार हरिभूमि.

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Amit Mishra
Amit Mishra
अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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