🇮🇳Odia
अन्तर्राष्ट्रीय अपराध खेल जगत छत्तीसगढ़ धर्म-कला-संस्कृति बिलासपुर मध्य प्रदेश महाराष्ट्र राष्ट्रीय रेलवे साक्षात्कार हाईकोर्ट अन्य

परिवार में शासकीय सेवक हैं तो भी अनुकंपा नियुक्ति से नहीं किया जा सकता वंचित, हाईकोर्ट ने कहा – ….

On: July 25, 2021 4:40 AM

बिलासपुर(वायरलेस न्यूज़) मृत प्रधान पाठक के पुत्र की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव, रायगढ़ डीईओ और तमनार बीईओ को 90 दिनों के भीतर पुनः जाँच कर याचिकाकर्ता के अनुकम्पा नियुक्ति के आवेदन के सम्बन्ध में नया आदेश जारी करने के निर्देश दिए हैं। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड के ग्राम झरियापाली निवासी नरेंद्र साहू ने अपने वकील अनादि शर्मा और नरेंद्र मेहर के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि उनके पिता जगदीश साहू प्रधान पाठक के पद पर शासकीय माध्यमिक शाला रेंगालबहरी में पदस्थ थे। कार्य के दौरान 20 दिसंबर 2020 को उनका निधन हो गया। इस पर उनके बेटे नरेंद्र साहू ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए विभाग में आवेदन प्रस्तुत किया। उनके आवेदन को जिला शिक्षा अधिकारी ने यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि उनके भाई शासकीय सेवा में है। जिला शिक्षा अधिकारी के इस निर्णय को उन्होंने अधिवक्ता अनादि शर्मा और नरेंद्र मेहर के माध्यम से हाईकोर्ट में चुनौती दी। इसमें बताया गया कि याचिकाकर्ता दो भाई व एक बहन हैं, सभी विवाहित हैं। उसका भाई आरईओ के पद पर पदस्थ है, जो अपने परिवार के साथ उनसे अलग रहता है। जबकि याचिकाकर्ता अपनी मां, दादा, पत्नी और बच्चे के साथ अलग रहता है। शासकीय सेवक भाई द्वारा यााचिकाकर्ता के परिवार को कोई आर्थिक सहायता नहीं दी जाती है। पिता के निधन के समय व पूर्व से याचिकाकर्ता पूरी तरह अपने पिता पर ही आश्रित थे, लेकिन तमनार ब्लॉक शिक्षाधिकारी और रायगढ़ जिला शिक्षाधिकारी ने आवेदक के आवेदन को बिना जांच पड़ताल के सिर्फ भाई के शासकीय सेवा में होने को आधार मानकर आवेदनपत्र निरस्त कर दिया। इस मामले की सुनवाई जस्टिस पी सैम कोशी की सिंगल बेंच में हुई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने आदेशित किया कि आवेदन पत्र पर निर्णय करने से पहले यह जांच करना जरूरी है कि अगर परिवार का कोई सदस्य शासकीय सेवा में है तो वह अलग रह रहा है या साथ में रहता है। वह आर्थिक मदद करता है या नहीं। इसी तरह आवेदन करने वाला मृतक पर आश्रित था या नहीं। इन बिन्दुओं की जांच किए बिना आवेदन पत्र निरस्त करना अवैधानिक है। जस्टिस पी सैम कोशी ने जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश को निरस्त कर दिया है। साथ ही उनके आवेदन पत्र को दोबारा जिला शिक्षा अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करने और जिला शिक्षा अधिकारी को प्रकरण की जांच कर इसका विधिवत निराकरण करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने आदेश में कहा है कि अनुकंपा नियुक्ति के नियम के अनुसार यदि परिवार का कोई सदस्य शासकीय सेवा में है तो उसे अनुकंपा नियुक्ति की पात्रता नहीं होगी। लेकिन सिर्फ परिवार के सदस्य शासकीय सेवक हैं इसे आधार मानकर आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। ऐसे प्रकरणों में निर्णय लेने के पूर्व यह जांच करना जरूरी है कि शासकीय सेवक परिवार को किसी प्रकार की आर्थिक सहायता कर रहा है या नहीं। जस्टिस पी सैम कोशी ने रायगढ़ डीईओ को 90 दिवस के भीतर अनुकंपा नियुक्ति आवेदन का पुनः जांच कर विधिवत निराकरण करने का आदेश जारी किया है।

Author Profile

Amit Mishra
Amit Mishra
अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
Latest entries

Join WhatsApp

Join Now

Join Facebook

Join Now

Leave a Comment