बिलासपुर (वायरलेस न्यूज़) सूरजपुर जिले के भैयाथान ब्लॉक में शासकीय प्राथमिक शाला नवापारा में सहायक शिक्षक के पद पर सेवा कर रहे श्री अनिल कुमार साहू की याचिका पर हाईकोर्ट ने अपने आखिरी फैसले तक उत्तरवादी जनपद पंचायत सीईओ को किसी भी प्रकार का अन्तिम निर्णय लेने पर रोक लगाते हुए जवाब तलब किया है।

श्री अनिल कुमार साहू की प्रारम्भिक नियुक्ति मई 2009 को हुई थी, इनकी सेवाओं का संविलियन माह सितम्बर 2018 में स्कूल शिक्षा विभाग में हुआ था किन्तु अप्रैल 2016 किसी राजेश कुमार नामक व्यक्ति की झूठी शिकायत पर जनपद पंचायत भैयाथान के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा एक कारण बताओ सूचनापत्र जारी कर उनकी नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों सहित उपस्थित होने का नोटिस दिया गया था, ताकि उनके दस्तावेजों के सत्यापन की जाँच की जा सके। 14 अप्रेल को जनपद सीईओ ने उक्त शिकायतकर्ता राजेश कुमार को एक रिपोर्ट पत्र भेजा कि अनिल साहू सेवा नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों में कोई कूटरचना नहीं पाई गई। के
इसी प्रकार माह जुलाई 2017 में भी किसी दीपक साहू की झूठी शिकायत पर खण्ड शिक्षा अधिकारी भैयाथान ने भी एक नोटिस श्री अनिल साहू के विरुद्ध जारी कर दिया था, लेकिन जाँच पश्चात् अगस्त 2017 में जाँच रिपोर्ट भैयाथान के एसडीओ के समक्ष पेश किया गया, जिसमें यह शिकायत भी सही नहीं पाये जाने का प्रतिवेदन दिया गया। इसी तरह दिसम्बर 2019 में भी अनिल साहू के दस्तावेजों के सत्यापन हेतु गठित कमेटी द्वारा भी इन सभी शिकायतों को झूठा और बनावटी पाया गया। इसके बाद शिकायतकर्ता को चेतावनी भी दी गई थी कि वह इस प्रकार के झूठे और बनावटी शिकायत दर्ज न करावे।
श्री अनिल साहू के विरुद्ध किए गए तमाम शिकायतों को सूरजपुर के जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से जाँच पश्चात् गलत ओर अवैध पाए जाने संबंधी पत्र व्यवहार भी जिला पंचायत सूरजपुर के सीईओ को किया जा चुका था।
एक ही वाद कारण के लिए जाँच और पूछताछ के नाम पर 08-10 बार बुलवा लिए जाने से तंग आकर श्री अनिल साहू ने हाईकोर्ट अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी के माध्यम से एक रिट याचिका दायर की, जिसमें मुख्य आधार लिया गया कि सर्वप्रथम तो जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी की न्यायिक क्षेत्राधिकारिता उस सहायक शिक्षक के मामले में नहीं है, जिसका संविलियन स्कूल शिक्षा विभाग में हो चुका हो तथा दूसरी यह कि इस याचिकाकर्ता अनिल साहू को जाँच और पूछताछ के लिए पहली बार नहीं बुलाया गया था, बल्कि एक ही वाद कारण के लिए उसे अनेक बार बुलवाया जा चुका था। याचिकाकर्ता की नौकरी पेशा जीवन को बुरी तरह बाधित करने के कृत्य को भी याचिकाकर्ता के वकील ने आधार बनाया।
‘माननीय उच्च न्यायालय में इस याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति श्री जस्टिस पी. सैम कोशी की बेन्च ने उत्तरवादियों को नोटिस कर जवाब तलब किया तथा आदेशित किया कि कारण बताओ सूचना पत्र पर चल रही कार्यवाहियों में किसी भी प्रकार का अन्तिम निर्णय इस न्यायालय के फैसले से बाधित होगा।
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