छत्तीसगढ़ी को 8 वीं अनुसूची में शामिल करवाने हेतु सांसद श्री साव को सौंपा गया ज्ञापन
बिलासपुर (वायरलेस न्यूज ) । संस्कार भारती द्वारा आयोजित आजादी का अमृत पर्व में मुख्य अतिथि के रुप में पधारे बिलासपुर लोकसभा सांसद एवं भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष श्री अरुण कुमार साव को 8 वीं अनुसूची में राजभाषा छत्तीसगढ़ी को शामिल करवाने हेतु डॉ. विनय कुमार पाठक पूर्व अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के मार्गदर्शन में आयोग के जिला समन्वयक डॉ. विवेक तिवारी एवं तुलसी साहित्य समिति के अध्यक्ष डॉ. राघवेन्द्र दुबे द्वारा ज्ञापन सौंपा गया।
विदित है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 344(1) और 351 के अनुसार, आठवीं अनुसूची में 22 भाषाओं को मान्यता दी गई है, ये भाषाएं संविधान की आठवीं अनुसूची में संरक्षित हैं। प्रदेश में छत्तीसगढ़ी भाषा का व्यवहार करने वालों की संख्या लगभग 2 करोड़ से अधिक है। लेकिन अभी तक छत्तीसगढ़ी भाषा को आठवीं अनुसूची में मान्यता नहीं मिल पाई है। छत्तीसगढ़ी का सुव्यवस्थित व्याकरण हीरालाल काव्योपाध्याय द्वारा सन् 1890 में प्रकाशित किया गया इसके बहुत वर्षां बाद हिन्दी का व्याकरण पं. कामता प्रसाद गुरु द्वारा सन् 1910 में प्रकाशित हुआ जो कि छत्तीसगढ़ी के भाषाई सामर्थ्य की महत्ता को दर्शाता है। पृथक छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के पश्चात् 28 नवंबर 2007 को छत्तीसगढ़ी, हिंदी के बाद राजभाषा के रुप में विधानसभा द्वारा स्वीकृत की गई। छत्तीसगढ़ी अपनी लगभग 34 उपबोलियों के साथ राज्य के बहुसंख्य लोगों द्वारा व्यवहार में लाई जाने वाली भाषा है। यह लोकव्यवहार और सामान्य कार्यालयीन कार्यों में प्रयुक्त की जा रही है। छत्तीसगढ़ी के विद्वानों और साहित्यकारों द्वारा लगातार छत्तीसगढ़ी साहित्य के भंडार में नित नवीन साहित्य रचा जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के पश्चात् से ही छत्तीसगढ़ी को संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित करने हेतु छत्तीसगढ़ शासन द्वारा विभिन्न अवसरों पर विधानसभा में शासकीय-अशासकीय प्रस्ताव प्रस्तुत किये गये हैं, तथा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, सासंदों, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग तथा अन्य अशासकीय समितियों ने विभिन्न माध्यमों से इस महत्वपूर्ण कार्य हेतु प्रयास किए है, किंतु अभी तक छत्तीसगढ़ी को 8 वीं अनुसूची में स्थान नहीं मिल पाया है। इस हेतु सांसद श्री अरुण साव को आज ज्ञापन सौंपा गया हैं।
इस ज्ञापन पर छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के जिला समन्वय डॉ. विवेक तिवारी, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राघवेन्द्र दुबे, इंजी ए.के. यदु, सनत तिवारी, डॉ. विश्वनाथ कश्यप, राजेश सोनार, डॉ. आनंद कश्यप, अशरफीलाल सोनी, डॉ. अनिता सिंह, बजरंग शर्मा, रश्मिलता मिश्रा, संगीता बनाफर, बालमुकुंद श्रीवास, आशुतोष दुबे, मनोहरदास मानिकपुरी, दीनदयाल यादव, बी.आर. कौशिक, संतोष शर्मा, दिनेश पाण्डेय, शुकदेव कश्यप, दिनेश तिवारी, रामरतन श्रीवास ने अपने हस्ताक्षर किये। इस अवसर पर नगर के गणमान्य नागरिक गण उपस्थित थे।
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- अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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