निर्धन बच्चों के भविष्य को शिक्षा से जोड़ने का अनूठा प्रयास शुरू किया लायंस क्लब
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बिलासपुर (वायरलेस न्यूज) समाज सेवा के क्षेत्र में अग्रणी संस्था लायंस इंटरनेशनल के अंतर्गत लायंस क्लब बिलासपुर संगम एक अनूठा कार्यक्रम प्रारंभ किया है जिसमें जो बच्चे पुस्तक कॉपी नहीं खरीद सकते उन्हें लायंस क्लब बिलासपुर संगम सहयोग कर शिक्षा दिलाने का बीड़ा उठाया है
पुस्तक – कॉपी दान , पुरानी कॉपियां पुस्तकें दान करे और शिक्षा की ओर एक कदम बढ़ाए
लायंस क्लब बिलासपुर संगम का अभियान
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नया शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होने वाला है। ऐसे में आइए, हम सभी शिक्षा के इस पुनीत कार्य में अपना सहयोग दें। हमारे घरों में रखी पुरानी कॉपियों के बचे हुए उपयोगी पन्नों से नई कॉपियाँ तैयार की जा सकती हैं, जो उन बच्चों के लिए बेहद उपयोगी होंगी जो कॉपी खरीदने में असमर्थ हैं।यह अभियान चलाया है लायंस क्लब बिलासपुर संगम के द्वारा जिसके लिए शहर में अपने काउंटर दिए गए है जहाँ लोग अपनी इन पुरानी पुस्तक कॉपियों को छोड़ सकते है, यह काउंटर है श्री गुरनानक वस्त्रालय मुंगेली नाका , विजय स्टोर्स सदर बाजार, राजेश बुक डिपो गोल बाजार, व ट्रिनिटी कंप्यूटर कुबेर प्लाजा, अग्रसेन चौक, बिलासपुर में संपर्क कर दे सकते है क्लब इन्हें एकत्र कर स्कूल खुलने के दिन ही वितरित करेंगे।क्लब के अध्यक्ष लायन अश्विनी यादव ने कहा कि पुरानी कॉपियां -पुस्तकें को रद्दी नहीं, किसी बच्चे के भविष्य का आधार बनाएं। कॉपी और पुस्तकों का दान शिक्षा और ज्ञान के प्रसार का सबसे सशक्त माध्यम है। यह जरूरतमंद छात्रों को सशक्त बनाता है, संसाधनों का सदुपयोग सुनिश्चित करता है, और पर्यावरण संरक्षण में मदद करता है।पुस्तकों और कॉपी (नोटबुक्स) के दान का महत्व इन बिंदुओं से समझा जा सकता है:समान शिक्षा तक पहुँच: जो छात्र आर्थिक तंगी के कारण नई किताबें या कॉपियाँ नहीं खरीद सकते, उनके लिए दान की गई सामग्री ज्ञान का प्रकाश लाती है।आत्मविश्वास में वृद्धि: सही समय पर आवश्यक अध्ययन सामग्री मिलने से गरीब व जरूरतमंद विद्यार्थियों का शैक्षणिक प्रदर्शन सुधरता है और उनका आत्मविश्वास बढ़ता है।पर्यावरण संरक्षण और पुनर्चक्रण: पुरानी कॉपी और किताबों को कबाड़ में फेंकने या कचरे में जाने से रोकना पर्यावरण के लिए बेहद फायदेमंद है। इसके पुन: उपयोग (Reuse) से कागज की खपत कम होती है।ज्ञान का विस्तार: आपकी एक पुस्तक या कॉपी से कई छात्र लाभान्वित हो सकते हैं। इससे समाज में पढ़ने की संस्कृति (Reading Culture) को बढ़ावा मिलता है।
Author Profile

- अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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