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महासमुंद आरपीएफ पोस्ट से हर महीने 25 हजार रु. देने की डिमांड पर रेल मंत्रालय ने तत्काल संज्ञान में लेकर सीनियर डीएससी B. Jayanna Krupakar का तबादला किया.

On: November 16, 2024 1:15 PM

(वायरलेस न्यूज नेटवर्क) संबलपुर रेल मंडल के सीनियर डीएससी (यानी आरपीएफ कमांडेंट) ने महासमुंद आरपीएफ पोस्ट से हर महीने 25 हजार रुपए देने की डिमांड की थी. . रेल मंत्रालय भारत सरकार ने तुरंत संज्ञान लिया और 24 घंटे के भीतर सीनियर डीएससी B. Jayanna Krupakar का तबादला कर दिया.

सीनियर डीएससी B. Jayanna Krupakar पर महासमुंद आरपीएफ पोस्ट के इंस्पेक्टर प्रवीण सिंह धाकड़ ने गंभीर आरोप लगाया था. इंस्पेक्टर ने इस संबंध में एक शिकायत भी भुवनेश्वर में बैठने वाले जोन के आईजी से की है. सूत्रों का दावा है कि डीएससी की शिकायत के बाद पिछले दिनों दीपावली पर डीएससी दिल्ली से रायपुर फ्लाइट से पहुंचे और यहां से वे निरीक्षण करने महासमुंद पोस्ट गए और वहां सभी स्टॉफ को मिठाई खिलाई और बाद में इंस्पेक्टर से अकेले में जाकर बातचीत की और शिकायत वापस लेने कहा. ये पूरा वाक्या वहां मौजूद स्टॉफ के सामने हुआ.
क्या है मामला
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक संबलपुर रेल मंडल के कमांडेंट ने एक आरक्षक को अपना एजेंट बनाकर महासमुंद भेजा. कागजों में कमांडेंट ने उक्त आरक्षक की ऑफिशियल ड्यूटी भी दिखाई. इसके बाद आरक्षक पोस्ट पहुंचा और इंस्पेक्टर से कहा कि डीएससी साहब को इस पोस्ट से 25 हजार रुपए महीने चाहिए. यहां कहा-कहा से पैसे आते है सब डीएससी साहब को पता है. जानकारी के मुताबिक इंस्पेक्टर ने डीएससी को फांसने के लिए जाल बिछाया. उन्होंने 7.5 हजार रुपए प्रतिमाह के हिसाब से 15 हजार रुपए की पहली किश्त दी. उक्त आरक्षक पैसे लेकर संबलपुर गया और वापस महासमुंद आया. लेकिन इस बार जब वो आया तो इंस्पेक्टर ने उसे अपने जाल में फंसा लिया और उसकी बातों को रिकार्ड कर लिया.

जिसकी जांच आरपीएफ ने शुरू कर दी है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि इस कथित ऑडियो में कितनी सच्चाई है. हालांकि सूत्रों का दावा है कि भुवनेश्वर के लैब से जांच के बाद इंस्पेक्टर और उक्त आरक्षक के आवाज के सैंपल मैच हो गए है. ये आरपीएफ जांच के बाद स्पष्ट करेगा कि इसमें सच्चाई कितनी है, लेकिन जो ऑडियो में सुना जा सकता है कि आरक्षक ये कह रहा है कि डीएससी साहब नाराज हो गए है. वो 25 से कम में नहीं मानने वाले है. आरक्षक ये भी कहता है कि मैं उन्हें किसी तरह 15 में (15 हजार रूपए में) मनवा लूंगा. जिसके बाद इंस्पेक्टर ये कहते है कि इतना तो मैं नहीं करवा पाऊंगा, साहब से कह दीजिए जहां चाहे ट्रांसफर करवा दे.

साभार लल्लूराम डाटकाम

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Amit Mishra
Amit Mishra
अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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