*बुलडोज़र एक्शन पर “न्याय” सुप्रीम कोर्ट का अहम फ़ैसला, स्वागतोग्य – भगवानू*
रायपुर, छत्तीसगढ़, (वायरलेस न्यूज 14.11.2024) जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे)के मुख्य प्रवक्ता अधिवक्ता भगवानू नायक ने कहा देश के सर्वोच्च अदालत माननीय न्यायालय सुप्रीम कोर्ट के द्वारा अफ़सरों के मनमाने बुलडोज़र कार्यवाही पर “न्याय” करते हुए अहम फ़ैसला दिया है और इस सम्बंध में सुप्रीम गाइडलाइन जारी किया है जो स्वागत योग्य है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपने 95 पन्नों के फ़ैसले में कहा बिना कारण बताओ नोटिस के किसी के मकान का ध्वस्तिकरण की कार्यवाही नहीं की जाएगी, यदि ध्वस्तीकरण का आदेश पारित किया जाता है तो अपील का समय दिया जाएगा, मालिक को पंजीकृत डाक के माध्यम से नोटिस भेजा जाएगा, नोटिस तामील होने के बाद 15 दिन का समय दिया जाएगा, नोटिस तामिल होने के बाद कलेक्टर और ज़िला मजिस्ट्रेट को सूचना भेजी जाएगी आदि महत्वूर्ण गाइडलाइन जारी की गयी है। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अफ़सरों की मनमानी कार्यवाही पर कहा यह अफ़सर जज नहीं बन सकते बुलडोज़र की की कार्यवाही “शक्तियों के पृथक्करण” सिद्धांत का उल्लंघन है। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसले में प्रसिद्ध कवि प्रदीप की पंक्तियों का भी उल्लेख किया कि अपना घर हो, अपना आगंन हो, इस ख़्वाब में हर कोई जीता है, इंसान के दिल की यह चाहत है कि एक घर का सपना कभी ना छूटे, इस प्रकार प्रसिद्ध कवि प्रदीप ने आशियाना के महत्व का वर्णन किया है।
अधिवक्ता भगवानू नायक ने कहा Right to shelter निवास का अधिकार, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अंर्तगत मौलिक अधिकार है, किसी के भी मकान को नियम विरुद्ध तोड़ा नहीं जा सकता, किसी एक आरोपी के लिए घर के सभी सदस्यों को सजा नहीं दिया सकता वैसे भी न्याय शास्त्र में दंड देने का अधिकार न्यायालय को है किसी अधिकारी को नहीं, जिसे माननीय सुप्रीम कोर्ट अपने फ़ैसले में स्पष्ट कर दिया।
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