तेंदुए को कहां छोड़ा? पूछने पर भारत की प्रभुता और अखंडता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की धारा लगाकर जानकारी देने से किया मना
रायपुर ( वायरलेस न्यूज़) 4 जुलाई/ छत्तीसगढ़ वन विभाग जो करे वह कम है। डोंगरगढ़ में 7 मई को पकडे गए तेंदुए को कहां छोड़ा? पूछने पर राजनांदगांव वन मंडल ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(a) का हवाला देकर सूचना देने से मना किया गया है। इस धारा के तहत वह सूचना नहीं दी जानी है (1) जिसके प्रकरण से भारत की प्रभुता और अखंडता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हो (2) जिसके प्रकटन से राज्य की सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हो (3) जिसके प्रकटन से राज्य के वैज्ञानिक या आर्थिक हित पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हो (4) जिसके प्रकटन से विदेश से सम्बंध पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हो या (5) जिसके प्रकटन से किसी अपराध को करने का उद्दीपन होता हो। जन सूचना अधिकारी सह वन मंडलाधिकारी राजनांदगांव ने यह कहकर इस धारा का प्रयोग किया है कि वन्यप्राणी की सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए धारा 8(1)(a) के तहत सूचना प्रदान नहीं की जा सकती।

क्या है पूरा मामला
दरअसल 7 मई को डोंगरगढ़ के सुदर्शन पहाड़ी से एक तेंदुए को पड़कर किसी अन्य स्थान पर छोड़ा गया। भारत सरकार की गाइडलाइंस कहती है कि तेंदुआ को उसके रहवास क्षेत्र के 10 किलोमीटर के आसपास छोड़ जाना चाहिए परंतु छत्तीसगढ़ वन विभाग तेंदुए को पकड़ कर 200-300 किलोमीटर दूर छोड़ देता है। गरियाबंद जिले से पकड़ता है और अचानक मार्ग टाइगर रिजर्व में छोड़ देता है। तेंदुए को अपने रहवास क्षेत्र से बहुत लगाव होता है इसीलिए भारत सरकार ने 10 किलोमीटर की गाइडलाइंस जारी की है। दूर छोड़े जाने पर तेंदुए को मानसिक आघात लगता है। अपने घर से दूर भूख, प्यास, गुस्से में वह दूसरे स्थान पर आक्रामक हो सकता है। भूख, प्यास से मर सकता है या अगर कोई बड़ा तेंदुआ उस इलाके में है तो बड़े तेंदुए से उसके जीवन को खतरा हो सकता है। इसलिए रायपुर के नितिन सिंघवी ने सूचना के अधिकार के तहत जानना चाहा कि तेंदुए को कहां छोड़ा गया, जिसे भारत की प्रभुता और अखंडता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की धारा लगाकर देने से मना कर दिया। इस मामले को कर प्रथम अपील दायर की गई है।
अहिंसक बता के पकड़ा तेंदुए को
वनमंडल अधिकारी राजनांदगांव ने डोंगरगढ़ में पकड़े गए तेंदुए को हिंसक वन्यप्राणी बताकर उसे पकड़ने की अनुमति प्रधान मुख्य वन संरक्षण (वन्यप्राणी) से मांगी थी। जबकि तेंदुआ 5 दिन सुदर्शन पहाड़ी के आसपास पर रहा और उससे कोई भी जनहानि नहीं हुई और ना कोई नुकसान हुआ। जब जन सूचना अधिकारी से पूछा गया कि किस आधार पर तेंदुए को हिंसक वन्यप्राणी बताया गया तो उन्होंने लिख कर दिया है की तेंदुए को हिंसक वन्यप्राणी बताने के संबंध में उनके कार्यालय में कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं है।
नितिन सिंघवी
9826126200
Author Profile

- अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
Latest entries
बिलासपुरAugust 11, 2026कॉलेजों में बनेंगे इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब
बिलासपुरAugust 10, 2026सैनिकों के सम्मान में स्काउट्स-गाइड्स का ‘रक्षा सूत्र अभियान’
बिलासपुरAugust 10, 2026सफलता की कहानीसरस्वती साइकिल योजना से हंसिका के लिए शिक्षा की राह हुई आसान
छत्तीसगढ़August 9, 2026कलेक्टर संजय कुमार जैन और एसपी सुरेंद्र कुमार जैन ने हरी झंडी दिखाकर तिरंगा यात्रा का किया शुभारंभ





