*सीजेआई पर हमला, न्याय व्यवस्था की आत्मा पर हमला- भगवानू*

रायपुर, छत्तीसगढ़, : ( वायरलेस न्यूज) सामाजिक न्याय कार्यकर्ता व अधिवक्ता भगवानू नायक ने देश के सर्वोच्च न्यायालय में एक अधिवक्ता द्वारा माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री बी. आर. गवई पर जूता फेंकने के घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा यह घटना केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं है बल्कि भारत के संविधान, लोकतंत्र की मजबूत नींव और न्याय व्यवस्था पर हमला है। न्यायपालिका देश में न्याय की अंतिम आशा है और उसके प्रमुख के प्रति ऐसा घृणित व्यवहार किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता। माननीय सीजेआई द्वारा इस घटना को व्यक्तिगत रूप से न लेना और कार्यवाही से इनकार करना उनकी उदारता और न्याय व्यवस्था के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है, जो एक बड़े हृदय का परिचय है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का आभार है जिन्होंने इस घटना की तत्काल निंदा की और माननीय मुख्य न्यायाधीश से बात किया और अपने संदेश में कहा इस घटना से हर भारतीय ग़ुस्सा में है जो यह दर्शाता है कि देश का नेतृत्व न्यायपालिका की गरिमा के साथ खड़ा है। अधिवक्ता भगवानू नायक ने इस घटना के पीछे की मानसिकता पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा इस बात पर भी ध्यान देना आवश्यक है कि माननीय सीजेआई श्री गवई साहब दलित समुदाय से आते हैं। कहीं न कहीं समाज की एक सामंतवादी सोच इस बात को पचा नहीं पा रही है कि एक दलित समुदाय का व्यक्ति देश की सर्वोच्च न्यायिक पद पर आसीन है। यह घटना उसी संकीर्ण मानसिकता का परिचायक है।

उन्होंने कहा समाज के अंतिम छोर में खड़े दबे, कुचले, शोषित और पिछड़े समाज के लोग हमेशा से शांतिपूर्ण, संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीकों से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ते आए है। संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने हमें “शिक्षित बनो, संघर्ष करो और संगठित रहो” का जो मंत्र दिया है, वही हमारा मार्गदर्शक सिद्धांत है। । उन्होंने कहा हम मांग करते हैं कि इस घटना की गहन न्यायिक जांच हो, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाई जाए, समाज में फैली जातिवादी और सामंतवादी सोच के खिलाफ व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *