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सिम्स में प्रोफेसर भर्ती के लिए CGPSC ने एक और फर्जीवाड़ा करने जा रहा, डॉ लहरे CHC फिंगेश्वर में नियमित रहते मेडिकल कॉलेज से सीनियर रेजिडेंट (SR) का अनुभव हासिल किया मंत्री से हुई शिकायत

On: March 17, 2026 3:03 AM

रायपुर. ( वायरलेस न्यूज) छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में फिर से एक बड़े फर्जीवाड़े की शिकायत सामने आई है। आरोप है कि एक डॉक्टर ने अपनी अनिवार्य ग्रामीण सेवा (बांड) के दौरान ही नियमों को ताक पर रखकर प्राइवेट मेडिकल कॉलेज से सीनियर रेजिडेंट (SR) का अनुभव हासिल कर लिया। इतना ही नहीं, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मिलीभगत कर बांड की अवधि खत्म होने से पहले ही फर्जी तरीके से ‘अनुबंध पूर्णता प्रमाण पत्र’ (Bond Completion Certificate) भी जारी कर दिया। इस पूरे खेल की शिकायत स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से की गई है। फिर भी डॉ विपिन लहरे को सिम्स मेडिकल कॉलेज बिलासपुर में कम्युनिटी मेडिसिन फ्रोफेसर के पद हेतु CGPSC रायपुर ने आज 11 बजे साक्षात्कार लेने जा रहा है।

शिकायत के मुताबिक, डॉ. विपिन लहरे ने साल 2020 में पं. जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय (मेकाहारा), रायपुर से एमडी (कम्युनिटी मेडिसिन) में एडमिशन लिया था। 2023 में उनकी पढ़ाई पूरी हुई। सरकारी नियम के मुताबिक, मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टरों को 2 साल ग्रामीण इलाके में सेवा देनी होती है। डॉ. लहरे गरियाबंद जिले के CHC फिंगेश्वर में नियमित चिकित्सा अधिकारी के पद पर पदस्थ हैं। 13 मार्च 2024 को उनकी 2 साल की बांड पोस्टिंग का आदेश जारी हुआ। इसके हिसाब से उनका बांड इसी महीने यानी मार्च 2026 में खत्म होना चाहिए। लेकिन, बांड खत्म होने से पहले ही उन्होंने CGPSC में असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए फॉर्म भर दिया।

नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) का साफ नियम है कि किसी भी मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए एक साल बतौर ‘सीनियर रेजिडेंट’ काम करना अनिवार्य है। यह अनुभव सिर्फ मेडिकल कॉलेज में पढ़ाने पर ही मिलता है। बड़ा सवाल यह है कि जब डॉ. लहरे CHC फिंगेश्वर में नियमित सरकारी नौकरी कर रहे हैं, तो उन्हें मेडिकल कॉलेज का अनुभव कैसे मिल गया? शिकायत में दावा किया गया है कि प्राइवेट संस्थान ‘श्री रावतपुरा सरकार इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस, रायपुर’ की वेबसाइट पर डॉ. लहरे को कम्युनिटी मेडिसिन विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर दिखाया गया है। एक ही व्यक्ति एक साथ सरकारी अस्पताल में ड्यूटी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में कैसे पढ़ा सकता है?
इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की भूमिका सबसे ज्यादा संदिग्ध है। डॉ. विपिन का बांड पोस्टिंग आदेश 13 मार्च 2024 को निकला था, यानी बांड मार्च 2026 में पूरा होना है। लेकिन, स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय ने 14 नवंबर 2025 को ही एक ‘अनुबंध पूर्णता प्रमाण पत्र’ जारी कर दिया। अधिकारियों ने चालाकी करते हुए सेवा शुरू करने की तारीख 26 जुलाई 2023 दिखा दी, जबकि बांड का आदेश ही मार्च 2024 में निकला था।

यह मामला सिर्फ एक डॉक्टर का नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य महकमे में फैले भ्रष्टाचार का है।

सवाल है जब डॉक्टर सरकारी अस्पताल में पदस्थ था, तो प्राइवेट कॉलेज ने उसे अनुभव प्रमाण पत्र कैसे दे दिया?

सवाल है स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने बिना जांचे बैकडेट से बांड पूरा होने का सर्टिफिकेट कैसे बांट दिया?

अगर ऐसे फर्जी दस्तावेजों के आधार पर CGPSC में भर्तियां होंगी, तो उन योग्य और ईमानदार उम्मीदवारों का हक मारा जाएगा जो सालों से मेहनत कर रहे हैं।
शिकायतकर्ताओ ने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से मांग की है कि संचालनालय द्वारा जारी बांड सर्टिफिकेट की तुरंत जांच की जाए। साथ ही, CGPSC से डॉ. विपिन लहरे का नामांकन रद्द कर कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष हो सके।

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Amit Mishra
Amit Mishra
अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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